भविष्य में आपको अगर किसी अंग की जरूरत पड़े तो हो सकता है कि आपको किसी डोनर की जरूरत न पड़े. किसी सुअर का अंग आपके शरीर में लगा दिया जाए. हाल ही में सुअर का दिल लगाया गया था. अब वैज्ञानिकों ने जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की दो किडनी एक ब्रेन डेड इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित की. जिसने सही तरीके यूरिन का फ्लो बनाए रखा और इंसान के शरीर ने किडनी को रिजेक्ट नहीं किया. (फोटोःगेटी)
जिस ब्रेन डेड मरीज के शरीर में सुअर की किडनियां लगाई गई हैं, वो एक रजिस्टर्ड मेडिकल डोनर है. उसके परिवार ने इस प्रयोग के लिए सहमति दी थी. इस एक्सपेरीमेंट की रिपोर्ट 20 जनवरी 2022 को अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रांसप्लांटेशन में प्रकाशित हुई है. पहले वैज्ञानिकों की टीम का प्लान था कि इस प्रयोग को जीवित इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल के तौर पर पूरा किया जाए. लेकिन उससे पहले सुरक्षा का ख्याल रखना जरूरी था, इसलिए ब्रेन डेड मरीज पर प्रयोग किया गया, जो कि सफल रहा है. (फोटोःगेटी)
वैज्ञानिक यह देखना चाहते थे कि ब्रेन डेड मरीज का शरीर सुअर की किडनी रिसीव करने के बाद किस तरह से प्रतिक्रिया करता है. अंग को लेकर कोई रिजेक्शन तो नहीं हो रहा है. किसी तरह के वायरस, बैक्टीरिया या बग का संक्रमण तो नहीं फैल रहा है. क्योंकि यहां पर एक जानवर डोनर है और इंसान रिसीवर. इसलिए यह जरूरी था कि पहले सुरक्षा के लिहाज से एक प्रयोग कर लिया जाए. (फोटोःगेटी)
यह ट्रांसप्लांट करने वाली टीम के एक डॉक्टर ने बताया कि यह प्रयोग सफल रहा है. हम इस बात से भी खुश हैं कि ब्रेन डेड मरीज के शरीर ने सुअर की किडनियों को रिजेक्ट नहीं किया. उसके शरीर में किडनी उसी तरह से काम करती रही, जैसे इंसान की सामान्य किडनी काम करती है. वह भी कई दिनों तक. अब हम क्लीनिकल ट्रायल के लिए जाएंगे, लेकिन उससे पहले कुछ छोटे-मोटे प्रयोग करने बाकी हैं. (फोटोःगेटी)
सितंबर 2021 में न्यूयॉर्क के लैंगोन हेल्थ में एक ब्रेन डेड मरीज पर ऐसा ही प्रयोग किया था. उन्होंने एक जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी मरीज में लगाई थी. यह करीब 54 घंटे तक सही से काम करती रही. शरीर के कचरे को फिल्टर करती रही. तत्काल किसी तरह के रिजेक्शन का कोई लक्षण भी नहीं दिख रहा था. लेकिन किडनी इंसान के शरीर से बाहर रखी गई थी. उसे शरीर की नसों से जोड़ दिया गया था. शरीर के अंदर प्रत्यारोपित नहीं किया गया था. इस बार सुअर की जेनेटिकली मॉडिफाइड किडनी को ब्रेन डेड मरीज के शरीर में लगाया गया है. (फोटोःगेटी)
यूनिवर्सिटी ऑफ अलाबामा एट बर्मिंघम (UAB) की कॉम्प्रिहेंसिव ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और सर्जरी में शामिल लीड सर्जन डॉ. जेमी लॉक ने बताया कि हमनें इस बार दो किडनी लगाई है. दोनों शरीर के अंदर हैं. जैसा कि इंसान से इंसान में प्रत्यारोपण किया जाता है. हमने वहीं प्रक्रिया अपनाई है, जो हम भविष्य में क्लीनिकल ट्रायल में करेंगे. (फोटोःUAB)
डॉ. जेमी लॉक ने बताया कि जो किडनी उपयोग की गई उसे Revivicor ने जेनेटिकली मॉडिफाई किया है. इससे पहले इसी कंपनी द्वारा जेनेटिकली मॉडिफाइड दिल को इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया था. उस सुअर का दिल भी उसी तरह से जेनेटिकली मॉडिफाई किया गया था, जैसा कि इस बार दोनों किडनियों को किया गया है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे इंसानों का भविष्य सुधर सकता है. हमें इंसान के लिए किसी अन्य इंसान डोनर की जरूरत नहीं पड़ेगी. (फोटोःगेटी)
किसी भी अंग को जेनेटिकली मॉडिफाई इसलिए किया जाता है ताकि इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित करते समय किसी तरह का रिजेक्शन न हो. जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर के शरीर में तीन जीन्स कम कर दिए गए हैं. जो खास तरह के कार्बोहाइड्रेट्स की कोडिंग के साथ होते हैं. इंसान के शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स के मॉलिक्यूल खतरनाक इम्यून रेसपॉन्स विकसित करता है. डोनर सुअर के शरीर में कुछ जीन को खत्म करके खास हार्मोन रिसेप्टर डाले जाते हैं, जो अंग को सुअर के शरीर में विकसित करते हैं, लेकिन इंसान के शरीर में आते ही विकसित होना बंद कर देते हैं. (फोटोःगेटी)
सर्जरी के दौरान ब्रेन डेड मरीज के शरीर से दोनों इंसानी किडनियां निकाल दी गईं. उसे इम्यूनोसप्रेसिव ड्रग्स पर रखा गया ताकि अंग को रिजेक्ट करने की आशंका घट जाए. इसके बाद सुअर की जेनेटिकली मॉडिफाइड किडनियों को मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया. तीन दिनों तक किडनी की मॉनिटरिंग की जाती रही. उस दौरान मरीज के शरीर ने किडनी के साथ किसी तरह का रिएक्शन नहीं किया. (फोटोःगेटी)