ये है दुनिया का सबसे ज्यादा दांत वाला जीव. इस मछली के मुंह में 555 दांत होते हैं. हर दिन 20 दांत टूटते हैं, हर दिन 20 दांत निकलते हैं. ये 555 दांत मुंह के अंदर दो जोड़े जबड़े में इस तरह से सेट होते हैं कि इनमें फंसने वाला जीव चारों तरफ फंस जाता है. एक ही बार में ये अपने शिकार को टुकड़े-टुकड़े में बांट देती हैं. आइए जानते हैं कि इस मछली के इतने दांत कैसे आए? यह कहां मिलती है? क्या खाती है? क्या ये इंसानों के लिए खतरनाक है? (फोटोः गेटी/कैचरमैन)
सबसे ज्यादा दांत वाला मुंह लेकर घूमने वाली इस मछली को पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) कहते हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी में बताया गया है कि हर दिन इसके 20 दांत टूटते हैं और उतने ही निकल आते हैं. इंसानों के दांत निकलने में कितना समय लगता है, लेकिन यहां इसके शरीर में दांत बनने और टूटने का प्रोसेस बहुत तेज है. (फोटोः गेटी)
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में बायोलॉजी की डॉक्टोरल कैंडिडेट कार्ली कोहेन ने बताया कि पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) के मुंह की हड्डियां अंदर से पूरी तरह दांतों से पैक होती हैं. इस विज्ञान की भाषा में ओफियोडॉन इलॉन्गेटस (Ophiodon Elongatus) कहते हैं. यह एक शिकारी मछली है जो उत्तरी प्रशांत महासागर में मिलती है. (फोटोः गेटी)
पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) की लंबाई औसत 20 इंच होती है लेकिन कुछ मछलियां पांच फीट तक बढ़ सकती हैं. इस मछली का मुंह कैसे काम करता है, इसके इतने दांत कैसे हुए जैसे सवालों के जवाब खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक मछली पकड़ी और उसकी जांच की. इस मछली के मुंह में इनसीजर्स, मोलर्स और कैनाइन्स जैसे दांत नहीं होते. सिर्फ तेज नुकीले माइक्रोस्कोपिक दांत होते हैं. (फोटोःगेटी)
इसके दो जोड़े जबड़े की अंदरूनी परत कठोर होती है, उसमें भी बेहद सूक्ष्म दांत निकलते हैं. हर जबड़े के सेट के पीछे एक सपोर्टिव जबड़ा होता है, जिसे फैरिंजियल जॉ (Pharyngeal Jaws) कहते हैं. यह मछली इन्हीं जबड़ों की मदद से अपने शिकार को तोड़ती है जैसे इंसान मोलर्स दांत के सहारे किसी चीज को चबाते हैं. (फोटोः गेटी)
कार्ली कोहेन कहती हैं कि इस मछली के दांतों की तुलना जब हम किसी स्तनधारी जीव से करते हैं, तब पता चलता है कि यह कितनी अलग है. इसकी यही विभिन्नता इसे रोचक बनाती है. इसलिए हमने इसका अध्ययन करने की योजना बनाई. किसी भी जीव के दांतों की स्टडी करके यह पता लगाया जा सकता है कि यह किस तरह का खाना खाता है. क्योंकि दांत जल्दी खत्म नहीं होते. इनके जीवाश्म भी लंबे समय तक टिके रहते हैं. (फोटोः गेटी)
पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) इकलौती ऐसी जिंदा मछली है, जिसके दांतों को मृत मछलियों के जीवाश्म के साथ रखा गया है. यह मछली अपने मुंह से इतने दांत बाहर निकाल देती है क्योंकि लगातार उसे इतने दांत वापस पैदा हो जाते हैं. कार्ली ने कहा कि हमें इस बात का कोई आइडिया नहीं है कि यह दांत कैसे पैदा होते और टूटते हैं. (फोटोः गेटी)
कार्ली के साथ यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा की अंडरग्रैजुएट बायोलॉजी स्टूडेंट एमिली कार ने मिलकर 20 पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) की स्टडी की. इस मछली के दांत इतने छोटे होते हैं कि उनके टूटने की प्रक्रिया को देख पाना बेहद मुश्किल काम है. क्योंकि यह पानी में तलहटी में तैरती है. ऊपर बेहद कम आती है. इसलिए इन लोगों ने इस मछली के जबड़े में डाईल्यूट रेड डाई लगा दिया. (फोटोः गेटी)
लाल डाई लगाने से मछली का जबड़ा लाल हो गया. उसके बाद उसे ऐसे एक्वेरियम में रखा गया जिसमें फ्लोरोसेंट ग्रीन डाई भरा था. जिससे उसके दांत वापस से नए रंग में बदल गए. इसके बाद एमिली कार ने इस मछली को पानी से निकालकर अंधेरे लैब में माइक्रोस्कोप के नीच रखा. ताकि दांतों की गिनती की जा सके. इससे लाल और हरे दांतों का अंतर पता चलता. इसने 20 मछलियों के मुंह में 10 हजार से ज्यादा दांत गिने. (फोटोः गेटी)
एमिली ने बताया कि लैब में जांच के दौरान उसे पता चला कि पैसिफिक लिंगकॉड (Pacific Lingcod) हर दिन अपने मुंह से 20 दांत तोड़ देती है. उसके फैरिंजियल जॉ हर दिन दांत छोड़ देते हैं. हालांकि ये पता नहीं चल पाया कि हर उसके मुंह में इतने दांत निकल कैसे आते हैं. यह स्टडी हाल ही में प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)