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साइंस न्यूज़

दिमाग की सभी कोशिकाओं की 'दादी' कोशिका खोजी गई, कहते हैं ग्रैंडमदर न्यूरॉन

Grandmother Neurons
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जब आप अपनी दादी, नानी या किसी जाने-पहचाने चेहरे से मिलते हैं तो आपका दिमाग उन्हें कैसे पहचानता है? इसके पीछे की वजह क्या है? आप यह जानकर हैरान होंगे कि इसके लिए दिमाग में मौजूद एक कोशिका (Cell) जिम्मेदार होती है. यह बताती है कि आप अपनी दादी या नानी से मिल रहे हैं. इस कोशिका का नाम है ग्रैंडमदर न्यूरॉन (Grandmother Neuron). 1960 से लेकर अब तक इस पर बहस होती आ रही थी कि क्या ऐसा संभव है. अब जाकर इस बात की पुष्टि हुई है कि हां ये कोशिका दिमाग में पाई जाती है. जिसे हम 'दादी न्यूरॉन कोशिका' कहते हैं. (फोटोःगेटी)

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हाल ही में साइंस जर्नल में यह स्टडी प्रकाशित हुई है कि दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) की खोज हुई है. बंदरों में किए गए अध्ययन से इस बात को पुख्ता किया गया है. इस स्टडी में बताया गया कि बंदरों के दिमाग में एक छोटा हिस्सा सिर्फ इसी काम में आता है कि वो परिचितों को पहचान सके. जैसे ही कोई जान-पहचान की शक्ल दिखती है, उनके दिमाग के इस हिस्से की कोशिकाएं तीन गुना ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं. (फोटोःगेटी)

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इस स्टडी में यह अध्ययन भी किया गया कि इंसान के दिमाग के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग कामों के लिए बंटे हुए हैं. इसमें एक हिस्सा ऐसा है जो शक्लों को पहचानने का ही काम करता है. इस हिस्से में खास तरह के न्यूरॉन्स होते हैं जो पहचानी हुई शक्लों, सेलिब्रिटीज और लैंडमार्क्स को देखकर एक्टिव होते हैं. वहीं, कुछ अन्य स्टडीज में यह दावा भी किया गया था कि दिमाग का कोई भी हिस्सा निजी संबंधों वाले शक्लों को पहचानने में मदद करते हैं. (फोटोःगेटी)

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अभी हुई नई स्टडी में लोगों को पहचानने वाली कोशिकाओं की पहचान नहीं हुई है लेकिन यह बात पुख्ता हो गई है कि दिमाग में दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) होती है. ये कोशिका ही लोगों, इमारतों और जगहों को पहचानने में मदद करती है. न्यूयॉर्क सिटी स्थित द रॉकफेलर यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस एंड बिहेवियर के प्रोफेसर विनरिच फ्रीवाल्ड ने कहा कि ये स्टडी सही है. ये बताती है कि हमारे दिमाग में ग्रैंडमदर न्यूरॉन्स होते हैं. (फोटोःगेटी)

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विनरिच फ्रीवाल्ड ने कहा कि दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) दृष्टि और याद्दाश्त का अजब मिश्रण होता है. यानी ये एक बार देखी हुई चीज को याद कर लेती हैं. जिस व्यक्ति या स्थान को बारबार देखती हैं, उन्हें लेकर इनमें कोई दुविधा नहीं होती. ये तत्काल उन्हें पहचान लेती हैं. विनरिच कहते हैं कि हमनें टेंपोरल पोल (Temporal Pole) को समझने की कोशिश की. ये दिमाग के निचले हिस्से में होती है, जिसे लोग कम जानते हैं. (फोटोःगेटी)

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विनरिच के साथ सिएटल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की पोस्टडॉक्टोरल फेलो सोफिया लांडी कहती हैं कि साल 2017 में दिमाग के अंदर दो हिस्से पता किए गए थे, जो किसी भी वस्तु और लोगों को पहचानने में मदद करते हैं. यह स्टडी भी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई थी. नई स्टडी के लिए विनरिच और सोफिया ने दो रीसस बंदरों के दिमाग की फंक्शनल मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (fMRI) की. ये इमेजिंग तब की गई जब वो अलग-अलग इंसानों और अन्य वस्तुओं की शक्ल देख रहे थे. (फोटोःगेटी)

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दिमाग की स्कैनिंग के दौरान विनरिच और सोफिया ने देखा बंदरों के दिमाग के इन दोनों हिस्सों में इलेक्ट्रोड जैसी सक्रियता देखने को मिली थी. लेकिन टेंपोरल पोल के एक हिस्से में यह सक्रियता बहुत ज्यादा थी. दिमाग का यही एरिया लोगों की शक्लें, स्थान और इमारतों को पहचानने में मदद करता है. यह जाने और अनजाने वस्तुओं और जीवों में अंतर बताता है. लेकिन जिन दो हिस्सों की जांच की जा रही थी वो दोनों ही एक्टिव होते हैं. (फोटोःगेटी)

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बंदरों ने जैसे ही अपने जानने वाले बंदरों या इंसानों की तस्वीरें देखी उनके टेंपोरल पोल में स्थित दोनों हिस्सों के दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) सक्रिय हो गए. लेकिन एक हिस्से में यह सक्रियता तीन गुना ज्यादा देखी गई. वहीं जब अनजान लोगों की तस्वीरें दिखाई गईं तो दिमाग के इन हिस्सों में कोई सक्रियता नहीं दिखाई दी. लेकिन ये दादी कोशिकाएं अनजान लोगों की शक्लों पर कोई सक्रियता नहीं दिखातीं. (फोटोःगेटी)

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यह खोज वर्तमान न्यूरोसाइंस के खिलाफ जाकर खुद को पुख्ता कर रहा है. आमतौर पर वैज्ञानिक ये मानते हैं कि दिमाग के अंदर अलग-अलग हिस्से अलग-अलग कामों के लिए बने होते हैं. ये हिस्से किसी भी संदेश को समझने के लिए आपस में संचार करते हैं. लेकिन दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) इकलौता ऐसा हिस्सा है जो दिमाग के अन्य हिस्सों से कोई मतलब नहीं रखता. पहचानी हुई चीज देख कर सक्रिय होता है. अनजान पर चुपचाप पड़ा रहता है. (फोटोःगेटी)

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वैज्ञानिकों ने अध्ययन में यह भी पाया कि अगर कोई तस्वीर धुंधली है तब दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) धीरे-धीरे सक्रिय होती हैं. जैसे-जैसे तस्वीर साफ होती जाती है वैसे-वैसे ये कोशिकाएं और सक्रिय होती जाती हैं. वहीं, टेंपोरल पोल की अन्य कोशिकाएं अलग तरह से व्यवहार करती हैं. ये तब तक सक्रिय नहीं होतीं, जब तक तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो जाती. जैसे ही तस्वीर स्पष्ट होती है, ये सारी कोशिकाएं एकसाथ सक्रिय हो जाती हैं. (फोटोःगेटी)

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विनरिच और सोफिया ने जब यह जानने की कोशिश की ये दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) और टेंपोरल पोल की अन्य कोशिकाएं कितनी तेजी से चीजों को पहचानने का काम करती हैं, तो वो हैरान रह गए. क्योंकि दोनों ही कोशिकाओं की सक्रियता का समय उतना ही था. लेकिन दादी कोशिकाएं एक बार सक्रिय होती हैं तो उनकी तीव्रता तीन गुना ज्यादा हो जाती है. जबकि टेंपोरल पोल की बाकी कोशिकाएं सामान्य तरीके से काम करती हैं. (फोटोःगेटी)

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विनरिच कहते हैं कि इंसानों के दिमाग को लेकर हम सिर्फ एक अंदाजा लगा रहे हैं. यह स्टडी बंदरों के दिमाग पर की गई है. इंसानों और बंदरों के दिमाग में काफी अंतर है. रीसस बंदर बेहद सामाजिक जीव होते हैं, इसलिए उनके दिमाग का अध्ययन किया गया है. हालांकि ये बात तो पुख्ता हो गई है कि  दादी न्यूरॉन कोशिका (Grandmother Neuron Cell) होती हैं. ये सक्रियता से काम भी करती हैं. (फोटोःगेटी)

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