अभी आपके खाने के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर फूड ज्वाइंट्स, कैफे, रेस्टोरेंट्स मौजूद हैं. क्या 20 लाख साल पहले ऐसा था. पाषाण युग (Stone Age) में मौजूद हमारे पूर्वज दुनिया के आला शिकारी थे. इन्हें खाने के लिए ज्यादातर शिकार पर निर्भर रहना पड़ता था. इसी वजह से करीब 20 लाख सालों तक इंसानों के पूर्वज (Human Ancestors) ज्यादातर मांस (Meat) ही खाते रहे. ये खुलासा किया है तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने. (फोटोःगेटी)
मनुष्य जाति के विज्ञान (Anthropology) का अध्ययन करने वाले साइंटिस्ट और अलग-अलग विधाओं के जानकारों ने मिलकर यह अध्ययन किया है. इसके लिए एक ऐतिहासिक रीकंस्ट्रक्शन मॉडल बनाया गया ताकि ये पता लगाया जा सके कि इंसान अपने खान-पान को लेकर कितना फ्लेक्सिबल था. क्योंकि उस समय खाने-पीने के लिए हर चौराहे या नुक्कड़ पर ठेले या खोमचे नहीं होते थे. (फोटोःडॉ. मिकी बेन-डोर)
इसलिए इंसानों के पूर्वज (Human Ancestors) कोशिश करते थे कि वो बड़े जानवरों का शिकार करते थे. हमारे पूर्वज मांसाहार के साथ थोड़ा-बहुत सब्जियां खाते थे. शोधकर्ताओं ने कहा है कि पाषाण युग (Stone Age) में इतना ज्यादा शिकार किया गया कि बड़े जानवर (Megafauna) की प्रजातियां कम हो गईं. इसलिए धीरे-धीरे इंसानों के पूर्वज (Human Ancestors) शाकाहार की तरफ बढ़ने लगे. (फोटोःगेटी)
Our Human Ancestors Were Apex Predators that Mostly Ate Meat for 2 Million Years: Studyhttps://t.co/J0fKHvU7Pf pic.twitter.com/xvtHslcrrg
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जब धरती पर प्राकृतिक आपदाएं आईं और स्थितियां इंसानों के खिलाफ जाने लगीं तो मनुष्यों ने पेड़-पौधे उगाने लगे. जानवरों को पालने लगे. इसके साथ ही इंसानों के पूर्वज (Human Ancestors) अब किसान बनने लगे. अमेरिकन फिजिकल एंथ्रोपोलॉजी एसोसिएशन (American Physical Anthropology Association) के एक्सपर्ट डॉ. मिकी बेन-डोर कहते हैं कि पुरातात्विक सबूतों को ध्यान में रखें तो हम इस बात को दरकिनार नहीं कर सकते कि कैसे इंसानों के पूर्वज मांसाहार से शाकाहार की तरफ आए. (फोटोःगेटी)
मिकी बेन-डोर ने बताया कि इस स्टडी में इस बात का पता चला है कि पौधे और सब्जियां पाषाण युग के अंत में इंसानों के खान-पान में शामिल हुआ. पाषाण युग (Stone Age) के अंत से पूरा ईकोसिस्टम अचानक से बदलने लगा. शोधकर्ताओं ने इंसानों के मेटाबॉलिज्म, जेनेटिक्स और शारीरिक बनावट के आधार पर जो परिणाम निकाले वो हैरान करने वाले थे. (फोटोःगेटी)
शोधकर्ताओं ने बताया कि इंसानों के मानसिक व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आया लेकिन शारीरिक विकास में काफी ज्यादा समय लगा. डॉ. मिकी बेन-डोर ने कहा कि हमने इस बात के सबूत इंसानों के पेट में पैदा होने वाले एसिड से जुटाए. अन्य सर्वाहारी जीवों और शिकारियों की तुलना में इंसानों के पेट में ज्यादा एसिड होता था. यानी इन्हें मांस को पचाने के लिए ज्यादा एसिड की जरूरत होती थी. (फोटोःगेटी)
इंसानों के जैविक अध्ययन और पुरातात्विक सबूत खान-पान में एसिड की मात्रा को पुख्ता करते हैं. डॉ. मिकी बेन-डोर ने कहा कि जब आप इंसानों के पूर्वजो (Human Ancestors) की हड्डियों की जांच करेंगे तो आपको पता चलेगा कि वो बड़े और मध्यम आकार के जीवों का शिकार करते थे. इनके स्टेबल आइसोटोप्स में मौजूद कार्बन और नाइट्रोजन के अणु कभी खत्म नहीं होते. इनका विश्लेषण करने से उस समय के क्लाइमेट, डाइट और हड्डियों के जियोग्राफिकल विभाजन का पता चलता था. (फोटोःगेटी)
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के जैकब एम. अलकोव डिपार्टमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी के प्रोफेसर रैन बारकाई ने बताया कि आज के इंसानों के लिए पैलियोलिथिक (Paleolithic) समय का खान-पान काफी जटिल था. किसी भी शाकाहारी को अगर ये कहें कि उसके पूर्वज (Ancestors) सिर्फ मांसाहार खाते थे तो वह आसानी से नहीं मानेगा. क्योंकि यह उसके निजी भरोसे और वैज्ञानिक सबूतों का संघर्ष होगा. लेकिन सच्चाई यही है. (फोटोःगेटी)