Indian Air Force ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 12 नए सुखोई सू-30एमकेआई फाइटर जेट्स देने को कहा है. इन फाइटर जेट्स में भारत की भौगोलिक, मौसम और अन्य जरूरतों के हिसाब से बदलाव किया जाएगा. इसमें भारतीय रडार, मिसाइलें और सब-सिस्टम लगाए जाएंगे. (फोटोः एएफपी)
ये उन 12 विमानों की जगह लेंगे, जो कुछ सालों में हादसों में खत्म हो गए. Su-30MKI एक मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. जो हवा से जमीन और हवा से हवा में एकसाथ युद्ध लड़ सकता है. (फोटोः एएफपी)
यह तेज और धीमी गति में हवा में कलाबाजियां खाते हुए दुश्मन को धोखा देते हुए उनपर हमला कर सकता है. Su-30MKI रूस के Su-27 का एडवांस्ड वर्जन है. वायुसेना के पास 272 Su-30MKI हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
Su-30MKI में 30mm की ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है. जो एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है. यानी दुश्मन का विमान, ड्रोन या हेलिकॉप्टर बच नहीं सकते. इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं. इसमें 4 तरह के रॉकेट्स लगा सकते हैं. चार तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम लग सकते हैं. या फिर इन सबका मिश्रण लगाया जा सकता है. (फोटोः गेटी)
Su-30MKI के हार्डप्वाइंट्स में हथियारों को दागने की सुविधा ज्यादा है. अगर मल्टीपल रैक्स लगाए जाएं तो इसमें 14 हथियार लगा सकते हैं. यह कुल 8130 KG वजन का हथियार उठा सकता है. इसमें ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात हो सकती हैं. चीन और पाकिस्तान जानते हैं कि ब्रह्मोस मिसाइल कितनी घातक और तेज है. (फोटोः इंडियन एयरफोर्स)
सुखोई में लगने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 500 km है. भविष्य में ब्रह्मोस मिसाइलों को मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी तैनात करने की योजना है. इसके अलावा पनडुब्बियों में लगाने के लिए ब्रह्मोस के नए वैरिएंट का निर्माण जारी है. (फोटोः गेटी)
यह इकलौता ऐसा फाइटर जेट है, जिसे अलग-अलग देश अपने हिसाब से ढाल लेते हैं. या बदलाव करवाते हैं. ताकि अपने देश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से उसकी तैनाती कर सकें. (फोटोः इंडिया टुडे)
भारत में Su-30MKI को HAL बनाती है. 1997 में HAL ने इसका लाइसेंस रूस से लिया था. फिर फाइटर जेट को अपने हिसाब से बदलना शुरू कर दिया. एमकेआई का मतलब होता है- Modernised Commercial Indian. सुखोई की लंबाई 72 फीट है. विंगस्पैन 48.3 फीट है. ऊंचाई 20.10 फीट है. इसका वजन 18,400 KG है. (फोटोः पीटीआई)
इसमें लीयुल्का L-31FP आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो उसे 123 किलोन्यूटन की ताकत देता है. यह फाइटर जेट अधिकतम 2120 किमी प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. रेंज भी 3000 km है. बीच रास्ते में ईंधन मिले तो यह 8000 km तक जा सकता है. यह 57 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. (फोटोः विकिपीडिया)