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साइंस न्यूज़

Gaganyaan Toilet: ये है गगनयान का Toilet... जानिए कहां और कैसे टॉयलेट जाएंगे हमारे एस्ट्रोनॉट्स

ISRO's Gaganyaan Toilet
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अगले साल गगनयान (Gaganyaan) लॉन्च करने की तैयारी में हैं. तीन भारतीय वायुसैनिकों की एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग बेंगलुरु में चल रही है. अब गगनयान तीन दिन अंतरिक्ष में रहेगा तो हमारे गगननॉट्स (Gagannauts) खाएंगे, पीएंगे, सोएंगे और टॉयलेट भी जाएंगे. आपके हर सवाल का जवाब देंगे लेकिन पहले सवाल उठता है टॉयलेट कहां जाएंगे? (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

ISRO's Gaganyaan Toilet
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ISRO ने गगनयान (Gaganyaan) के लिए जो टॉयलेट बनाया है, वो कहीं से भी नासा (NASA) के स्पेस स्टेशन में मौजूद टॉयलेट से कम नहीं है. इसरो ने इसे वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (Waste Management System) नाम दिया है. इसी एक टॉयलेट में हमारे गगननॉट्स सुसु और पॉटी कर सकेंगे. वह भी बिना किसी दिक्कत के. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

ISRO's Gaganyaan Toilet
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इस तस्वीर में दिख रहा ये टॉयलेट असल में गगनयान में लगने वाले टॉयलेट के आकार से आधा है. गगनयान का टॉयलेट ठीक इसी तरह का होगा. जिसमें एक सक्शन ट्यूब दिख रही होगी. जिसके ऊपर एक कोन लगा है, ये पेशाब करने के लिए है. उसके ठीक पीछे एक सफेद रंग का सीट है, जिसमें एक छेद बना है. इसका उपयोग पॉटी के लिए होगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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अंतरिक्ष में सुसू और पॉटी करना आसान काम नहीं है. आपके शरीर से अगर फोर्स के साथ मल निकला तो आप वैक्यूम में ऊपर की ओर उड़ सकते हैं. इसलिए इस टॉयलेट में सीट के अगल-बगल रीस्ट्रेन्स (Restrains) लगे हैं. जो गगननॉट्स पकड़कर या फिर अपनी जांघों में फंसाकर रख सकते हैं. साथ ही पैरों को फंसाने के लिए नीचे की तरफ फुट रीस्ट्रेन (Foot Restrain) लगा है ताकि आप पैर फंसाकर बैठ सकें. नहीं तो इधर मल निकला और उधर एस्ट्रोनॉट जीरो ग्रैविटी में तैरने लगेगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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अब समझते हैं कि यूरीन और मल कहां जाएगा? क्या इसी चैंबर में स्टोर होगा? कितने बड़े टैंक्स हैं इसमें जो यूरिन और मल को स्टोर करेंगे? गगनयान (Gaganyaan) के टॉयलेट में पेशाब के लिए 10 लीटर (फोटो में बाईं तरफ नीचे पीले बक्से की ठीक पीछे) और मल के लिए 15 लीटर की टंकी (फोटो में दाहिनी तरफ नीचे की ओर) होगी. जिसमें गगननॉट्स का मल स्टोर होगा. लेकिन मजे की बात ये है कि यूरिन से बद्बू निकाल दी जाएगी. साथ ही मल से सारा पानी निकाल कर उसे सुखाकर स्टोर किया जाएगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर (HSFC) के वैज्ञानिकों ने यह तो नहीं बताया कि इस मल का अंतरिक्ष में खत्म करेंगे या नहीं. लेकिन संभावना ये जताई है कि गगननॉट्स के यूरिन और मल को स्टोर करके धरती पर लाया जाए. ताकि भविष्य में उनपर स्टडी की जा सके. इससे उनकी सेहत के बारे में सटीक अंदाजा लगेगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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आप गगनयान (Gaganyaan) के टॉयलेट के बारे में पूरी कहानी समझिए. इसमें एक स्टेटिक सेपरेटर (Static Separator) है, जो पेशाब और मल से पानी निकाल लेगा. इसके अंदर खास तरह के पॉलीविनाइल एल्कोहल (PVA) है, जो सफाई रखने में मदद करेगा. इसके अलावा वॉटर एब्जॉर्बर (Water Absorber) हैं जो PVA फोम से ही बना है, ये पानी फीकल बैग (Faecal Bag) यानी मल स्टोरी करने वाले बैग से पानी सोखने का काम करेगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)
 

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इसके अलावा इसमें ऑडर फिल्टर (Odour Filter) है, इसके अंदर एक्टीवेटेड चारकोल होगा जो मल और यूरिन का सारा बद्बू सोख लेगा. फीकल कैनिस्टर (Faecal Canister) यानी मल की टंकी में फीकल बैग स्टोर किए जाएंगे. यानी वो बैग जिसमें गगननॉट्स पॉटी करेंगे. टॉयलेट में आइरिश मैकेनिज्म (IRIS Mechanism) लगा है, जो एक तरह का घुमावदार दरवाजा है, यह सिर्फ पेशाब और मल निकालते समय ही खुलेगा. काम खत्म होते ही बंद हो जाएगा. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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गगनयान का टॉयलेट पूरी तरह से ऑटोमैटिक है. जिसके लिए इलेक्ट्रॉनिक पैकेज भी लगाया गया है. ये इलेक्ट्रॉनिक पैकेज इस पूरे टॉयलेट के हर सिस्टम को क्रमबद्ध तरीके से चलाता है. अब देखना ये है कि हमारे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पायलट जो अब गगननॉट्स बन रहे हैं, वो इसे कैसे उपयोग करते हैं? आपको बता दें कि वायुसेना के चार ऑफिसर्स को गगननॉट्स बनने की ट्रेनिंग बेंगलुरु के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर में दी जा रही है. (फोटोः ऋचीक मिश्रा)

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