वैज्ञानिकों की स्टडी के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने घोषणा की है कि जुलाई 2023 दुनिया का सबसे गर्म महीना था. इस महीने गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) और यूरोपियन यूनियन कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज ने अपने संयुक्त बयान में यह खुलासा किया है. कोलंबिया की सोरेली रेसट्रेपो लॉस एंजिल्स में खुद को धूप से बचाते हुए. (सभी फोटोः एपी/रॉयटर्स)
इटली के रोम में यह व्यक्ति पंखे के सामने खुद को ठंडा करते हुए अपना मोबाइल चेक कर रहा है. उधर, एंतोनियो गुटेरेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भयावह रूप ले रहा है. यह डरावना है. यह सिर्फ बेहद खतरनाक शुरुआत है. हम वैश्विक उबाल की तरफ बढ़ रहे हैं.
इटली के रोम में कोलोजियम के सामने अपने साथी पर पानी डालती महिला. जुलाई में गर्मी का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. चाहे वह ग्रीक आइलैड रोड्स हो. या फिर अमेरिका दक्षिण-पश्चिम इलाका. चीन के एक कस्बे में तो तापमान 52.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया.
इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में मौजूद अल-ओजा स्प्रिंग्स में खुद को ठंडा करता एक फिलिस्तीनी नागरिक. जर्मनी की लीपजिग यूनिवर्सिटी ने बृहस्पतिवार को डेटा रिलीज किया था, जिसमें कहा था कि जुलाई महीना इस बार दुनिया का सबसे गर्म महीना होगा. यह सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाला है.
जुलाई में वैश्विक तापमान जुलाई 2019 की तुलना में 0.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म है. इससे पहले इतनी गर्मी 174 साल पहले पड़ी थी. बार्सीलोना के लास रामब्लास में एक फव्वारे के बीच गर्मी से बचने के लिए नहाता स्पेन का नागरिक. जुलाई 2023 प्री-इंडस्ट्रियल तापमान से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा चल रहा है.
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के क्लाइमेट साइंटिस्ट माइकल मान ने कहा कि जब तक जीवाश्म ईंधन यानी फॉसिल फ्यूल जलता रहेगा. धरती इसी तरह लगातार गर्म होती चली जाएगी. तुर्की के इंस्ताबुल में जंगलों में आग लगी है. गर्मी इतनी ज्यादा है कि दिन में लोग कई-कई बार समुद्र में नहा रहे हैं.
जुलाई महीने का औसत वैश्विक तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहता है. इसमें ठंडे इलाकों का तापमान भी जोड़ा गया है. लेकिन इस साल यह बढ़कर 17 डिग्री सेल्सियस हो चुका है. रोमानिया के बुकारेस्ट में फव्वारे में खुद को ठंडा करता यह इंसान यही सोच रहा होगा कि शायद अब गर्मी कम हो जाएगी. लेकिन ये होने में समय है.
पिछले 1.20 लाख साल में कभी भी धरती इतनी गर्म नहीं हुई थी, जितनी अभी हुई है. यह दावा किया है लीपजिग यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट साइंटिस्ट कार्स्टेन हॉस्टीन ने. यह प्रलय की शुरुआत है. इसी महीने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली में सबसे गर्म रात का डेटा रिकॉर्ड किया गया. लॉस एंजिल्स में अखबार से खुद को बचाती एक महिला.
कनाडा के जंगलों में आग लगी. फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और पोलैंड में हीटवेव चल रही है. इटली के सिसली में जंगल धधक रहे हैं. फ्लोरिडा से ऑस्ट्रेलिया तक समुद्री तापमान भी बढ़ा हुआ है. दुनिया के सबसे ठंडा इलाके अंटार्कटिका में भी तापमान इतना बढ़ा कि रिकॉर्डस्तर पर बर्फ पिघल रही है.