यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA), एरियन स्पेस (Ariane Space) और एयरबस (Airbus) मिलकर 13 अप्रैल 2023 को फ्रेंच गुएना से कोरोऊ स्पेसपोर्ट से एक शानदार मिशन लॉन्च करने जा रहे हैं. एरियन-5 रॉकेट के जरिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी ज्यूपिटर आइसी मून्स एक्सप्लोरर (JUpiter ICy Moons Explorer - JUICE) लॉन्च करेंगे. (सभी फोटोः AFP/NASA/ESA/Getty)
इस प्रोजेक्ट की लागत 14,270 करोड़ रुपए है. लॉन्चिंग भारतीय समयानुसार 13 अप्रैल को शाम को करीब पौने छह के आसपास होगी. JUICE स्पेसक्राफ्ट साल 2031 के जुलाई महीने में बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश कर पाएगा. यानी आठ साल तक 5963 किलोग्राम वजनी ऑर्बिटर अंतरिक्ष में यात्रा करता रहेगा.
JUICE से पहले NASA का यूरोपा क्लिपर (Europa Clipper) स्पेसक्राफ्ट पहुंच जाएगा. वह अप्रैल 2030 में बृहस्पति की कक्षा में होगा. क्योंकि नासा का यान शॉर्ट-कट से जा रहा है. यानी छोटे रास्ते से. नासा का यान पृथ्वी और मंगल ग्रह के चक्कर लगाते हुए बृहस्पति पहुंचेगा. जबकि, JUICE धरती और शुक्र ग्रह के चक्कर लगाते हुए बृहस्पति की कक्षा में पहुंचेगा.
JUICE का काम होगा बृहस्पति ग्रह के बर्फीले चंद्रमाओं यानी गैनीमेडे (Ganymede), यूरोपा (Europa) और कैलिस्टो (Callisto) की जांच करेगा. यहां पर जमा बर्फीले समंदर की जांच करेगा. उनमें जीवन खोजेगा. कैलिस्टो के चारों तरफ 21 फ्लाईबाई करेगा. गैनीमेडे के चारों तरफ 12 बार चक्कर लगाएगा. यूरोपा के चारों तरफ दो बार चक्कर लगाएगा.
जूस स्पेसक्राफ्ट जिस जगह बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश करेगा, वहां से गैनीमेडे चंद्रमा नजदीक होगा. इस स्पेसक्राफ्ट में 11 तरह के पेलोड्स हैं. जिनमें से एक एयरबस स्पेस कंपनी का प्राइड स्पेसक्राफ्ट बस भी शामिल है. ये सभी अलग-अलग कामों के लिए हैं. कोई रिमोट सेंसिंग करेगा. कोई जियोफिजिकल जांच करेगा. कोई वायुमंडल देखेगा.
अपने 35 फ्लाईबाई के दौरान जूस स्पेसक्राफ्ट कई तरह की स्टडी करेगा. वह जमे हुए बर्फीले समंदर के अंदर-बाहर हर तरफ झांकेगा. तस्वीरे लेगा. जीवन की खोज करेगा. क्या पता किसी चांद पर कोई एलियन मिल जाए. अब अगर बात करें रॉकेट की तो ये यूरोपियन स्पेस एजेंसी का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है. इसका नाम है एरियन-5 ईसीए.
एरियन-5 ईसीए (Ariane 5 ECA) रॉकेट 53 मीटर ऊंचा है. चौड़ाई 11.5 मीटर है. इस उड़ान को VA260 नाम दिया जा रहा है. जबकि रॉकेट का वजन 790 टन है. जूस मिशन प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ओलिवियर विटासी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि बृहस्पति के आसपास के चंद्रमाओं पर जीवन के सबूत मिल सकते हैं. क्योंकि इन तीन बर्फीले समंदर वाले ग्रहों पर पानी है. पानी है तो जीवन की उम्मीद बनी रहती है.
JUICE स्पेसक्राफ्ट पहला ऐसा मिशन है जो सिर्फ बृहस्पति के तीन बर्फीले चंद्रमाओं के लिए बनाया गया है. ओलिवियर ने कहा कि हम देखना चाहते हैं कि क्या बृहस्पति के चारों तरफ घूम रहे इन चंद्रमाओं पर जीवन की उत्पत्ति हो सकती है कि नहीं. इन तीनों चंद्रमाओं पर धरती की तुलना में कहीं ज्यादा पानी है. हो सकता है कि वहां पर एलियन जीवन मौजूद हो.
कुछ दशक पहले तक अंतरिक्ष में इतनी गहराई में किसी ने ऐसे चांद की उम्मीद नहीं की थी कि किसी ग्रह के चंद्रमा पर पानी होगा. पहले लोग शुक्र और मंगल ग्रह को इंसानों के रहने लायक मानते थे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. शुक्र ग्रह पर तापमान 475 डिग्री सेल्सियस है, इसलिए वहां पर रहना मुश्किल है. मंगल ग्रह से वायुमंडल और पानी करोड़ों साल पहले ही गायब हो गए थे. इसलिए दोनों ग्रहों पर सतह के नीचे पानी की खोज करनी होगी.
ठीक इसी तरह बृहस्पति के चंद्रमाओं यानी गैनीमेडे, कैलिस्टो और यूरोपा के बर्फीले समुद्र के स्रोत, पानी की स्थिति, जीवन की खोज करनी होगी. क्योंकि साल 2005 में शनि ग्रह के छोटे चांद एंसीलेडस को भी अंतरिक्ष में पानी और जैविक पदार्थों को फेंकते देखा गया था. इसलिए बृहस्पति के चंद्रमा जीवन की खोज करने लायक सबसे बेहतरीन जगह हो सकते हैं.
अमेरिका का यूरोपा क्लिपर सिर्फ यूरोपा के लिए फोकस कर रहा है. वह यूरोपा के चारों तरफ 50 चक्कर लगाएगा. जबकि JUICE स्पेसक्राफ्ट गैनीमेडे के चारों तरफ 12, कैलिस्टो के चारों तरफ 21 और यूरोपा के पास से दो बार फ्लाई बाई करेगा. यानी बगल से गुजरेगा. माना जाता है कि यूरोपा के समुद्र का संबंध उसके पथरीले समुद्री तलहटी से है. यानी वहां पर केमिकल रिएक्शन होते होंगे. हाइड्रोथर्मल वेंट्स भी होंगे. जैसे धरती के समुद्र में हैं.