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साइंस न्यूज़

Kilonova Explosion: दो सितारों की हुई जबर्दस्त टक्कर, अंतरिक्ष में बन गई 'आंख'

Kilonova explosion form eye
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अंतरिक्ष में दो उच्च-घनत्व वाले न्यूट्रॉन तारे (Hyper-Dense Neutron Star) आपस में मिल गए. मिलना तो ठीक है. कोई दिक्कत नहीं. लेकिन इनके मिलने से एक ऐसा रहस्यमयी विस्फोट हुआ, जिसकी चमक वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है. विस्फोट के केंद्र में आंख जैसी आकृति बन रही है. आप इसे दीये की लौ जैसी आकृति भी कह सकते हैं. (फोटोः NASA/CXC/M. Weiss)

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अभी तक अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इसे किलोनोवा नाम देने से गुरेज किया है. वो कह रहे हैं कि ये संभावित किलोनोवा (Kilonova) है. लेकिन यह ऐतिहासिक अंतरिक्षीय घटना है. आमतौर पर किलोनोवा विस्फोट दो हाइपर-डेंस न्यूट्रॉन स्टार्स के टकराने से होता है. न्यूट्रॉन स्टार सुपरनोवा विस्फोट के बाद बनते हैं. सुपरनोवा विस्फोट दो तारों के आपसी टक्कर से हुए विस्फोट को कहते हैं या फिर किसी तारे के खुद ही फट जाने के विस्फोट को कहते हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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वैज्ञानिकों ने इस किलोनोवा (Kilonova) विस्फोट से भारी मात्रा में एक्स-रे निकलते देखा है. इसे GW170817 नाम दिया गया है. इसे खोजने वाली टीम ने बताया कि इसके विस्फोट से निकला कचरा पूरे अंतरिक्ष में फैल रहा है. टकराव से जो सोनिक-बूम पैदा हुआ, उसकी शॉकवेव ने आसपास की चीजों को जला दिया. इसी गर्मी की वजह से एक्सरे पैदा हुआ है.  (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
 

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दूसरी थ्योरी यह कहती है कि ऐसा नजारा तब भी देखने को मिलता है, जब न्यूट्रॉन तारों के मिलने से पैदा होने वाले पदार्थ किसी ब्लैक होल (Black Hole) की तरफ खिंचते चले जाते हैं. इसलिए इसे संभावित किलोनोवा विस्फोट कह रहे हैं. नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोफिजिक्स की स्टूडेंट और लीड रिसर्चर अपराजिता हजेला ने एक बयान में कहा कि हम अंतरिक्ष की ऐसी जगह पर पहुंचे जहां के बारे में किसी को पता नहीं था. हमनें वहां पर न्यूट्रॉन स्टार के मिलन से पैदा हुए विस्फोट को देखा.  (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अपराजिता हजेला ने बताया कि हम पहली बार किसी ऐसी घटना को देख रहे हैं. हमारे पास इस प्रक्रिया को समझने के लिए काफी समय है. हम लगातार इसका अध्ययन कर रहे हैं. हर स्टडी में हमें नई बात दिखती है. इस किलोनोवा विस्फोट की हर चीज हैरान करने वाली है. इससे पहले ऐसा नजारा नहीं देखा गया था.  (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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न्यूट्रॉन स्टार (Neutron Stars) के बारे में साइंटिस्ट को बहुत पहले से पता है. 17 अगस्त 2017 में ऐसी घटना दर्ज की गई थी. तब गुरुत्वाकर्षण की तरंगों से इसके बारे में लोगों को पता चला था. पहली बार न्यूट्रॉन स्टार के मिलन की खबर मिली थी. एस्ट्रोनॉमर्स लगातार इस इलाके की तरफ नजर रख रहे थे. इसके विकसित होने की जानकारी जमा कर रहे थे.  (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अपराजिता ने बताया कि उन्होंने इस किलोनोवा (Kilonova) विस्फोट को नासा के Chandra एक्स-रे ऑब्जरवेटरी की मदद से देखा. इसकी विस्फोट की शुरुआत साल 2018 में ही हो गई थी. लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे यह धुंधला होने लगा. साल 2020 में इसकी चमक में आ रही कमी रुक गई. लेकिन इससे लगातार एक्स-रे तरंगों का निकलना जारी है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले की एस्ट्रोफिजिसिस्ट राफेला मारगुट्टी ने कहा कि एक्स-रे तरंगों को निकलना और उसकी चमक का बने रहना ही इस किलोनोवा (Kilonova) विस्फोट को अलग बनाता है. अब दुनिया भर के वैज्ञानिकों को इसकी स्टडी करनी चाहिए, क्योंकि यहां पर एक्स-रे निकलने की वजह कुछ और ही है. जिसे हम अध्ययन कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अपराजिता और राफेला ने कहा कि किलोनोवा (Kilonova) विस्फोट क्यों हुआ. इसके बाद अब क्या होगा. एक्स-रे किरणों के निकलने की वजह क्या है. शॉकवेव अंतरिक्ष में कितनी दूर तक गया. अब इन सब चीजों का अध्ययन बाकी है. हम लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं. यह स्टडी हाल ही में द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है.  (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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