उत्तर-पूर्व चीन में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के वैज्ञानिकों को सबसे बड़ा क्रेटर (Crater) मिला है. क्रेटर माने एस्टेरॉयड या उल्कापिंड की टक्कर से बना बड़ा गड्ढा. यह क्रेटर करीब 1 लाख साल के अंदर बना था. चीन में खोजा गया यह दूसरा इम्पैक्ट क्रेटर (Impact Crater) है. साल 2020 के पहले तक चीन में एक ही क्रेटर का पता था. लेकिन पिछले साल इस नए क्रेटर की खोज हुई. (फोटोः लॉरेन डॉफिन/लैंटसैट-8/नासा)
नासा की अर्थ ऑब्जरवेटरी की तरफ से बयान आया कि उन्होंने जुलाई 2021 में इस क्रेटर की खोज की. यह चीन के तटीय प्रांत लियाओनिंग (Liaoning) के शिउयान (Xiuyan) काउंटी में है. यह क्रेटर जिंगआन (Xing'an) पहाड़ के निचले हिस्से में बना है. क्रिसेंट चांद की तरह दिखने वाले इस क्रेटर का निर्माण किसी एस्टेरॉयड या उल्कापिंड के टकराने से बना है. (फोटोः लॉरेन डॉफिन/लैंटसैट-8/नासा)
इस गड्ढे का नाम यिलान क्रेटर (Yilan Crater) है. यह करीब 1.85 किलोमीटर व्यास का है. इसका निर्माण करीब 46 हजार से 53 हजार साल के बीच हुई है. इसकी यह उम्र रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चली है. यहां मौजूद चारकोल और अन्य जैविक पदार्थों की जांच से यह पता चला है. इस क्रेटर को लेकर की गई स्टडी मेटियोरिटिक्स एंड प्लेनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)
Scientists uncover the largest crater on Earth under 100,000 years old https://t.co/tiND1ySQ6A
— Live Science (@LiveScience) February 28, 2022
नासा के वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे के बीच में ड्रिल करके सैंपल जमा किए थे. करीब 328 पीट गहराई में गड्ढा करने के बाद पता चला कि अंदर एक 1000 फीट मोटा ब्रेसिएटेड ग्रेनाइट की परत है. उसके ऊपर कीचड़ भरा पड़ा है. यह ग्रेनाइट कई पत्थरों के मिश्रण से बना है. जो टुकड़े में है और ये एकसाथ जुड़कर ग्रेनाइट का निर्माण कर रहे हैं. यह एक तरह का मैट्रिक्स है. इस पत्थर पर उल्कापिंड के टकराने के निशान भी हैं. (फोटोः गेटी)
इसे ऐसे समझिए... उल्कापिंड धरती के वायुमंडल में आते ही गर्म होकर जलने लगता है. यह जलता हुआ उल्कापिंड जब धरती से टकराता है, तो गड्ढा बनता है. गड्ढे वाली जमीन पर पहले से मौजूद पत्थर और उल्कापिंड के पत्थर या खनिज गर्मी से पिघलकर टूट जाते हैं. जैसे-जैसे यह गर्मी खत्म होती है, ये आपस में जुड़ने लगते हैं. सारे पत्थर जब एकसाथ जुड़ते हैं तब वो ग्रेनाइट स्लैब का निर्माण करते हैं. (फोटोः गेटी)
इस तरह के ग्रेनाइट पत्थरों में शॉक्ड क्वार्ट्ज भी मिलते हैं. जो पत्थरों के पिघलने से बनते हैं. ये कांच की तरफ चमकदार और चिकने होते हैं. नासा के वैज्ञानिकों के एक आंसू के बूंद की जैसा कांच का टुकड़ा मिला है. जिसके अंदर गैस के बुलबुले भरे हुए हैं. जिससे लगता है कि यहां पर टक्कर के समय भयानक तीव्रता की गर्मी थी. (फोटोः गेटी)
यिलान क्रेटर (Yilan Crater) का दक्षिणी हिस्सा गायब है. ऐसे लगता है कि यहां पर कुछ ऐसा हुआ जिसने गड्ढे की दीवार को तोड़ दिया. जिसकी वजह से यह क्रिसेंट चांद के आकार का बन गया. इस स्टडी में शामिल गुआंगझोउ इंस्टीट्यूट ऑफ जियोकेमिस्ट्री के साइंटिस्ट चेन मिंग ने कहा कि अक्टूबर 2021 में लैंडसैट-8 (Landsat-8) सैटेलाइट ने इस क्रेटर के रिम के उत्तरी हिस्से की तस्वीर ली थी. अब वैज्ञानिक दक्षिणी रिम की स्टडी कर रहे हैं कि वह गायब कैसे हो गया. (फोटोः गेटी)
अभी तक एक लाख साल के अंदर बने सबसे बड़े क्रेटर का रिकॉर्ड अमेरिका के एरिजोना स्थित मिटियोर क्रेटर (Meteor Crater) के नाम था. यह 49 से 50 हजार साल के बीच बना था. इसका व्यास 1.2 किलोमीटर था. इसके अलावा चीन में जियुयान क्रेटर है जो 1.8 किलोमीटर व्यास का है, लेकिन अभी उसकी उम्र नहीं पता की जा सकी है. (फोटोः गेटी)