इस तस्वीर में आपको जो शहर दिख रहा है, उसका नाम है डर्ना. लीबिया का शहर है. पीछे पहाड़ियां हैं, जहां बांध टूटे. फ्लैश फ्लड आई. घर, गाड़ी, इंसान, जानवर रास्ते में जो कुछ आया... सब बहकर सीधे भूमध्यसागर में जा गिरा. हरे रंग का समंदर कई किलोमीटर तक इस समय भूरे रंग के दिख रहा है. (फोटोः एपी)
बांध टूटने से आई पानी की लहर इतनी तेज थी कि कारों को उठाकर उसने घरों की छतों पर पहुंचा दिया. इस तस्वीर में तो यही दिख रहा है. डर्ना शहर के घरों में इस समय पानी और कीचड़ भरा पड़ा है. लोग डरे हुए हैं कि कहीं कीचड़ से उनके किसी पड़ोसी या जान-पहचान वाले का शव न निकले. जो लगातार निकल ही रहे हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
यहां पर इस तस्वीर में आपको डर्ना शहर के तट पर जेसीबी मशीन से सफाई करते हुए दिखाई दे रहे होंगे. लेकिन लाल घेरों में आपको वो कारें दिखेंगी, जो शहर से बहकर समंदर में आ गई हैं. ये तो कुछ ही हैं. सैकड़ों गाड़ियों का अता-पता ही नहीं है. ठीक है ऐसे ही कई लोगों के शवों का पता नहीं चल रहा है. वो भी समंदर में समा गए. (फोटोः रॉयटर्स)
इस औरत का नाम है सबरीन फरहत बेलील. यहां पर उसके भाई का घर था. अब सिर्फ मलबा बचा है. घर देखकर रो रही है. अपनो को खोज रही है. उसने अपना भाई, भाभी और पांच बच्चों को खो दिया. लेकिन उसे इनमें से किसी का शव अब तक नहीं मिला है. डर्ना शहर की आबादी सवा लाख है. जिनमें से आधे तो लगभग खत्म हो चुके हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
इस समय सबसे बड़ा खतरा बीमारियों के फैलने का है. हर जगह दवाएं छिड़की जा रही है. अब लोगों को डर यह है कि वो इस शहर में रहें, या छोड़कर कहीं और चले जाएं. क्योंकि और कहीं जाने में भी खतरा है. युद्ध के समय लीबिया में चारों तरफ बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं. जो इस प्रचंड प्रलयंकारी बाढ़ में बहकर इधर-उधर फैल गए हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस फॉर द कॉर्डिनेशन ऑफ ह्यूमेनिटेरियन अफेयर्स (OCHA) के मुताबिक डर्ना में अब तक 11,300 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. हालांकि लगातार आकंड़ों में बदलाव आ रहा है. इसलिए अंतिम गणना तक कुछ सही डेटा नहीं दिया जा सकता. क्योंकि लगातार लोगों के शव मिल रहे हैं. खोजबीन जारी है. (फोटोः एपी)
1000 से ज्यादा लोगों को दफनाया जा चुका है. 150 से ज्यादा लोग तो पानी के साथ आए जहरीले तत्वों की वजह से मर गए. लीबिया के स्वास्थ मंत्री का कहना है कि 3283 लोग मारे गए हैं. WHO मौतों की संख्या 3922 बता रही है. यानी अभी तक सही आकंड़े नहीं आए हैं. लेकिन जिस तरह की आपदा आई है, उसमें हजारों लोग मारे गए होंगे. (फोटोः एपी)
बेनगाजी से आए हुए मेडिकल के छात्र पूरे डर्ना शहर में बीमारियों से बचने के लिए दवाइंयां छिड़क रहे हैं. वो सब इतनी तबाही देखकर खुद घबरा गए हैं. काम करते-करते थक जाने के बाद थोड़ी देर आराम करते हैं. फिर दवाएं छिड़कने निकल जाते हैं. सड़कों के किनारों को साफ कर दिया गया है. (फोटोः रॉयटर्स)
कम से कम 891 इमारतें इस फ्लैश फ्लड में खत्म हो चुकी हैं. डर्ना शहर के मेयर का कहना है कि कम से कम 20 हजार लोग तो मारे गए होंगे. सरकारी कर्मचारी मोहम्मद अलनाजी बुशहरटिला ने कहा कि उसके परिवार में 48 लोग थे. लेकिन आज कोई नहीं मिल रहा है. समझ में ये नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं. कहां जाऊं. किसे खोजूं. (फोटोः एपी)
माल्टा से गई रेस्क्यू टीम को डर्ना शहर के तट के किनारे सैकड़ों लोगों के शव मिले हैं. इस टीम के प्रमुख नटालियो बेजिना ने कहा कि कम से कम 400 लोगों के शव हमने एक किनारे पड़े देखे. हमने 72 लोगों की टीम लगाई है. इनमें बच्चे और महिलाएं भी हैं. ये तट के किनारे बने समुद्री गुफा में मिले. (फोटोः रॉयटर्स)
सवा लाख की आबादी वाला डर्ना शहर अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. चारों तरफ टूटी इमारतें, कीचड़, कारों के ऊपर लदी कारें दिख रही हैं. किसी को नहीं पता कि कीचड़ में पैर रखेंगे तो नीचे किसी का शव मिलेगा. 40 हजार से ज्यादा लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है. (फोटोः रॉयटर्स)
डर्ना में यूगोस्लाविया की कंपनी ने 1970 में दो बांध बनवाए थे. पहला बांध 75 मीटर ऊंचा था. उसमें 1.80 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी आता था. दूसरा बांध 45 मीटर ऊंचा था. वहां 15 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा था. हर क्यूबिक मीटर पानी में एक टन वजन होता है. दोनों डैम में करीब 2 करोड़ टन पानी था. जिसके नीचे डर्ना शहर बसा था. (फोटोः रॉयटर्स)
सैटेलाइट तस्वीरें ये बताती हैं कि ये डैम खाली थे. पिछले 20 सालों से इनकी देखभाल नहीं हो रही थी. दिक्कत खाली बांध से नहीं थी. लेकिन उसकी मरम्मत से थी. डैनियल तूफान ने इतना पानी भर दिया कि पुराने और कमजोर होता बांध उसे संभाल नहीं पाया. बांध टूटा और उसके नीचे बसे डर्ना शहर को बर्बाद कर डाला. (फोटोः रॉयटर्स)
दोनों बांधों को कॉन्क्रीट से बनाया गया था. उन्हें ग्लोरी होल भी था. ताकि पानी ओवरफ्लो न हो. लेकिन इसमें लकड़ियां फंस गईं थीं. ये बंद हो चुका था. मेंटेनेंस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. कचरा जमा होता चला गया. इस वजह से तूफान के बाद हुई बारिश से बांध में तेजी से पानी भरता चला गया. डैनियल तूफान लगातार एक हफ्ते तक बरसता रहा. (फोटोः रॉयटर्स)
डर्ना का स्थानीय प्रशासन इस चीज को लेकर तैयार नहीं था. तूफान आया तो पहले बड़ा डैम भरा. जब यह पानी की मात्रा संभाल नहीं पाया तो पानी ऊपर से बहने लगा. थोड़ी देर में वह टूट गया. एक साथ 1.80 करोड़ टन पानी नीचे की ओर बढ़ा. इतने पानी को निचले इलाके वाले डैम में रोकने की ताकत नहीं थी. (फोटोः एपी)
छोटा डैम भी टूट गया. फिर क्या था पूरे शहर में जलजला. हर घर के निचले हिस्से में पानी भर गया. बांधों को मजबूत बनाना ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उसका मेंटेनेंस भी जरूरी है. जिस काम में लीबिया की सरकार और स्थानीय प्रशासन फेल हो गई. पिछले साल इसे लेकर एक रिपोर्ट भी छपी थी. (फोटोः रॉयटर्स)
उस रिपोर्ट में कहा गया था कि डर्ना वैली बेसिन को तुरंत संभालने की जरुरत है. नहीं तो यहां किसी भी दिन बड़ी आपदा आएगी. दोनों बांधों को मेंटेनेंस की जरुरत थी. ये टूटे तो घाटी में मौजूद शहर खत्म हो जाएगा. सबको पता था कि बड़े बांध खतरनाक साबित हो सकते हैं. यहां तो हो ही गया. (फोटोः एपी)
बांध तो हजारों सालों तक चलते रहते हैं. रोम साम्राज्य के बनाए बांध आज भी काम कर रहे हैं. जरुरत है उनकी डिजाइन और मजबूती पर ध्यान देने की. साथ ही उनके मेंटेनेंस की. बांधों में जमा कचरा साफ करने की. ताकि वो सही तरीके से काम कर सकें. क्योंकि उनकी सफाई नहीं हुई तो वो किसी परमाणु बम से कम नहीं हैं. (फोटोः रॉयटर्स)
लीबिया के हाइड्रोलॉजिस्ट अब्दुल वानिस अशूर ने बताया कि सबको इन बांधों की हालत का पता था. लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था. न प्रशासन न सरकार. लोगों को भी पता था कि उनके ऊपर मौत मंडरा रही है. अगर पब्लिक वाटर कमीशन पिछले साल छपी रिपोर्ट पर ध्यान देकर बांध की सफाई करवा देता, तो ये नजारा देखने को न मिलता. (फोटोः रॉयटर्स)
लीबिया की सरकार को पता था कि डर्ना नदी घाटी में क्या हो रहा है. किस तरह की दिक्कत होने वाली है. लेकिन किसी फर्क ही नहीं पड़ रहा था. अब इस शहर की लगभग आधी आबादी खत्म हो चुकी है. 22 साल के अब्दुलकादेर मोहम्मद अलफकरी ने कहा कि जब जलजला आया तो मैं भाग कर चौथी मंजिल की छत पर चला गया. बच गया. (फोटोः एपी)
अब्दुलकादेर ने अपने पड़ोस के लोगों और इमारतों को समुद्र में बहते देखा. लोग मोबाइल का टॉर्ज जलाकर मदद मांग रहे थे. किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था. सड़कों पर खड़ी गाड़ियां घरों में घुस गई थीं. शव ही शव बह रहे थे. लोगों के शरीर पानी और कीचड़ के साथ बहकर अलग-अलग घरों में जा रहे थे. भयानक नजारा था. (फोटोः रॉयटर्स)