शुक्र ग्रह (Venus) पर जीवन न कभी था, न ही भविष्य में संभव होगा. एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया है. अब अगर कोई एलियन की खोज करना चाहता है तो उसे शुक्र ग्रह से अपना ध्यान हटाना होगा, क्योंकि वहां कि गर्मी में किसी भी प्रकार का जीवन संभव नहीं है. पिछले कुछ सालों में अंतरिक्ष विज्ञानियों का ध्यान शुक्र ग्रह की ओर ज्यादा गया है. हमारे सौर मंडल में सूर्य के बाद यह दूसरा ग्रह है. शुक्र पर जीवन की संभावना की तलाश कई दशकों से की जा रही थी, लेकिन यह संभव नहीं है. (फोटोः गेटी)
शुक्र ग्रह पर सूर्य की गर्मी सबसे ज्यादा पड़ती है. इसलिए यहां पर जीवन संभव नहीं है. लेकिन कुछ पुरानी स्टडीज में यह अंदाजा लगाया गया था कि प्राचीन समय में जब यह ग्रह बना तब यहां पर बड़े महासागर रहे होंगे. जीवन के लिए उपयुक्त जलवायु भी रहा होगा. लेकिन ऐसा सैकड़ों अरबों साल पहले रहा होगा. हालांकि, अब की स्टडी में यह बात स्पष्ट तौर पर कह दी गई है कि शुक्र ग्रह पर जीवन न संभव था, न ही कभी होगा. (फोटोः गेटी)
शुक्र ग्रह (Venus) इस समय नर्क है. यहां की सतह हड्डी की तरह सूखी और जलवायु सूरज की तरह गर्म है. इतनी गर्म है कि यह लीड (Lead) को भी पिघला दे. लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का मानना था कि शुक्र पर जीवन था, जो आज भी वहां कहीं न कहीं होगा जरूर. हो सकता है कि यह जीवन शुक्र ग्रह की सतह से 50 किलोमीटर ऊपर उड़ते बादलों में हो. जहां पर तापमान और दबाव एक समान हो, जैसा कि धरती पर है. लेकिन नई स्टडी इन सभी अंदाजों पर पानी फेर दिया.
(फोटोः गेटी)
नए पैदा होने वाले ग्रहों की तरह ही शुक्र ग्रह (Venus) भी शुरुआत में अद्भुत स्तर पर गर्म था. इतना गर्म की पानी से भरे महासागर यहां बन ही नहीं सकते थे. अगर इस ग्रह पर कुछ पानी रहा भी होगा तो वह भाप बन गया होगा. जिसकी वजह से शुक्र ग्रह के चारों तरफ भाप का गोला बन गया होगा. पहले यह माना जा रहा था कि कुछ करोड़ साल में शुक्र ग्रह ठंडा हुआ होगा तो वहां पर पानी जमा होगा. लेकिन ज्यादातर पानी उसके ऊपर उड़ रहे बादलों में था. जिसकी वजह से ढेर सारा सौर रेडिएशन वापस अंतरिक्ष में चला गया. (फोटोः गेटी)
उस समय सूरज भी नया था. वह कमजोर था. उस समय सूरज अपनी क्षमता का सिर्फ 70 फीसदी ही रोशन था. लेकिन नेचर जर्नल में 13 अक्टूबर को प्रकाशित स्टडी के मुताबिक यह सब गलत साबित हुआ. शुक्र ग्रह (Venus) पर कभी मौसम इतना ठंडा नहीं रहा कि वहां जीवन संभव हो सके. क्योंकि जो ग्रह सूरज के इतने नजदीक है, वह सूरज की 70 फीसदी गर्मी में भी उतना ही गर्म रहा होगा, जितना कि आज है. (फोटोः गेटी)
स्विट्जरलैंड स्थित जेनेवा एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जरवेटरी के पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर मार्टिन टरेट कहते हैं कि हमारी नई स्टडी में यह बात स्पष्ट हो गई है कि युवा शुक्र ग्रह (Venus) पर बेहद कम बादल थे. इसके अंधेरे वाले इलाके में भी मौसम ठंडा नहीं था. स्थितियां इतनी खराब थी कि पूरे ग्रह पर, चाहे रोशनी वाले इलाका हो या फिर अंधेरा वाला इलाका हो...जीवन कहीं भी, कभी भी संभव नहीं था. सूर्य की गर्मी शुक्र ग्रह की सतह में बैठ गई थी. वह आज भी है. (फोटोः गेटी)
मार्टिन टरेट ने बताया कि जब किसी ग्रह के अंदर तक गर्मी बैठ जाती है, तब वहां पर जीवन का पनपना संभव नहीं होता. शुक्र ग्रह (Venus) कभी भी ठंडा नहीं रहा. न ही कभी होगा. इसलिए वहां पर बारिश, नदी, समुद्र, झीलें और महासागर की बात करना बकवास है. नासा एम्स रिसर्च सेंटर और पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष विज्ञानी जेम्स कास्टिंग और चेस्टर हर्मन कहते हैं कि अगर यह स्टडी सही है, तो शुक्र ग्रह शुरु से लेकर आजतक नर्क ही रहा है. (फोटोः गेटी)
नासा ने हाल ही में वेरिटास मिशन (VERITAS Mission) की शुरुआत की है. वेरिटास का पूरा नाम है Venus Emissivity, Radio Science, InSAR, Topography and Spectroscopy. यह मिशन साल 2028 में लॉन्च किया जाएगा. शुरुआत में यह शुक्र ग्रह की कक्षा से प्लैनेट की स्टडी करेगा. अगर सबकुछ सही रहा तो शुक्र ग्रह पर एक मजबूत लैंडर उतारा जाएगा. जो कि जल्दी पिघले न. क्योंकि वहां के तापमान को सहने वाले यंत्र उस लैंडर पर लगाने होंगे. (फोटोः गेटी)
इस स्टडी में यह खुलासा भी किया गया है कि अगर सूरज प्राचीन समय में 70 फीसदी के बजाय 92 फीसदी गर्म होता तो धरती भी शुक्र ग्रह (Venus) की तरह गर्म होती. धरती भी किसी हॉटकेस की तरह उबल रही होती. यहां पर भी जीवन कभी संभव नहीं हो पाता. शायद ऐसी ही हालत उन ग्रहों की भी होती जो इस समय सूरज का चक्कर लगा रहे हैं. या फिर ऐसा होता कि धरती के बजाय बृहस्पति या किसी अन्य ग्रह पर जीवन होता. (फोटोः गेटी)