इटली का माउंट एटना (Mount Etna) ज्वालामुखी फट पड़ा है. इसकी वजह से सिसली द्वीप के पास मौजूद कटानिया का एयरपोर्ट बंद हो गया है. क्योंकि ज्वालामुखी से निकलने वाली राख सीधे एयरपोर्ट की दिशा में पहुंची और उससे कटानिया एयरपोर्ट का रनवे बाधित हो गया. (सभी फोटोः एपी/रॉयटर्स)
ज्वालामुखी से भयानक आग निकल रही थी. ऐसे लग रहा है कि जैसे उसकी नाक से आग का फव्वारा आज आसमान को जलाकर खाक कर देगा. 10,925 फीट ऊंचे ज्वालामुखी का विस्फोट दूर से देखने लायक रहता है. क्योंकि ये काफी दिनों तक आग उगलता रहता है. इससे पहले इसका बड़ा विस्फोट 1992 में हुआ था.
माउंट एटना यूरोप का सबसे ऊंचा और सक्रिय ज्वालामुखी है. दो साल पहले 9 अगस्त को भी यह फटा था. ज्वालामुखी के ऊपरी हिस्से से लावे का झरना फूट रहा था. विस्फोट से छह महीने पहले ही दक्षिण-पूर्वी क्रेटर लगातार ऊंचा हो गया है. उस समय इसकी ऊंचाई बढ़कर 11,041 फीट हो गई थी.
वैज्ञानिकों ने जब सैटेलाइट और एरियल तस्वीरों से इस बात की पुष्टि की तब पता चला कि ऊंचाई बढ़ गई है. माउंट एटना का उत्तर-पूर्वी क्रेटर पिछले 40 सालों से सबसे ऊंचा था. लेकिन दो साल पहले दक्षिण-पूर्वी क्रेटर उससे ऊपर उठ गया था. उस साल ज्वालामुखी कम से कम 50 बार फटा था.
माउंट एटना के उत्तर-पूर्वी क्रेटर की ऊंचाई 1981 में सबसे अधिक 10,990 फीट थी. जो 2018 तक कम होकर 10,912 फीट हो गई थी. लेकिन अब फिर उसकी ऊंचाई 10,925 फीट है. यह ज्वालामुखी आसपास के गांवों और कस्बों के लिए हमेशा से खतरा बना रहा है. हर विस्फोट के बाद वहां का प्रशासन कई लाख मीट्रिक टन राख साफ करता है.
विस्फोट से पहले और बाद में यह ज्वालामुखी किसी शेर की तरह दहाड़ता है. कई बार ऐसे झटके आते हैं, जैसे भूकंप आ रहा हो. खिड़कियां तक हिल जाती हैं. राख इतनी उगलता है कि सड़कें, पानी के स्रोत, खेती-बाड़ी, सबकुछ काला हो जाता है.
यह ज्वालामुखी अफ्रीकन प्लेट और यूरेशियन प्लेट की सीमा पर है. इन प्लेट्स में होने वाली जरा सी हलचल इसे सक्रिय कर देती है. माउंट एटना 1190 वर्ग किलोमीटर का इलाका घेरता है. इसके बेस का व्यास करीब 140 किलोमीटर का है. यानी इस पहाड़ के नीचे आपको एक चक्कर लगाने के लिए आपको 140 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ेगी.
माउंट एटना का ग्रीक भाषा में मतलब होता है फरनेस या चिमनी. यह ज्वालामुखी AD 1600 से लगातार सक्रिय है. अगर इस ज्वालामुखी के भूर्गभीय इतिहास को देखते हैं तो इस ज्वालामुखी में पहली बार विस्फोट करीब 5 लाख साल पहले हुआ था. तब यह सिसली के समुद्र तट के नीचे की तरफ था. लेकिन 3 लाख साल पहले इस पहाड़ के ऊपरी हिस्सों से लावा फटना शुरु हुआ. धीरे-धीरे यह विस्फोट पहाड़ के ठीक ऊपर केंद्र में पहुंच गया. ये गतिविधि 1.70 लाख साल पहले हुई थी.
माउंट एटना हर साल 14 मिलीमीटर की गति से भूमध्यसागर की तरफ बढ़ रहा है. यानी इस पहाड़ का एक हिस्सा लगातार टूटकर भूमध्यसागर में मिल रहा है. ऊपर से जमा राख और पत्थर कई बार भूस्खलन का रूप लेकर भूमध्यसागर में गिर जाते हैं. आधुनिक युग की बात करें तो माउंट एटना 1928 में काफी भयावह स्थिति के साथ फटा था. इसके बाद 1949, 1971, 1979, 1981, 1983, और 1991 से 93 तक यह बड़े विस्फोट करता रहा है.