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साइंस न्यूज़

50 साल बाद अमेरिका पहली बार चांद पर उतारने जा रहा निजी कंपनी का लैंडर

Moon Lander Peregrine
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1972 में अपोलो-17 मिशन (Apollo-17) चांद पर अमेरिका का आखिरी मिशन था. इसके बाद उसने चांद की सतह पर न तो यंत्र भेजे. न ही इंसान. लेकिन अगले महीने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA चांद की सतह पर एक लैंडर उतारने जा रही है. इस लैंडर को 25 जनवरी को चांद की सतह पर उतारा जाएगा. (सभी फोटोः एस्ट्रोबोटिक)

Moon Lander Peregrine
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मजेदार बात ये है कि इस बार लैंडर नासा का नहीं होगा. बल्कि यह एक निजी कंपनी का लैंडर है. लैंडर का नाम पेरेग्रिन (Peregrine) है. अमेरिकी कंपनी एस्ट्रोबोटिक (Astrobotic) ने इस लैंडर को बनाया है. कंपनी के सीईओ जॉन थ्रॉन्टन कहते हैं कि पेरेग्रिन में नासा का यंत्र लगा है, जो चांद के पर्यावरण की स्टडी करेगा. ताकि अर्टेमिस मिशन में मदद हो. 

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कुछ साल पहले नासा ने अमेरिकी कंपनियों को कमीशन किया था. ताकि चांद पर साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट और तकनीकों को पहुंचाया जा सके. इस प्रोग्राम का नाम था CLPS. इस प्रोग्राम के तहत निजी कंपनियों को फिक्स प्राइस पर कॉन्ट्रैक्ट्स दिए गए थे. ताकि चंद्रमा की अर्थव्यवस्था बन सके. सस्ते में मिशन लॉन्च हो सके. 

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जॉन थ्रॉन्टन ने बताया कि हम धरती से लॉन्चिंग कर रहे हैं. हमें चांद पर अपना लैंडर उतारना है. यह मिशन आसान नहीं होगा. हमने अभी भारत की सफलता और रूस का मिशन खराब होते देखा है. हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते. चांद की सतह पर उतरने के मकसद से किए गए मिशन में सिर्फ आधे ही सफल हो पाए हैं. 

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इसके लिए वल्कन सेन्टॉर (Vulcan Centaur) रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. जिसे ULA इंडस्ट्रियल ग्रुप ने बनाया है. इसकी पहली लॉन्चिंग 24 दिसंबर को फ्लोरिडा से होगी. कुछ दिन बाद ही लैंडर चांद के ऑर्बिट में पहुंच जाएगा. इसके बाद 25 जनवरी को चांद की सतह पर लैंडर को उतारने का प्रयास किया जाएगा. 

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चांद पर उतरने का पूरा काम लैंडर खुद ऑटोमैटिकली करेगा. उसमें इंसानों की तरफ से कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. बस एस्ट्रोबोटिक के कंट्रोल सेंटर से निगरानी की जाएगी. इससे पहले इस साल जापान की निजी कंपनी ने चांद पर अपना लैंडर उतारने का प्रयास किया था. लेकिन फेल हो गया था. 

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2019 में इजरायल भी ऐसे मिशन में फेल हो गया था. चांद की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग सिर्फ भारत, अमेरिका, रूस और चीन ही कर पाए हैं. एस्ट्रोबोटिक के अलावा नासा ने तीन और कंपनियों से समझौते किए हैं. ये हैं- फायरफ्लाई एयरोस्पेस, ड्रेपर एंड इंश्यूटिव मशीन्स. इनके यंत्र जनवरी में SpaceX के रॉकेट से लॉन्च होंगे. 

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