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साइंस न्यूज़

क्या है Naval Fleet Review... जिसमें 60 जंगी जहाज, सबमरीन और 55 एयरक्राफ्ट दिखा रहे दम

President’s Fleet Review
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विशाखापट्टनम स्थित भारतीय नौसेना बेस (Indian Naval Base) में सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review) कर रहे हैं. इसे नेवल फ्लीट रिव्यू (Naval Fleet Review) भी कहते हैं. इस बार के फ्लीट रिव्यू में देश का पहले स्वदेशी विध्वंसक INS विशाखापट्टनम और पनडुब्बी INS वेला भी शामिल हैं. इस फ्लीट रिव्यू में 60 युद्धपोत, पनडुब्बी और 50 से ज्यादा एयरक्राफ्ट भाग ले रहे हैं. भारत इस समय नेवल फ्लीट रिव्यू (Naval Fleet Review) के जरिए दुश्मन देशों को अपनी ताकत भी दिखा रहा है. (फोटोः इंडियन नेवी)

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नेवल फ्लीट रिव्यू (Naval Fleet Review) के दौरान 60 युद्धपोतों में 47 पूरी तरह से स्वदेशी हैं. ये भारतीय शिपयार्ड में बनाए गए हैं. राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल आर. हरि कुमार ने 19 फरवरी 2022 को विशाखापट्टनम जाकर फ्लीट रिव्यू की तैयारियों का जायजा लिया था. यह 12वां प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू है. जो भारत की आजादी के 75वें वर्ष के मौके पर किया जा रहा है. (फोटोः इंडियन नेवी)

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद INS Sumitra में बैठकर इस नेवल फ्लीट रिव्यू (Naval Fleet Review) का जायजा लेंगे. रिव्यू में सभी नेवल कमांड्स और अंडमान-निकोबार कमांड के युद्धपोत चार कॉलम में शामिल होंगे. ये सभी राष्ट्रपति को सैल्यूट देंगे. इन युद्धपोतों में INS विशाखापट्टनम, INA वेला सबमरीन, नौसैनिक जंगी जहाज INS चेन्नई, INS दिल्ली, INS तेग, शिवालिक क्लास के तीन फ्रिगेट, तीन कमोर्ता क्लास के एंटी-सबमरीन कॉर्वेट भी शामिल हैं. (फोटोः इंडियन नेवी)

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इसके अलावा कोस्टगार्ड, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेस के जहाज भी इस रिव्यू में शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा, चेतक, ALH, Sea Kings, KAMOV's , डॉर्नियर, IL-38SD, P8I, हॉक्स, मिग-29के भी इस रिव्यू में प्रदर्शन कर रहे हैं. इतना सबकुछ बताने के बाद अब आपको यह बताते हैं कि नेवल फ्लीट रिव्यू (Naval Fleet Review) या प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review) होता क्या है? (फोटोः इंडियन नेवी)

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क्या है प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू? (What is Presidential Fleet Review?)

साधारण भाषा में जब किसी देश का राष्ट्रपति अपनी नौसेना की ताकत और क्षमता की जानकारी ग्राउंड यानी समुद्र में जाकर लेता है, तब उसे प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review -PFR) कहते हैं. इसमें नौसेना राष्ट्रपति के सामने अपने सारे युद्धपोत, कॉर्वेट, सबमरीन, जंगी जहाज, हथियारों, निगरानी और रिकॉन्सेंस से संबंधित क्षमता का प्रदर्शन करती है. राष्ट्रपति नौसेना के एक जहाज पर बैठते हैं. जिसे प्रेसिडेंट याट (President's Yacht) कहते हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस बार प्रेसिडेंट याट यानी INS सुमित्रा में बैठेंगे. यह एक स्वदेशी ऑफशोर पेट्रोल वेसल है. यह राष्ट्रपति के कॉलम का नेतृत्व करेगा. इसकी पहचान होती है अशोक चिन्ह और मास्ट पर प्रेसिडेंट्स स्टैंडर्ड लहराता है. (फोटोः इंडियन नेवी)

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प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू का महत्व (Importance of PFR)

PFR किसी भी राष्ट्रपति के कार्यकाल में एक बार ही किया जा सकता है. आजादी के बाद से अब तक देश में 11 PFR हो चुके हैं. साल 2001 और 2016 में हुए PFR खास थे. क्योंकि ये उस समय इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (International Fleet Reviews) हो गए थे. इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, मलेशिया, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और यूके की नौसेना भी शामिल थी. अगर महत्व की बात की जाए तो गणतंत्र दिवस के बाद सबसे महत्वपूर्ण इवेंट कोई माना जाता है तो वह प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू ही है. (फोटोः इंडियन नेवी)

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क्या देश के सारे जंगी पोत इसमें भाग लेते हैं? (Do all naval ships participate)

प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review) में नौसेना के सारे जंगी पोत शामिल नहीं होते. बस हर प्रकार के युद्धपोत, सबमरीन, आदि के एक-एक पोत शामिल होते हैं. इस बार के प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंड 60 जंगी जहाज, पनडुब्बी, 55 एयरक्राफ्ट का प्रदर्शन देखेंगे. इसमें नौसेना के अलावा कोस्टगार्ड के जहाज भी शामिल हो रहे हैं. (फोटोः इंडियन नेवी)

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कितने PFR हुए हैं अबतक? (How many reviews have been held)

आजादी के बाद से अब तक 11 प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review) हो चुके हैं. पहला साल 1953 में हुआ था. तब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नेवल फ्लीट रिव्यू किया था. इसके बाद अगला नेवल फ्लीट रिव्यू किसी राष्ट्रपति ने नहीं बल्कि देश के रक्षामंत्री वाईबी चव्हाण ने साल 1964 में किया था. प्रेसिडेंशियल फ्लीट रिव्यू (Presidential Fleet Review) में सबसे बड़ा गैप साल 1989 से लेकर 2001 के बीच था. इस बार हो रहे रिव्यू से पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने साल 2016 में नेवल फ्लीट रिव्यू किया था. (फोटोः इंडियन नेवी)
 

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