संकट की इस घड़ी में एक राहत की खबर आई है. फाइजर और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन ने न्यूयॉर्क के कोरोना वायरस वैरिएंट को निष्क्रिय कर दिया है. इस वैरिएंट का नाम है B.1.526. इस वायरस की खोज पिछले साल नवंबर में हुई थी. इसके बाद इसने इस साल अप्रैल मध्य तक अमेरिका में काफी तबाही मचाई. न्यूयॉर्क में इस समय कोरोना वायरस के इस वैरिएंट से लगभग आधे लोग संक्रमित हैं. (फोटोःगेटी)
न्यूयॉर्क कोरोना वैरिएंट B.1.526 दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वायरस से म्यूटेट होकर बना है. यह माना जा रहा था कि यह किसी भी कोरोना वैक्सीन के खिलाफ ज्यादा मजबूत है. इसपर वैक्सीन का असर नहीं होगा. यह वैरिएंट पिछले स्ट्रेन्स के मुकाबले ज्यादा संक्रामक और खतरनाक है. इसकी जांच करने के लिए दो अलग-अलग रिसर्च समूहों ने प्रयोग किया. जिन लोगों को कोरोना हो चुका था और उन्हें वैक्सीन लग चुकी थी. उनके खून का सैंपल लिया. (फोटोःगेटी)
दोनों शोध समूहों ने इस बात कर जोर दिया कि ब्लड सैंपल्स में न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबॉडीज कितने हैं. यानी वह एंटीबॉडी जो कोरोना वायरस के साथ चिपक कर उसे शरीर में संक्रमण फैलाने से रोकते हैं. न्यूयॉर्क के B.1.526 वैरिएंट की बाहरी कंटीली परत म्यूटेंट हैं. यानी उसने अपना रूप बदल लिया है. वैज्ञानिकों ने इस म्यूटेंट पर तो स्यूडोवायरस से जोड़ दिया. उसके बाद इसे एंटीबॉडी से मिलाया. इस प्रयोग के परिणाम हैरान कर देने वाले थे. (फोटोःगेटी)
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— Live Science (@LiveScience) April 23, 2021
ब्लड सैंपल से लिए गए एंटीबॉडीज ने स्यूडोवायरस को तेजी से जकड़ लिया ताकि वो किसी भी कोशिका को संक्रमित न कर सकें. अगर कंटीली परत का म्यूटेशन ज्यादा ताकतवर होता है तो कुछ एंटीबॉडीज उसे रोक नहीं पाती. जिन लोगों को वैक्सीन दी गई थी, उनके ब्लड सैंपल में मौजूद एंटीबॉडी ने न्यूयॉर्क कोरोना वायरस वैरिएंट B.1.526 को निष्क्रिय कर दिया. (फोटोःगेटी)
इस स्टडी में यह बात भी सामने आई कि जिन लोगों के शरीर में वैक्सीन की वजह से एंटीबॉडी विकसित हुई थी, उनके शरीर में न्यूयॉर्क वैरिएंट की निष्क्रियता बहुत कम नहीं हुई. क्योंकि ये म्यूटेटेड है. नया वैरिएंट है. लेकिन जो लोग इस वायरस से ठीक हो चुके हैं. साथ ही उन्हें वैक्सीन भी लग चुकी है. उनके एंटीबॉडीज न्यूयॉर्क वैरिएंट B.1.526 के खिलाफ लड़ने की पूरी क्षमता रखते हैं. (फोटोःगेटी)
न्यूयॉर्क स्थित रॉकफेलर यूनिवर्सिटी के इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. मिशेल नसेंजविज ने कहा कि हमें ज्यादा अंतर नहीं देखने को मिला. लेकिन जिन लोगों को फाइजर या मॉडर्ना (Pfizer या Moderna) की वैक्सीन लगी थी, उनके शरीर में न्यूयॉर्क वैरिएंट का असर कम देखने को मिला. कई लोगों के शरीर में यह वैरिएंट इन टीकों की वजह से निष्क्रिय भी हुआ. (फोटोःगेटी)
डॉ. मिशेल ने बताया कि B.1.526 वैरिएंट के अंदर एक खास तरह का म्यूटेशन सेट है जिसे एक (Eek) कहते हैं. यह किसी भी एंटीबॉडी से भयानकर स्तर पर संघर्ष करता है. लेकिन फाइजर और मॉडर्ना के टीकों ने इस म्यूटेशन सेट को भी निष्क्रिय करने में सफलता पाई है. (फोटोःगेटी)
सिएटल स्थित फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर के इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम कहती हैं कि इसे देखकर लगता है कि कोरोना वायरस के वैरिएंट्स अब वैक्सीन से विकसित होने वाली एंटीबॉडी से बचने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं. म्यूटेशन कर रहे हैं. इसे लेकर किसी को परेशान होने की जरूरत फिलहाल नहीं है. लेकिन इससे भविष्य के रिसर्च में मदद मिलेगी. (फोटोःगेटी)