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साइंस न्यूज़

समंदर में दुर्लभ कॉटन कैंडी लॉब्स्टर जाल में फंसा, 10 करोड़ में एक बार होती है ऐसी घटना

Rare Cotton Candy Lobster
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ये बात है 5 नवंबर की जब मायन (Maine) में एक मछुआरे ने समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया. थोड़ी देर बाद जब उसने जाल उठाया तो उसमें एक नीले रंग का दुर्लभ लॉब्स्टर पकड़ में आ गया. इसे कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) कहते हैं. यह घटना महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि जब कोई मछुआरा 10 करोड़ मछलियां पकड़ता है तो एक बार उसे यह नीले रंग का कॉटन कैंडी लॉब्स्टर मिलता है. (फोटोः गेट मायन लॉब्स्टर)

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लॉब्स्टर का हिंदी में मतलब झींगा मछली, केकड़ा, कर्कट और लॉब्स्टर ही होता है. अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग नामों से बुलाया जाता है. यह एक प्रसिद्ध सी-फूड है. गेट मायन लॉब्स्टर नाम की सी-फूड कंपनी के सीईओ मार्क मरेल ने बताया कि मायन की खाड़ी (Gulf of Maine) में स्थित कैस्को बे (Casco Bay) में मछुआरे बिल कॉपरस्मिथ ने इस दुर्लभ कॉटन कैंडी लॉब्स्टर को पकड़ा था. (फोटोः गेट मायन लॉब्स्टर)

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बिल कॉपरस्मिथ ने इस कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) का नाम अपनी पोती के नाम पर हैडी रखा. इसके बाद तुरंत कंपनी को बताया कि उसके हाथ एक दुर्लभ लॉब्स्टर लगा है. मार्क मरेल ने बताया कि कॉटन कैंडी लॉब्स्टर का मिलना इसलिए भी रेअर माना जाता है क्योंकि किसी को ये नहीं पता कि दुनिया में इनकी संख्या कितनी है. नेशनल जियोग्राफिक की मानें तो यह जीव हर चार से पांच साल में एक बार पकड़ में आता है. (फोटोः बिल कॉपरस्मिथ)

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बोस्ट्न स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स में सस्टेनिबिलिटी एंड फूड सॉल्यूशंस के एसोसिएट प्रोफेसर माइकल लस्टी बताते हैं कि यह सच में 10 करोड़ मछलियों या लॉब्स्टर को पकड़ने के दौरान एक बार होने वाली घटना है. बिल कॉपरस्मिथ 40 सालों से मछलियां और लॉब्स्टर पकड़ रहे हैं. अपने पूरे करियर में उन्होंने सिर्फ तीन बार दुर्लभ लॉब्स्टर पकड़े हैं. पहली बार एक सफेद रंग का और दूसरी बार नारंगी रंग का. इस बार कॉटन कैंडी लॉब्स्टर तीसरी घटना है. (फोटोः द टेकआउट)

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नेचर जर्नल के मुताबिक लॉब्स्टर को उनका रंग एक खास तरह के पिगमेंट और एंटीऑक्सीडेंट एस्टेक्सएंथिन (Astaxanthin) से मिलता है. जब इस रसायन से कोई अन्य प्रोटीन मिलता है तो इनका आकार बदलने लगता है. जैसे जब आप लॉब्स्टर को पकाते हैं तब तेल का रसायन इसके साथ मिलकर इसका रंग तोड़ देता है. एस्टेक्सएंथिन खत्म हो जाता है. पकने के बाद किसी भी रंग का लॉब्स्टर चमकदार लाल रंग का दिखता है. (फोटोः गेट मायन लॉब्स्टर)

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जिंदा लॉब्स्टर में प्रोटीन एस्टेक्सएंथिन को छोड़ता नहीं है. वह उसे बांधे रहता है. इसलिए इसपर रोशनी पड़ने से अलग-अलग रंग दिखते हैं. जिस वेवलेंथ की रोशनी का असर ज्यादा होगा, उसी रंग का लॉब्स्टर दिखेगा. इसीलिए कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) का रंग नीला दिखता है. वहीं, कुछ का रंग नारंगी, पीला या लाल रंग का दिखता है. (फोटोः गेट मायन लॉब्स्टर)
 

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कई बार इन रंगों का मिश्रण इन लॉब्स्टर को मटमैला, गाढ़ा नारंगी या भूरा रंग देता है. लेकिन ऐसा कम ही होता है. पर नीले रंग का कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) का रंग और उसका मिलना सच में एक बेहद दुर्लभ घटना है. ऐसा हो सकता है कि कॉटन कैंडी लॉब्स्टर में एस्टेक्सएंथिन की कमी हो. या फिर उसका खान-पान कम हो. यानी ये लॉब्स्टर छोटे केकड़ों और श्रिंप को छोड़कर मछलियां खाते होंगे. इसलिए ऐसा होता होगा. (फोटोः गेट मायन लॉब्स्टर)

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वैज्ञानिक ये भी मानते हैं कि कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) के जीन्स में म्यूटेशन हुआ है. जिसकी वजह से उसके रंग में अंतर आया है. क्योंकि ये लॉब्स्टर आसानी से मिलते नहीं हैं, इसलिए इन पर ज्यादा रिसर्च हो नहीं पाया है. फिलहाल कॉटन कैंडी लॉब्स्टर हैडी को न्यू हैंपशायर के राय स्थित सीकोस्ट साइंस सेंटर में नया घर मिल गया है. मार्क मरेल कहते हैं कि यह बेहद खूबसूरत लॉब्स्टर है, हम इसे बचाना चाहते हैं. (फोटोः सीकोस्ट साइंस सेंटर)

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जब यह पूछा गया कि लॉब्स्टर हैडी को वापस समुद्र में क्यों नहीं छोड़ा गया. तब मायन लॉब्स्टरमैन कम्यूनिटी एलांयस ने कहा कि इसके रंग की वजह से इसकी जान पर खतरा था. यह शिकारियों की नजर में जल्दी आता. इसलिए हमने इसे सुरक्षित जगह पहुंचा दिया है. हमनें इस दुर्लभ कॉटन कैंडी लॉब्स्टर (Cotton Candy Lobster) को सीकोस्ट साइंस सेंटर में पहुंचा दिया है. (फोटोः सीकोस्ट साइंस सेंटर)

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