मधुमक्खियां शाकाहारी होती हैं. ये बात आज से नहीं 8 करोड़ सालों से चली आ रही है. हालांकि 10 करोड़ साल पहले ऐसा नहीं था. वो मांसाहारी शिकारी हुआ करती थी. लेकिन अब तो शाकाहारी ही हैं क्योंकि उन्हें जो चाहिए वो उन्हें फूलों से मिल जाता है. जैसे- फूलों का रस, फूलों का तेल, प्रोटीन से भरे हुए पराग आदि. लेकिन क्या आपको पता है कि शहद बनाने वाली मधुमक्खियों को शहद से ज्यादा मीठा क्या लगता है? वो है सड़ा हुआ मांस. हाल ही में हुई एक स्टडी में यह हैरतअंगेज खुलासा हुआ है. (फोटोः गेटी)
मुधमक्खियों की दुनिया में भी ऐसी प्रजातियां होती हैं जो कभी फूलों का रस या पराग नहीं निकाल पातीं. जैसे- कोस्टा रिका में मिलने वाली वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees). इनके डंक नहीं होते इसलिए ये फूलों का रस या पराग नहीं खींच पातीं. इसलिए ये फलों और अन्य प्रकार के माध्यमों से शुगर जमा करती हैं. जैसे- पौधों के नरम तने, टहनियां या पत्तियां. लेकिन इनके बावजूद इन्हें भारी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है. तो फिर ये वल्चर मधुमक्खियां क्या करें? तब ये सड़ा हुआ या सड़ता हुआ मांस (Rotten Meat) खोजती हैं. (फोटोः गेटी)
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में एंटोमोलॉजी यानी मधुमक्खियों की स्टडी करने वाली विधा की पीएचडी स्टूडेंट जेसिका मकारो ने कहा कि वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) सड़ा हुआ मांस बहुत पसंद करती हैं. क्योंकि सड़ते हुए मांस के ऊपर लाखों-करोड़ों सूक्ष्मजीव मांस को खत्म करने का संघर्ष कर रहे होते हैं. ये सूक्ष्मजीव मांस के ऊपर एक खतरनाक जहरीला पदार्थ पैदा कर रहे होते हैं, जिससे मांस के सड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. सड़ते हुए मांस के ऊपर संघर्ष कर रहे सूक्ष्मजीवों का फायदा उठाती हैं ये वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees). (फोटोः गेटी)
माइक्रोबायोलॉजी जर्नल mBio में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक मांसाहारी वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) इन सूक्ष्मजीवों और इनसे पैदा होने वाले जहर को खाती हैं. जिन्हें मधुमक्खियों की आंत में मौजूद एक विशेष प्रकार का एसिड पचा देता है. वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) को सड़े हुए मुर्गे का मांस बहुत पसंद आता है लेकिन ये किसी भी प्रकार के सड़ते हुए मांस के ऊपर मौजूद सूक्ष्मजीवों को खाकर अपनी प्रोटीन की जरूरत को पूरा करती हैं. (फोटोः गेटी)
जेसिका मकारो ने कहा कि वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) ज्यादा मात्रा में शहद पैदा करने वाली कॉलोनियों में रहती हैं. अगर आप इनकी कॉलोनी के पास किसी मृत शरीर को लेकर आते हैं तो इन मधुमक्खियों के लिए यह किसी भोज से कम नहीं होता. ये मांस के टुकड़ों के काटकर अपनी कॉलोनी में बने विशेष खांचों में रख देती हैं. फिर ये 14 दिनों तक इंतजार करती है. छत्ते के विशेष पॉट में रखे मांस खाने योग्य हो जाते हैं. जैसे ग्रैवेलेक्स (Gravlax). फिर ये इन्हें अपने युवा और छोटे मधुमक्खियों को खिलाती हैं. ताकि उनकी प्रोटीन की जरूरत पूरी हो सके. (फोटोः गेटी)
इस स्टडी में शामिल जेसिका मकारो के साथी क्विन मैक्फ्रेडरिक ने कहा कि वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) अपने पैरों में बनी ग्रंथियों को पराग उठाने के बजाय अलग मकसद के लिए उपयोग करती हैं. ये अपने पैरों की ग्रंथियों से मांस के छोटे-छोटे कणों को उठाकर छत्तों में बने खांचों में रखती हैं. लेकिन इस स्टडी के दौरान दोनों साइंटिस्ट हैरान रह गए जब उन्होंने मधुमक्खियों की इस आदत को समझने के लिए एक प्रयोग किया. साइंटिस्ट ने मुर्गे के सड़े हुए मांस को मधुमक्खियों की कॉलोनी के आसपास बांध के लटका दिया. (फोटोः क्वनि मैक्फ्रेडरिक/UCR)
उम्मीद थी कि वल्चर मधुमक्खियां (Vulture Bees) तो आएंगी ही लेकिन यहां पर तीन अन्य प्रजातियों के मधुमक्खियां भी सड़े हुए मांस का मजा लेने आ गईं. जो तीन अलग प्रजातियों के मधुमक्खियां आईं उन्हें पूरी तरह से शाकाहारी माना जाता रहा है. हालांकि जीव-जंतुओं की दुनिया में ये कोई बड़ी बात नहीं है कि वो शाकाहार और मांसाहार दोनों एकसाथ पसंद करते हैं. खाने के लिए कुछ भी मिलता है तो उसे खा लेते हैं. (फोटोः गेटी)
ज्यादातर मधुमक्खियां अपनी आंतों में मोजूद माइक्रोब्स पर निर्भर रहती हैं, जो खाना पचाने में मदद करती हैं. शाकाहारी मधुमक्खियों के पांच सबसे प्रमुख प्रजातियों के साथ ऐसा ही है. लेकिन मांस पसंद करने वाली मधुमक्खियों की आंतों में अलग तरह सूक्ष्मजीव होते हैं. जिन्हें लैक्टोबैसीलस स्ट्रेन (Lactobacillus strain) कहा जाता है. ये एक खास तरह की बैक्टीरिया होती है जिसका उपयोग बीयर और अचार बनाने में किया जाता है. वहीं शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन करने वाली मधुमक्खियों के शरीर में अलग तरह के बैक्टीरिया होते हैं. (फोटोः गेटी)
वल्चर मधुमक्खियों (Vulture Bees) का पेट अत्यधिक अम्लीय यानी एसिडिक होता है. जिसमें वही बैक्टीरिया मिलते हैं, जो सड़ते हुए मांस के ऊपर संघर्ष कर रहे होते हैं. ये बैक्टीरिया खतरनाक जहर और एंथ्रैक्स जैसे खतरनाक चीजों को भी पचा लेती हैं, जबकि ये किसी अन्य जीव को मौत के घाट उतार सकते हैं. वल्चर मधुमक्खियों (Vulture Bees) के आंतों में प्राचीन बैक्टीरिया तो होते ही हैं, साथ ही नए बैक्टीरिया में पाए जाते हैं जो किसी भी तरह के पौधे के रस या मांस को पचाने में उसकी मदद करते हैं. (फोटोः गेटी)
जेसिका और क्विन ने कहा कि हम अब यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इनके शरीर में एसिड प्रोड्यूस करने वाले बैक्टीरिया उनके आंतों को एसिडिक बना देते हैं. इनके अंदर एक खास तरह की जीन (Gene) होती है, जो काफी ज्यादा मात्रा में एसिड बनाने का काम करता है. अगर कोई वल्चर मधुमक्खी (Vulture Bee) ऐसा नहीं कर पाती तो बाहर से उसके शरीर में आने वाले बैक्टीरिया कर देते हैं. यानी कुल मिलाकर ये है कि इन मधुमक्खियों के शरीर में मांस को पचना ही है, क्योंकि इन्हें मांस खाना पसंद है. (फोटोः गेटी)