यूक्रेन के तीन शहरों मारिन्का (Marinka), क्रास्नोहोरिवका (Krasnohorivka) और नोवोमाइकोलावका (Novomykolaivka) में रूस द्वारा फोड़े गए फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bombs) की वजह से कई लोग घायल हो गए हैं. उनमें बच्चे भी शामिल हैं. दोनेत्स्क रीजनल मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ने ट्वीट करके यह जानकारी दी. जिसमें उन्होंने फॉस्फोरस बम के फूटने की दो तस्वीरें भी लगाई हैं. फॉस्फोरस बम को समझने से पहले जरूरी है हम ये समझे की फॉस्फोरस क्या होता है? (फोटोः एपी)
फॉस्फोरस क्या होता है? (What is Phosphorus)
फॉस्फोरस (Phosphorus) मोम जैसा पदार्थ होता है, जिससे लहसुन (Garlic) की गंध आती है. आमतौर पर यह रंगहीन ही होता है. यानी इसका कोई रंग नहीं होता लेकिन अक्सर हल्के पीले रंग का दिखता है. यह काफी ज्यादा रिएक्टिव होता है. इसे वैक्यूम कनिस्तर में ही रखा जाता है. क्योंकि यह ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही विस्फोट करने लगता है. जलने लगता है. अगर हवा में नमी है और तापमान 30 डिग्री सेल्सियस है तो यह जलने लगता है. इसलिए आमतौर पर इसे वैक्यूम कैनिस्टर या पानी में डुबोकर रखते हैं. (फोटोः एपी)
क्या है फॉस्फोरस बम? (What is Phosphorus Bomb)
फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bomb) को फॉस्फोरस रसायन से बनाया जाता है. यह परमाणु बम जैसा ही व्यवहार करता है. यानी जब तक फॉस्फोरस पूरी तरह से जलकर खत्म नहीं हो जाएगा...यह तबाही फैलाता रहेगा. ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जलने लगता है. धमाके के आसपास के इलाके से ऑक्सीजन सोख लेता है. सारी ऑक्सीजन खुद के जलने में लगा देता है. यह जहां भी गिरता है, वहां आग लग जाती है. (फोटोः रॉयटर्स)
फॉस्फोरस बम से नुकसान (Effects of Phosphorus Bomb)
फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bomb) जिस जगह फटता है, वहां पर तत्काल ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है. यानी इंसान और जानवर जलने के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ महसूस करते हैं. अगर फॉस्फोरस के कण नाक के जरिए शरीर के अंदर पहुंच गए, तो अंदर के अंगों को भी जला सकते हैं. शरीर के संपर्क पर आने काफी तेज जलन महसूस होती है. कई बार फॉस्फोरस शरीर को इतना नुकसान पहुंचाता है कि इंसान की मौत तक हो जाती है. इमारतें जलकर खाक हो जाती हैं. (फोटोः एपी)
Russian forces have used phosphorus bombs in Marinka, Krasnohorivka, and Novomykolaivka, injuring civilians, including children – Pavel Kirilenko, Head of Donetsk regional military administration#StopRussia #ProtectUАSky pic.twitter.com/CK2zjfzxBG
— Stratcom Centre UA (@StratcomCentre) April 1, 2022
कहां होता है फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bomb) का उपयोग
आमतौर पर इस बम का उपयोग उस इलाकों में नहीं किया जाता, जहां पर एक भी इंसान रहता हो. इसे युद्ध के दौरान धुआं पैदा करके कैमोफ्लॉज यानी धोखा देने के लिए धुएं की दीवार बनाई जाती है. लड़ाकू विमानों से इसे हवा में फोड़ दिया जाए तो इसकी गर्मी दुश्मन की हीट सीकर मिसाइलों को अपनी ओर खींच लेती है. जिससे विमान बच जाता है. (फोटोः विकिपीडिया)
कब-कब किया गया इसका उपयोग
फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bomb) का उपयोग पहले और दूसरे विश्व युद्ध में काफी ज्यादा किया गया. इराक युद्ध के समय अमेरिका ने इसे काफी ज्यादा फोड़ा. यह काफी ज्यादा खतरनाक श्रेणी का बम है. वियतनाम युद्ध के समय भी इसे फोड़ा गया. अरब और इजरायल के युद्ध के दौरान भी इसका उपयोग किया गया था. 1977 में जेनेवा में हुए कन्वेंशन में सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय बैन लगा दिया गया था. लेकिन युद्ध में इसे फोड़ सकते हैं. 1997 में यह तय किया गया कि अगर रिहायशी इलाकों में इसका उपयोग किया गया तो इसे रासायनिक हथियारों की कैटेगरी में रखा जाएगा. इस कानून पर रूस ने भी हस्ताक्षर किए थे. (फोटोः रॉयटर्स)
किस तरह से किया जा सकता है उपयोग (Types of Phosphorus Weapons)
फॉस्फोरस बम (Phosphorus Bomb) ही हमले का इकलौता साधन नहीं है. इसके अलावा फॉस्फोरस को हैंड ग्रैनेड्स, ग्रैनेड लॉन्चर्स, टैंक के गोले, छोटे रॉकेट और मोर्टार के जरिए भी दाग सकते हैं. आमतौर पर इन छोटे फॉस्फोरस हथियारों को स्मोक या मार्कर राउंड्स कहते हैं. (फोटोः विकिपीडिया)