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साइंस न्यूज़

Water Geyser on Saturn's Moon: शनि का चंद्रमा अंतरिक्ष में छोड़ रहा पानी का कई किलोमीटर लंबा फव्वारा, हैरान कर देंगी तस्वीरें

Saturn's Moon Enceladus
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शनि ग्रह के पास 145 चंद्रमा हैं. हमारे सौर मंडल में सबसे ज्यादा चांद वाला इकलौता ग्रह. इसी में एक छोटा चांद है इंसीलेडस (Enceladus). इसके ध्रुव पर से पानी के बड़े-बड़े फव्वारे छूट रहे हैं. जिनकी लंबाई अंतरिक्ष में कई किलोमीटर तक है. हाल ही में जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने इस चांद की तस्वीर ली है. (सभी फोटोः NASA)

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माना जाता है कि इंसीलेडस इन फव्वारों के साथ जैविक कण भी अंतरिक्ष में फैला रहा है. इन कणों में कई ऐसे जैविक और रासायनिक कण हो सकते हैं, जिनसे जीवन की संभावना खोजी जा सके. जेम्स वेब ने इसकी तस्वीरें पिछले साल नवंबर 2022 में ली थी. जिसे स्पेस टेलिस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट ने 17 मई को जारी किया है. 

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नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की प्लैनेटरी एस्ट्रोनॉमर सारा फैगी कहती हैं कि ये विशालकाय फव्वारे हैं. अभी इस पर रिसर्च जारी है. असल में इंसीलेडस के क्रस्ट में मौजूद तरल बर्फीले समुद्र को सूरज की गर्मी भाप बनाती है. शनि ग्रह का गुरुत्वाकर्षण उस भाप को बाहर की ओर खींचता है. फिर चांद की सतह से अक्सर ऐसे फव्वारे छूटते दिखते हैं. 

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साल 2008 से 2015 के बीच नासा के कैसिनी स्पेसक्राफ्ट ने इस चांद को देखा तो वैज्ञानिक हैरान रह गए. कैसिनी ने इंसीलेडस से पानी के फव्वारे निकलते देखे. स्पेसक्राफ्ट में लगे मास स्पेक्ट्रोमीटर ने जीवन को पैदा करने वाले जैविक कणों यानी ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स को इन फव्वारों के साथ निकलते देखा. 

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इसके अलावा मॉलीक्यूलर हाइड्रोजन, कार्बन डाईऑक्साइड, मीथेन और पत्थरों के टुकड़े भी निकलते देखे गए. कैसिनी के ऑब्जरवेशन से पता चलता है कि इंसीलेडस के समुद्र में रहने योग्य हाइड्रोथर्मल वेंट्स हैं. जैसे हमारी धरती के समुद्रों की गहराइयों और अंधेरे में कुछ गुफाएं हैं. 

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इतनी गहराइयों और अंधेरे में मीथैनोजेन्स रहते हैं. वो जीव जो मीथेन गैस से जिंदा रहते हैं. क्योंकि यहां तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. इनकी वजह से ही धरती पर भी जीवन की शुरुआत हुई थी. वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसीलेडस पर भी मीथैनोजेन्स हो सकते हैं. वहां के समुद्र में भी सूक्ष्म जीव हो सकते हैं. 

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इंसीलेडस एक बर्फीली दुनिया है. जो हमारे सौर मंडल के लगभग बाहरी इलाके में स्थित है. इस चांद की सतह पर समुद्र नहीं है, बल्कि सतह के नीचे हैं. ऐसी ही दुनिया बृहस्पति के चांद यूरोपा और नेपच्यून के चांद ट्राइटन पर भी है. इंसीलेडस से निकलने वाले पानी के फव्वारे हमें इस बात का सबूत देते हैं कि धरती से बाहर भी जीवन संभव है. या हो सकता है कि वहां पर जीवन हो, जिसके बारे में हमें पता नहीं है.  

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सूक्ष्म जीवन का मतलब हमेशा ये नहीं होता कि जैविक कण और उच्च स्तर की मीथेन वहां पर मौजूद है. इसका योगदान हो सकता है, लेकिन सिर्फ इकलौती वजह नहीं. अगर इंसीलेडस के बनते समय इस पर कई धूमकेतुओं की बारिश हुई होगी तो इसके अंदर मीथेन की काफी ज्यादा मात्रा जमा हो गई होगी. जो धीरे-धीरे ग्रहीय नालियों यानी वेंट के जरिए लीक हो रही हैं.  

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इस दशक में यूरोपियन स्पेस एजेंसी अपना जूस (JUICE) स्पेसक्राफ्ट और नासा यूरोपा क्लिपर मिशन भेज रहा है. लेकिन ये दोनों ही बृहस्पति ग्रह के चंद्रमाओं पर जीवन की खोज करेंगे. ये पता करेंगे कि क्या इन चांद पर रहा जा सकता है. इस दशक के अंत तक नासा ड्रैगनफ्लाई नाम का मिशन लॉन्च कर रहा है, जो टाइटन की सतह पर उतरेगा. ताकि वहां पर जांच करके जीवन की संभावना को तलाश सके. 

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