सौर मंडल में सबसे ज्यादा चंद्रमा शनि ग्रह के पास हैं. इस साल फरवरी में उससे ये खिताब बृहस्पति ने छीन लिया था. 95 चंद्रमाओं के साथ बृहस्पति नंबर एक पर आ गया था. लेकिन अब 62 नए चंद्रमाओं को शामिल करके शनि सबसे ज्यादा चांद वाला ग्रह बन गया है. अब शनि ग्रह के पास कुल 145 चंद्रमा हैं. इतने चंद्रमा किसी और ग्रह के पास नहीं हैं. (फोटोः गेटी/पिक्साबे/नासा)
फरवरी के महीने में बृहस्पति के आसपास 12 नए चंद्रमा खोजे गए थे. तब उसके चंद्रमाओं की संख्या बढ़कर 95 हो गई थी. इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने बताया कि अब सौर मंडल में शनि ग्रह के पास सबसे ज्यादा चंद्रमा हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के एस्ट्रोनॉमर प्रो. ब्रेट ग्लैडमैन ने कहा कि शनि ग्रह ने न अपने चंद्रमाओं की संख्या लगभग दोगुनी कर ली है. बल्कि वह सौर मंडल में मौजूद सबसे ज्यादा चंद्रमा वाला ग्रह भी बन गया है. 62 नए चंद्रमाओं की खोज करने वाली टीम में प्रो. ब्रेट भी शामिल थे.
प्रो. ब्रेट ने बताया कि इन चंद्रमाओं का नामकरण जल्द किया जाएगा. जैसे गैलिक, नॉर्स आदि. साथ ही कुछ चंद्रमाओं का नाम कनाडा के इनउइट देवताओं के नाम पर रखा जाएगा. इसके लिए इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन कुछ इनउइट विद्वानों से संपर्क किया है.
ऐसा माना जाता है कि शनि ग्रह के चारों तरफ कोई बड़ा चंद्रमा रहा होगा, जिसके टूटने से इतने ढेर सारे चंद्रमा बन गए. ये सारे शनि ग्रह के ऑर्बिट में अलग-अलग दिशाओं में फैल गए. हो सकता है कि भविष्य में बृहस्पति ग्रह के चारों तरफ और चंद्रमाओं की खोज हो तो वह शनि के नजदीक पहुंच जाए. हालांकि थोड़ा समय लगेगा.
प्रो. ब्रेट कहते हैं कि अगर कायदे से देखा जाए तो शनि ग्रह के पास बृहस्पति की तुलना में तीन गुना ज्यादा चंद्रमा हैं. लेकिन अभी सबकी गिनती और खोज नहीं हो पाई है. यह वैज्ञानिकों की एक गणना है. लेकिन लगातार खोजबीन चल रही है. इसलिए उम्मीद है कि भविष्य में और चंद्रमा हमें मिले.
पिछले कुछ दशकों में चंद्रमाओं की संख्या बढ़ी है, क्योंकि हमने कई तरह के ताकतवर टेलिस्कोप बनाए हैं. स्पेस में ऑब्जरवेटरी सेट की है. जिनकी वजह से चंद्रमाओं को खोजना आसान होता है. इन्हें खोजने के लिए आजकल शिफ्ट और स्टैक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.
शिफ्ट और स्टैक तकनीक की वजह से धुंधले और छोटे चंद्रमाओं को खोजना आसान होता है. क्योंकि ये चंद्रमा कई बार ग्रहों की ऑर्बिट में काफी दूर और दूसरी दिशा में होते हैं, इसलिए दिखते नहीं है. दिखने के बाद उन्हें चंद्रमा घोषित करने में काफी ज्यादा रिसर्च करना पड़ता है.
प्रो. ब्रेट के साथी डॉ. एडवर्ड एश्टन कहते हैं कि किसी भी ग्रह के चंद्रमा को खोजना किसी पहेली से कम नहीं होता. कई बार छोटे चंद्रमा की खोज में दूसरे पत्थर दिख जाते हैं. जिन्हें पहले तो चंद्रमा माना जाता है फिर वो उस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं.