ऐसा अक्सर सुनने में आता है कि किसी देश में लोगों को गोली मारी जाती है या हिंसा ज्यादा होती है तो लोग वहां से विस्थापित हो जाते हैं. विस्थापित होना यानी एक जगह से दूसरी जगह चले जाना. क्या यही फॉर्मूला पेड़ों के साथ भी लागू होता है. न्यूयॉर्क में एक वैज्ञानिक पेड़ों को गोली मार रही हैं. ताकि वो पेड़ों के विस्थापन की प्रक्रिया को समझ सकें. उन्होंने अपनी स्टडी में ये बात बताई है कि पेड़ भी विस्थापित होते हैं. यह बात सच है. अब वो ये समझने की कोशिश कर रही हैं कि पेड़ कैसे और क्यों विस्थापित होते हैं? आइए जानते हैं इस गोलीमार प्रयोग के पीछे की वजह...(प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
न्यूयॉर्क में उत्तर में स्थित ब्लैक रॉक फॉरेस्ट में इकोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. एंजेलिका पैटरसन (Dr. Angelica Patterson) अपनी शॉटगन से एक नॉर्दन रेड ओक ट्री के ऊपरी हिस्से पर निशाना लगाती हैं. पेड़ से एक टहनी टूटकर गिरती है, जिसे एंजी के साथी जमीन पर गिरने से पहले लपक लेते हैं. एंजी कहती हैं कि ये छोटी टहनी और इसकी पत्तियां मुझे ये बताएंगी कि पेड़ कैसे और क्यों एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं. यानी विस्थापित हो जाते हैं. इन्हें लोग प्यार से एंजी पैटरसन भी बुलाते हैं. (फोटोः ट्विटर/डॉ. एंजेलिका पैटरसन)
एंजी ने बताया कि पेड़ों के विस्थापन की प्रक्रिया हिमयुग (Ice Age) से चली आ रही है. जब पेड़ों को लगता है कि जहां वो पहले से रह रहे हैं, वो जगह अब रहने योग्य नहीं बची तो वो दूसरी तरफ शिफ्ट हो जाते हैं. लेकिन यह प्रक्रिया काफी धीमी होती है. लेकिन लगातार हो रहे पर्यावरण परिवर्तन की वजह से पेड़ों के विस्थापन में बाधा आ रही है. साल 2019 में जारी हुए IUCN रेड लिस्ट श्रेणी में 20 हजार से ज्यादा पेड़ों की प्रजातियां खतरे में बताई गई थीं. जिसमें से 1400 प्रजातियों को गंभीर रूप से विलुप्त होने की श्रेणी में डाला गया था. (फोटोः ट्विटर/डॉ. एंजेलिका पैटरसन)
This scientist shoots trees to study how they migrate https://t.co/3c5GUX2mcH pic.twitter.com/e0EqtE55No
— The Verge (@verge) June 2, 2021
पेड़ों को गोली मारकर उनकी टूटी हुई टहनी से स्टडी करने का यह तरीका विचित्र जरूर है लेकिन एंजी को इससे अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है. एंजी कहती हैं कि वैज्ञानिक कई दशकों से पेड़ों के विस्थापन की स्टडी कर रहे हैं. लेकिन उन्हें इसके पीछे की वजह और प्रक्रिया का पता नहीं चल पाया है. हालांकि इस स्टडी से यह पता चल जाएगा कि भविष्य में कौन से पेड़ विस्थापन करने वाले हैं. या कर सकते हैं. ऐसे पेड़ों को अलग जगह पर लगाया जाएगा. ताकि उनकी प्रजाति बची रहे. नहीं तो पर्यावरण परिवर्तन और बढ़ते तापमान की वजह से विस्थापन बाधित होगा और प्रजाति खत्म हो जाएगी. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
एंजी कहती हैं कि मैं इतने ऊंचे पेड़ों पर चढ़ नहीं सकती क्योंकि उस पर चढ़ने के यंत्र बहुत महंगे हैं. मैं गुलेल से पत्ते या टहनी तोड़ नहीं पाउंगी उसके लिए निशानेबाजी की सटीक कला चाहिए. इसलिए शॉटगन सबसे सही हथियार है. यह सस्ता है और पेड़ों की ऊंची टहनियों और पत्तियों को हासिल करने का सबसे आसान तरीका भी है. हम उन टहनियों और पत्तियों पर गोली मारते हैं जो सबसे ज्यादा सूरज की रोशनी में रहते हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
एंजी पैटरसन रेड ओक पेड़ से मिली टहनी को पानी की बाल्टी में डालती है. पानी में डूबे हिस्से से एक तना काटती है ताकि ऊपर की पत्तियां काम करती रहे. इसके बाद वो तना लेकर अपनी प्रयोगशाला में चली जाती हैं. एंजी ने बताया कि पेड़ों के विस्थापन की स्टडी के बारे में सोचा नहीं था. मैं तो उनके विकास पर अध्ययन कर रही थी. एक दिन अचानक ये पता चला कि पेड़ भी चलते हैं. शिफ्ट होते हैं. विस्थापित होते हैं तो मैं इसके पीछे पड़ गई अब इसकी वजह तलाशनी है. क्योंकि ये किसी जीव या जानवर या इंसान की तरह चलकर शिफ्ट नहीं होते. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
एंजी कहती हैं कि पेड़ों की पूरी रेंज या प्रजाति एकसाथ विस्थापित होती है. लेकिन इसमें काफी ज्यादा समय लगता है. यह एकदम बीज के दूसरी जगह उड़कर या पक्षियों या कीटों द्वारा पहुंचकर पौधे में तब्दील होने जैसा ही है. लेकिन यह इतना आसान नहीं होता. जरूरी नहीं कि कोई बीज कहीं गया और वह पौधे में विकसित हो ही जाए. मैंने ब्लैक रॉक फॉरेस्ट को इसलिए चुना क्योंकि यहां पर पेड़ों का विस्थापन लगातार हो रहा है. 1930 से इसका डेटा और दस्तावेज मौजूद है. पिछले 90 सालों से इस जंगल के अंदर ही पेड़ अपनी जगह बदल रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
डॉ. एंजी ने बताया कि इस जंगल से अब तक तीन प्रजातियों के पेड़ स्थानीय स्तर पर खत्म हो चुके हैं या विस्थापित हो गए हैं. 11 प्रजातियों के पेड़ जंगल के दक्षिणी हिस्से में प्राकृतिक तरीके से चले गए. मैं बस यह जानना चाहती हूं कि इस विस्थापन की प्रक्रिया क्या है. ऐसी कौन सी चीज है जिसकी वजह से पेड़ एक ही जंगल में अपना स्थान बदल रहे हैं. ब्लैक रॉक फॉरेस्ट उत्तर-पूर्वी अमेरिका सबसे तेज कार्बन स्टोर करने वाला जंगल बना है. यह जगह टिंबर वाले पेड़ों के लिए जाना जाता है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
अगर कोई जंगल एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होता है तो पहले वाली जगह पर कार्बन का संतुलन बिगड़ जाएगा. इससे वायुमंडल में ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड रिलीज होगा. एंजी ने बताया कि नॉर्दन रेड ओक्स इस इलाके के लिए सबसे जरूरी पेड़ हैं. ये यहां की मिट्टी, पानी की गुणवत्ता और पोषण को बचाने में मदद करते हैं. अगर इतने बड़े पेड़ यहां से शिफ्ट होते हैं तो इससे जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ जाएगा. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
अगर एक ही तरह के पेड़ विकसित होने लगे या किसी खास प्रजाति के पेड़ों की घुसपैठ जंगलों में हो गई तो इससे जैव-विविधता खत्म हो जाएगी. जो कि किसी भी जंगल के सेहत के लिए अच्छी बात नहीं है. डॉ. एंजी पिछले आठ सालों से पेड़ों और जंगलों का अध्ययन कर रही हैं. उन्होंने 22 प्रजातियों के पेड़ों की पत्तियों का विश्लेषण किया है. वो इस बात का अध्ययन कर रही है कि कैसे पर्यावरण परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग पेड़ों पर असर डाल रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
डॉ. एंजी कहती हैं कि रेड ओक के पेड़ बेहद मजबूत और टिकाउ होते हैं. इसलिए ये धरती पर सदियों से हैं. ओक का एक पेड़ आमतौर पर 350 साल तक जिंदा रह सकता है. ये काफी मजबूत बीज पैदा करते हैं जो बुरी से बुरी स्थिति में भी खुद को पौधा बनाने में सफल होते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में जंगल की आग, तूफान, जानवरों द्वारा इनके छोटे पौधे खाने की वजह से ये विकसित नहीं हो पा रहे हैं. इनके अंदर भी विस्थापन की प्रक्रिया देखी जा रही है. इस वजह से अब इनकी जगह घुसपैठिए प्रजाति के पेड़ कब्जा कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
डॉ. एंजी के पीएचडी सुपरवाइजर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्लांट फिजियोलॉजी के प्रोफेसर केविन ग्रिफिन ने कहा कि ब्लैक रॉक फॉरेस्ट में पेड़ों की प्रजातियों के अद्भुत मिश्रण है. यहां उत्तर से दक्षिण तक अलग-अलग प्रजातियों के पेड़ और पौधे मिलेंगे. ये हडसन वैली तक फैले हैं. 14 हजार साल पहले हिमयुग के अंत में हडसन वैली से जब ग्लेशियर पिघले तब उसके बाद से रेड ओक ट्री के जंगल इस इलाके में पनप गए, जो आज भी मजबूती से खड़े हैं. लेकिन अब थोड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)