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साइंस न्यूज़

रॉकेट लॉन्च होंगे 40% सस्ते, देसी स्पेस कंपनी ने पहली बार 3D प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया

First Private 3D Printed Cryogenic Rocket Engine
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पूरी दुनिया जानती है कि भारत सबसे सस्ते रॉकेट लॉन्च करता है. लेकिन बहुत जल्द देश की एक निजी स्पेस कंपनी पूरी दुनिया को सबसे सस्ते रॉकेट लॉन्चिंग की सुविधा देगी. युवा साइंटिफिक एंटरप्रेन्योर्स की इस टीम ने 25 नवंबर को एक ऐसा परीक्षण किया है, जो कई मामलों में First है. इस कंपनी ने पहली बार थ्रीडी प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन बनाया है. देश में पहली बार किसी निजी स्पेस कंपनी ने क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया है. वह भी लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) के उपयोग से. यानी भविष्य में बेहद सस्ती और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली अंतरिक्ष उड़ानें होंगी. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

First Private 3D Printed Cryogenic Rocket Engine
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हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने 25 नवंबर 2021 को नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्री लिमिटेड की टेस्ट फैसिलिटी में अपने पहले थ्रीडी प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन (First 3D Printed Cryogenic Engine) का सफल परीक्षण किया. यह क्रायोजेनिक इंजन पूरी तरह से देश में बना है. इस इंजन की मदद से यह स्काईरूट अपने रॉकेट विक्रम (Vikram) में लगाएगी. इसकी मदद से छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

First Private 3D Printed Cryogenic Rocket Engine
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स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट के प्रमुख शिरीष पल्लीकोंडा ने aajtak.in से खास बातचीत करते हुए बताया कि हमने पहली बार थ्रीडी प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन बनाया है. यह सामान्य क्रायोजेनिक इंजन से अलग और किफायती है. आमतौर पर क्रायोजेनिक इंजन में कई हिस्से होते हैं, जिन्हें जोड़ा जाता है. लेकिन इस इंजन में सारे पार्ट्स एकसाथ जुड़े हुए ही प्रिंट किए गए हैं. जब बड़े पैमाने पर हम इन क्रायोजेनिक इंजनों का प्रोडक्शन करेंगे तो ये और सस्ते साबित होंगे. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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First Private 3D Printed Cryogenic Rocket Engine
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शिरीष ने बताया कि थ्रीडी क्रायोजेनिक इंजन आम क्रायोजेनिक इंजन की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद है. साथ ही यह 30 से 40 फीसदी सस्ता भी है. हम इसका उपयोग अपने लॉन्च व्हीकल विक्रम-2 और 3 में उपयोग करेंगे. हमारे पास तीन तरह के रॉकेट हैं. विक्रम-1, 2 और 3. विक्रम-1 रॉकेट 225 किलोग्राम वजन के पेलोड को 500 किलोमीटर ऊंचाई वाले SSPO या 315 किलोग्राम वजन के पेलोड को 500 किलोमीटर की लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करेगा. यह रॉकेट 24 घंटे में ही बनकर तैयार हो जाएगा और लॉन्च भी किया जा सकेगा. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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विक्रम-2 रॉकेट 410 किलोग्राम वजन के पेलोड को 500 किलोमीटर के SSPO और 520 किलोग्राम के पेलोड को 500 किलोमीटर के लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करेगा. इसके ऊपरी हिस्से में क्रायोजेनिक इंजन लगेगा. विक्रम-3 रॉकेट 580 किलोग्राम वजन के पेलोड को 500 किलोमीटर के SSPO और 720 किलोग्राम के पेलोड को 500 किलोमीटर के लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करेगा. इन दोनों ही रॉकेटों को 72 घंटे में बनाकर लॉन्च किया जा सकेगा. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस) 
 

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शिरीष पल्लीकोंडा ने बताया कि एक बार जब हम अपने थ्रीडी क्रायोजेनिक इंजन (3D Printed Cryogenic Engine) को अपने विक्रम रॉकेट में लगाकर सैटेलाइट लॉन्च करेंगे तो पूरी उम्मीद है कि हम दुनिया की सभी स्पेस एजेंसियों से 32 से 40 फीसदी सस्ती लॉन्च कर पाएंगे. इसकी एक वजह ईंधन में बदलाव भी है. हम आम ईंधन के बजाय LNG यानी लिक्विड नेचुरल गैस और लिक्विड ऑक्सीजन (LoX) की मदद से रॉकेट को लॉन्च करेंगे. जो किफायती भी होगा और प्रदूषण मुक्त भी. इस क्रायोजेनिक इंजन की टेस्टिंग करने वाली टीम का नाम लिक्विड टीम (Liquid Team) है. इसमें करीब 15 युवा वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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पहले थ्रीडी प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन (First 3D Printed Cryogenic Engine) को भारत के प्रसिद्ध रॉकेट साइंटिस्ट डॉ. सतीश धवन के नाम पर धवन-1 (Dhawan-1) दिया गया है. जबकि, विक्रम रॉकेट का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है. इस रॉकेट और इंजन को बनाने के पीछे मकसद है कि छोटे सैटेलाइट्स के उद्योग को बढ़ावा देना. स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) की साइट पर लिखा है कि वो इन रॉकेटों के जरिए भारत को दुनिया का सबसे चहेता स्पेस लॉन्च प्लेटफॉर्म दिलाना चाहते हैं. ये लॉन्च किफायती, भरोसेमंद और सटीक होंगे. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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कंपनी के अनुसार LNG यानी लिक्विड नेचुरल गैस भविष्य का स्पेस ईंधन है. यह >90% मीथेन है. इससे प्रदूषण कम होता है और यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है. स्काईरूट एयरोस्पेस ने क्रायोजेनिक इंजन की टेस्टिंग के लिए इंजन टेस्ट स्टैंड भी खुद ही बनाया है. कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक पवन कुमार चंदाना ने कहा कि यह ईंधन ज्यादा क्षमता, कम लागत और प्रदूषणमुक्त है. भविष्य में इसी तरह के ईंधनों का उपयोग सभी स्पेस एजेंसीज करेंगी. यह पूरी तरह से Made-in-India क्रायोजेनिक इंजन है. इसे बनाने में सुपरएलॉय का उपयोग किया गया है, जिससे क्रायोजेनिक इंजन बनाने के समय में 95 फीसदी की बचत हुई है. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) को देश की पहली निजी रॉकेट बनाने वाली स्टार्टअप है. इसमें 100 रॉकेट इंजीनियर्स काम कर रहे हैं. इनमें से कई तो पूर्व इसरो साइंटिस्ट रह चुके हैं. कंपनी के साइंटिस्ट भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में पहली बार निजी लॉन्च व्हीकल्स यानी रॉकेट बनाने का प्रयास कर रहे हैं. (फोटोः स्काईरूट एयरोस्पेस)

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