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साइंस न्यूज़

आवाज से कंट्रोल होने वाला बैक्टीरिया Cancer इलाज में कीमोथैरेपी से दिलाएगा राहत

Sound Controlled Bacteria
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जब से कीमोथैरेपी (Chemotherapy) का ईजाद हुआ है. तब से यह कैंसर के इलाज का एक प्रमुख तरीका रहा है. लेकिन इसके साथ कुछ नुकसानदेह चीजें भी हैं.  कैंसर की कोशिकाओं को मारने के साथ-साथ यह बालों के जड़ों को भी खत्म कर देता है. जिससे इंसान गंजा होने लगता है. पेट की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करता है, जिससे इंसान को बेचैनी और उलटी सी आती है. पर अब कीमोथैरेपी का बेहतर विकल्प मिल गया है. (फोटोः सीडीसी/जेम्स आर्चर)

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कालटेक (Caltech) में वैज्ञानिकों के पास शायद इसका बेहतर समाधान है. एक ऐसा बैक्टीरिया जो कैंसर का इलाज करेगा. यह बैक्टीरिया जेनेटिकली इंजीनियर्ड है. यह आवाज से नियंत्रित होता है. इसके अलावा यह कैंसर की कोशिकाओं को खत्म कर देता है. इसके बारे में हाल ही में Nature Communications जर्नल में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. (फोटोः पिक्साबे)

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इस बैक्टीरिया की खोज में होवार्ड ह्यू मेडिकल इंस्टीट्यूट में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफसर मिखाइल शापिरो ने प्रमुख कार्य किया है. उन्होंने बताया कि कैसे यह खास तरह के बैक्टीरिया विकसित किया गया. कैसे उन्होंने एशेरिकिया कोलाए (E. Coli) के स्ट्रेन को स्पेशल बना दिया. कैसे वह कैंसर वाले ट्यूमर में जाकर उसकी कोशिकाओं से लड़ता है. (फोटोः गेटी)

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एक बार जब जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया को मरीज के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है, तब वह कैंसर ट्यूमर के अंदर जाकर कैंसर कोशिकाओं के बीच तबाही मचा देता है. एक बार जब ये तय कोशिका तक पहुंच जाते हैं तब ये लगातार एंटी-कैंसर दवाएं छोड़ना शुरु करते हैं, जिन्हें अल्ट्रासाउंड तरंगों से प्रेरित किया जाता है. यानी इन तरंगों की आवाजों को सुनकर बैक्टीरिया दवाएं रिलीज करते हैं. (फोटोः गेटी)

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मिखाइल शापिरो ने कहा कि इस तकनीक के पीछे मकसद है इंजीनियर्ड प्रोबायोटिक्स को कैंसर ट्यूमर में डालकर उसे निष्क्रिय कर देना. मरीज को राहत दिलाना, वो भी बिना किसी साइड-इफेक्ट के. अल्ट्रासाउंड की तरंगें आवाज से नियंत्रित होने वाले इन बैक्टीरिया को सक्रिय करती हैं. यह तरंगों के इशारे पर ट्यूमर के अंदर दवा रिलीज कर देता है. (फोटोः गेटी)

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मिखाइल ने जिस एशेरिकिया कोलाए (E. Coli) का उपयोग इस काम के लिए किया है, उसे इंसानों पर मेडिकल उपयोग के लिए अनुमति मिली हुई है. इसका नाम है निसल 1917 (Nissle 1917). जैसे ही बैक्टीरिया को खून की नसों में डाला जाता है ये पूरे शरीर में तेजी से फैल जाता है. (फोटोः गेटी)

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इसके बाद मरीज के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सारे बैक्टीरिया को मार देती है, सिर्फ वो बचते हैं जो कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए उनके आसपास कॉलोनी बना लते हैं. इसके बाद वो शरीर के अंदर इम्यूनोसप्रेस्ड वातावरण बनाते हैं. बैक्टीरिया को कैंसर के इलाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके दो सेट जीन्स में जेनेटिकल बदलाव किया. (फोटोः पिक्साबे)

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एक सेट जीन्स नैनोबॉडीज (Nanobodies) निकालती हैं. जो इलाज के लिए जरूरी प्रोटीन भेजकर ट्यूमर के सिग्नल बंद कर देते हैं. ताकि इम्यून सिस्टम में एंटी-ट्यूमर प्रतिक्रिया न शुरु हो. जब ये नैनोबॉडीज मौजूद रहती है शरीर में तो इम्यून सिस्टम ट्यूमर पर हमला करता है. वहीं, जीन्स का दूसरा सेट थर्मल स्विच का काम करता है. यह बैक्टीरिया के सही जगह पर पहुंचने के बाद नैनोबॉडीज जीन्स के तापमान को जरूरी स्तर बढ़ा देता है. (फोटोः पिक्साबे)

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जब आप शरीर के अंदर तापमान पर निर्भर नैनोबॉडीज जीन्स को पहुंचाते हैं, तब तापमान बढ़कर 42-43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. जबकि इंसान के शरीर का तापमान सामान्य तौर पर 37 डिग्री सेल्सियस रहता है. यह गर्मी ट्यूमर की कोशिकाएं बर्दाश्त नहीं कर पाती. वह विकसित होना बंद हो जाती है. सवाल ये था कि बैक्टीरिया तो शरीर में कहीं भी जा सकते हैं. कहीं भी गर्मी पैदा कर सकते हैं. इसलिए वैज्ञानिकों ने फोकस्ड अलट्रासाउंड (FUS) का तरीका निकाला. (फोटोः पिक्साबे)

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फोकस्ड अलट्रासाउंड (FUS) ठीक वैसी ही तकनीक है, जैसी गर्भवती महिला के गर्भ की जांच के लिए स्कैनिंग में की जाती है. लेकिन इसकी ताकत काफी ज्यादा है. यह एक तय जगह पर जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया को टिका देता है. वहीं नैनोबॉडीज रिलीज कराता है. एक तय मानक तक गर्मी पैदा करता है. मतलब जहां कैंसर है, वहीं पर युद्ध शुरु करा देता है और अंत में विजय भी हासिल करता है. अभी यह परीक्षण चूहे पर किया गया है. (फोटोः पिक्साबे)

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