हाल ही में जंतु विज्ञानियों ने एक नई प्रजाति की विचित्र छिपकली खोजी है. ये कोई हैरान करने वाली बात नहीं है. अक्सर खोजते हैं. लेकिन इस विचित्र छिपकली का संबंध 9.9 करोड़ साल पहले विलुप्त हो चुके अजीबो-गरीब प्राचीन जीव से है, जिसे सबसे छोटा उड़ने वाला पक्षी माना जाता है. ये प्राचीन पक्षी क्रेटसेसियस काल (Cretaceous Period) का था. यानी 14.55 करोड़ साल से लेकर 6.55 करोड़ साल के बीच तक. क्योंकि इस प्राचीन पक्षी का जीवाश्म आज भी अंबर में सुरक्षित रखा है. हैरानी की बात ये है कि जो नई छिपकली मिली है, उसका संबंध भारत के पड़ोसी देश म्यांमार से है. (फोटोः फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री)
इस नई छिपकली का नाम है ऑक्लूडेंटाविस नागा (Oculudentavis Naga). यह हमिंग बर्ड के आकार की छिपकली होती है. पहले इसका नाम ऑक्लूडेंटाविस खौनग्राए रखा गया था. लेकिन बाद में बदल दिया गया. जब इस छिपकली का अध्ययन किया जाने लगा तो पता चला कि यह प्राचीन काल की सबसे छोटी डायनासोर पक्षी के वंश की है. लेकिन इस विचित्र छिपकली में कई अंतर भी हैं, जो वैज्ञानिकों को परेशान कर रहे हैं. यह छिपकली भी है और पक्षियों वाले गुण भी हैं इसमें. (फोटोःगेटी)
पक्षियों के गुण होने के बावजूद इस छिपकली को वैज्ञानिक विचित्र और अजीब कह रहे हैं. नई स्टडी के मुताबिक यह प्राचीन डायनासोर पक्षी की कजिन (Cousin) हो सकती है. क्योंकि इसकी जांच जीव विज्ञानियों ने अंबर में कैद प्राचीन पक्षी से की. अंबर में जीव तब फंसते हैं जब वो किसी कोनिफर पेड़ के टहनी पर बैठे हों और उनके ऊपर पेड़ से चिपचिपा रेसिन पदार्थ गिर जाए. फिर वो जीव इसमें से निकल नहीं पाता. ये रेसिन समय के साथ कड़ा होता जाता है. इसे ही अंबर (Amber) कहते हैं. (फोटोःगेटी)
बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया म्यूजियम ऑफ पैलियोंटोलॉजी के मुताबिक अंबर में कैद जीव ऑक्सीजन और बैक्टीरिया दोनों से दूर हो जाता है. इसकी वजह से ये पर्यावरणीय स्थितियों के बदलने के बावजूद भी खराब नहीं होता. उस जीव का शरीर खत्म नहीं होता या सड़ता-गलता नहीं है. कई बार तो जीव के नाजुक अंग जैसे - पंख भी उस अंबर में पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. जिससे जीव विज्ञानियों को अध्ययन करने में आसानी होती है. (फोटोःगेटी)
आजतक अंबर में कैद कई ऐसे जीव मिले हैं जो पूरी तरह से सुरक्षित रहे हैं. जैसे पंख वाले डायनासोर की पूंछ, प्राचीन छिपकली की जीभ. यहां तक कि सेक्स करते हुए कीड़े के एक जोड़े को 4.10 करोड़ साल बाद पूरी तरह से सुरक्षित और उसी स्थिति में पाया गया था, जिस स्थिति में वो थे. म्यांमार के काचीन प्रांत में क्रेटेसियस काल के कई अंबर जीवाश्म मिलते हैं. इसी प्रांत के अंग बार खदान से वैज्ञानिकों को ऑक्लूडेंटाविस का जीवाश्म मिला था. (फोटोःगेटी)
'Strange beast' in amber is a very weird lizard https://t.co/zaJwxzIP9Y
— Live Science (@LiveScience) June 15, 2021
इस प्रांत के स्थानीय लोग अंबर को सुरक्षित रखते हैं. इसके बाद अंबर की खोज करनी शुरू की गई तो उन्हें एक खदान में यह बड़ी संख्या में मिले. जिसमें कई तरह के जीव और पौधे कैद हैं. साल 2017 से इस प्रांत के स्थानीय लोग अंबर को खदान से निकालने में मदद कर रहे हैं. लेकिन म्यांमार में मिलिट्री शासन आने के बाद से अब इन खदानों में काम करने या अंबर खोजने कोई नहीं जाता. ये लोग फिलहाल मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने में लगे हैं. (फोटोःगेटी)
हालांकि, ऑक्लूडेंटाविस नागा का अंबर जीवाश्म कानूनी तरीके से हासिल किया गया है. उसके बाद उसे साल 2017 में म्यांमार से GRS Gemresearch Swisslab के जेमोलॉजिस्ट एडोल्फ पेरेटी के पास एक्सपोर्ट कर दिया गया. इस जीवाश्म को देखने के बाद एडोल्फ इस बात पर परेशान हो गए कि यह पक्षी जैसी छिपकली है या छिपकली जैसा पक्षी. क्योंकि इसकी कुल लंबाई 14.2 मिलीमीटर है. इसके नाक आगे की ओर निकले हैं. जैसे आमतौर पर पक्षियों के होते हैं. (फोटोःगेटी)
एडोल्फ पेरेटी की यह स्टडी 14 जून को जर्नल करेंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुई है. जब उन्होंने ऑक्लूडेंटाविस नागा का अध्ययन करना शुरु किया तो पता चला कि इसकी खोपड़ी अलग है. यह छिपकली के हिसाब से ज्यादा बड़ी है. इसके सिर का ऊपरी हिस्सा चिपटा है. थूथन बाहर निकला है. आंखें जितनी ज्यादा खुलती हैं, उतनी छिपकलियों की नहीं खुलतीं. यह कई मायनों में प्राचीन डायनासोर पक्षी से मिलता है. (फोटोः फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री)
इस स्टडी में शामिल फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के एसोसिएट साइंटिस्ट एडवर्ड स्टैनले ने कहा कि प्राचीन डायनासोर छिपकली और इस ऑक्लूडेंटाविस नागा के बहुत से चीजें समान हैं. दोनों के जबड़ों में दांतों का फॉर्मेशन एक जैसा है. दांतों का पैटर्न भी मिलता-जुलता है. दोनों के जबड़ों के पीछे के हिस्से में एक क्वाड्रेट है, जो एक जैसा है. यह क्वाड्रेट जबड़ों, दांतों और दिमाग के कैप्सूल को आपस में जोड़ता है. (फोटोःगेटी)
एडोल्फ और एडवर्ड दोनों ने इसका अध्ययन करने के बाद यह फैसला किया इसे छिपकली ही बुलाया जाएगा. भले ही इसकी समानता प्राचीन डायनासोर पक्षी से हो. क्योंकि यह इवोल्यूशन से जुड़ी ऐसी पहेली है जिसका समाधान निकालना आसान नहीं है. दोनों ही जीव विज्ञानियों ने दुनियाभर के साइंटिस्ट्स से इस पर रिसर्च करने को कहा है. (फोटोःगेटी)