स्वीडन की कंपनी SAAB को भारत में डिफेंस सेक्टर का पहला 100% FDI मिला है. संभावना है कि यह कंपनी हरियाणा में अपनी फैक्ट्री लगाएगी. जहां पर दुनिया का सबसे खतरनाक एंटी-टैंक हथियार बनाया जाएगा. इस हथियार का नाम है कार्ल गुस्ताफ एम 4 (Carl Gustaf M4). है तो ये रॉकेट लॉन्चर पर इसे कहते हैं राइफल. (फोटोः विकिपीडिया)
यह हथियार भारत में बनेगा तो कई तरह के फायदे होंगे. कार्ल गुस्ताफ एम4 रिकॉयललेस राइफल है. इस वेपन सिस्टम को साब की नई सब्सिडियरी कंपनी साब एफएफवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी. यह कंपनी पहली बार स्वीडन से बाहर कोई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने जा रही है. (फोटोः SAAB)
SAAB के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि हम कार्ल गुस्ताफ एम4 रॉकेट लॉन्चर की टेक्नोलॉजी भारत को हस्तांतरित कर देंगे. भारत में बना पहला हथियार साल 2024 में तैयार हो जाएगा. भारतीय सेना ने साब से पहले ही M4 वैरिएंट मंगा रखे हैं. भारत के प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा पहले भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों को मिलेगा. (फोटोः SAAB)
इसके बाद हथियारों को स्वीडन ले जाकर, वहां से उनका अंतरराष्ट्रीय डील किया जाएगा. कार्ल गुस्ताफ एम4 राइफल कंधे पर रख कर दागा जाने वाला हथियार है. इसके चार वैरिएंट हैं. M1 को 1946 में बनाया गया था. M2 को 1964 में बनाया गया था. M3 को 1986 में बनाया गया था. (फोटोः SAAB)
भारतीय सेनाओं के पास यह वैरिएंट पहले से है. उसका उत्पादन भारत में ही होता है. M3 को भारत में म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड और एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड मिलकर बनाते हैं. भारत की ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड कार्ल गुस्ताफ एम3 को भारत में ही बना रही है. उसकी रेंज 1200 मीटर है. उसका उत्पादन भी भारत में जारी रहेगा. (फोटोः SAAB)
कार्ल गुस्ताफ एम4 को 2014 में बनाया गया है. यह दुनिया के अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चरों में से एक है. इसका वजन 6.6 किलोग्राम है. लंबाई 37 इंच है. इसे चलाने के लिए दो लोगों की जरुरत होती है. एक गनर और दूसरा लोडर. इसमें 84 mm व्यास और 246 mm लंबा रॉकेट लगता है. यह एक मिनट में छह राउंड दाग सकता है. (फोटोः SAAB)
इस रॉकेट लॉन्चर से दागे जाने के बाद इसके गोले अधिकतम 840 फीट प्रति सेकेंड की गति से आगे बढ़ते हैं. यानी 918 km प्रतिसेकेंड की गति. अगर दुश्मन चलती फिरती गाड़ी में है तो इसकी सटीक रेंज 400 मीटर है. गाड़ी खाड़ी है तो 500 मीटर. अगर स्मोक और हाईएक्सप्लोसिव गोले का उपयोग करते हैं तो रेंज 1000 मीटर है. अगर रॉकेट बूस्टेड लेजर गाइडेड हथियार दागते हैं तो 2000 मीटर तक गोला जाता है. (फोटोः SAAB)
कार्ल गुस्ताफ एम4 में 10 तरह के हथियार लग सकते हैं. यानी एक ही वेपन सिस्टम से दुश्मन के ऊपर दस तरह के हथियार दागे जा सकते हैं. यानी एंटी पर्सनल HE और ADM, सपोर्ट वॉरहेड यानी Smoke, Illum, HEAT, एंटी ऑर्मर HEAT 551, 551C, 751. इसके अलावा मल्टी रोल एंटी स्ट्रक्चर वॉरहेड में ASM 509, MT 756, HEDP 502, 502 RS. इनका वजन 1.7 kg तक हो सकता है. (फोटोः SAAB)
भारत में बनाए गए SAAB कंपनी के कार्ल गुस्ताफ एम4 को उन जवानों को दिया जाएगा जो चीन की सीमा के पास LAC पर तैनात हैं. यानी चीन कभी भी क्लोज कॉम्बैट यानी नजदीकी लड़ाई की कोशिश नहीं कर पाएगा. गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि सिर्फ हथियार नहीं बल्कि उसके हिस्सों का भी निर्माण करेंगे. (फोटोः विकिपीडिया)
गॉर्जेन जोहान्सन ने कहा कि हम भारत में अत्याधुनिक और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट हथियार बनाएंगे. भारतीय सेना को भारत में ही बने हुए कार्ल गुस्ताफ एम4 रॉकेट लॉन्चर सिस्टम मिलेंगे. इससे यगहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा. निर्माण से लेकर मरम्मत तक, प्रोडक्शन से लेकर सर्विसिंग तक... सारा काम यहीं होगा. (फोटोः SAAB)