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साइंस न्यूज़

'तस्मानिया के शैतानों' ने आइलैंड पर मचाया कत्ल-ए-आम, 6000 पेंग्विंस खा डाले

Tasmanian Devils killed Penguins
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पिछले महीने तस्मानिया के खुले जंगलों में कुछ शैतान पैदा हुए थे. वह भी 3000 साल के बाद. इनकी आबादी और प्रजाति बचाने के लिए संरक्षणकर्ताओं ने कुछ साल पहले इन्हें एक आइलैंड पर छोड़ा ताकि वहां ये फलफूल सकें. लेकिन इन्होंने उस आइलैंड पर जो तबाही मचाई, उससे अब प्रकृति और जीव विज्ञानी घबरा गए हैं. इन शैतानों ने उस आइलैंड पर मौजूद सभी 6000 छोटे पेंग्विंस की कॉलोनी को खाकर खत्म कर दिया. ये पेंग्विंस उस आइलैंड पर प्रजनन के लिए आए थे. एक जीव के संरक्षण का कदम उलटा पड़ गया. दूसरे जीव खत्म हो गए. अब दुनिया भर से इसकी आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि इस घटना को रोका जा सकता था. इसका अंदाजा पहले लगाया जा सकता था. (फोटोःगेटी)

Tasmanian Devils killed Penguins
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इन नन्हें जीवों को तस्मानियन डेविल (Tasmanian Devil) यानी तस्मानिया का शैतान बुलाते हैं. इन्हें तस्मानिया के पूर्व में स्थित 116 वर्ग किलोमीटर में फैले मारिया आइलैंड पर संरक्षण कार्यक्रम के तहत साल 2012 में भेजा गया था. तस्मानियन डिपार्टमेंट ऑफ प्राइमरी इंडस्ट्रीस, पार्क्स, वाटर एंड एनवायरमेंट (DPIPWE) को उम्मीद थी कि इससे इन शैतानों की नई आबादी आएगी. साथ ही इन्हें बीमारियों और शिकार से बचाया जा सकेगा. लेकिन इन्होंने मारिया आइलैंड पर कत्ले-आम कर दिया. 9 सालों में इन शैतानों ने उस द्वीप पर न सिर्फ अपनी आबादी बढ़ाई बल्कि कई अन्य प्रजातियों के जीवों के लिए खतरा बन गए. (फोटोःरॉयटर्स)

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द गार्जियन अखबार के मुताबिक तस्मानिया के शैतानों ने उस द्वीप पर प्रजनन के लिए आए छोटे पेंग्विंस (Little Penguins) के 3000 जोड़ों को खाकर खत्म कर दिया. अब इस द्वीप पर इन पेंग्विंस का नामोनिशान नहीं है. यहां एक बात तो फिर साबित हो गई कि किसी ताकतवर प्रजाति के जीवों को बचाने के लिए आप प्रयास करेंगे तो वो दूसरे कमजोर प्रजाति के जीवों को खत्म कर देंगे. अब पेंग्विंस के लिए वन्यजीव प्रेमी तस्मानिया की सरकार और DPIPWE को दोषी ठहरा रहे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के ऑर्निथोलॉजिस्ट एरिक वोहलर कहते हैं कि यह घटना रोकी जा सकती थी. मारिया आइलैंड पर इन शैतानों को छोड़ने से पहले उस द्वीप के अन्य जीवों का अध्ययन करना चाहिए था. (फोटोःगेटी)

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तस्मानियन डेविल (Tasmanian Devil) को द इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने खत्म होती प्रजाति की सूची में डाला था. इन्हें मुंह का कैंसर हो जाता है जिसकी वजह से इनकी आबादी खतरे में आ गई थी. 90 फीसदी तस्मानियन डेविल इसी से मारे जाते हैं. DPIPWE के वैज्ञानिकों को लगा कि अगर इन्हें अलग द्वीप पर छोड़ दिया जाए तो ये स्वस्थ भी रहेंगे और सुरक्षित भी. इनकी आबादी भी बढ़ेगी. मारिया द्वीप का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि यहां पर छोटे जीव है, जिन्हें खाकर ये डेविल्स स्वस्थ रहेंगे. लेकिन पेंग्विंस के बारे में अंदाजा नहीं था, क्योंकि ये अंटार्कटिक सर्किल से तैरकर सिर्फ प्रजनन के लिए यहां आती हैं. (फोटोःगेटी)

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DPIPWE के मुताबिक इस समय मारिया द्वीप पर 60 से 90 तस्मानियन डेविल (Tasmanian Devil) छोड़े गए थे. जैसे-जैसे इनकी आबादी बढ़ी ये उस द्वीप पर खतरनाक शिकारी बनकर उभरने लगे. इस समय मारिया द्वीप पर मौजूद डेविल्स वयस्क और युवा हैं. जो पेंग्विंस शिकार होने से किसी तरह बच गई वो अब तस्मानिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अलग-अलग द्वीपों पर जाकर रह रही हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इन शैतानों ने शॉर्ट-टेल्ड शीयरवाटर्स नाम के पक्षियों को भी मारिया द्वीप पर मारा है. ये स्टडी बायोलॉजिकल कंजरवेशन में पिछले साल प्रकाशित हुई थी. इसके अलावा डेविल्स की वजह से केप बैरेन गूज (Cape Barren Goose) और तस्मानियन नेटिव हेन (Tasmanian native hen) पक्षियों की प्रजाति भी खतरे में आ गई है. (फोटोःगेटी)

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तस्मानियन डेविल (Tasmanian Devil) छोटे कुत्ते के आकार का मासांहारी जीव होता है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा मार्सुपियल कार्निवोर (World's Largest Marsupail Carnivore) भी कहा जाता है. खैर ये तो उसके नाम और खान-पान की बात है. मुद्दा ये है कि जो नए तस्मानियन डेविल्स पैदा हुए हैं. उनकी क्या स्थिति है? आखिर क्यों 3000 हजार साल के बाद खुले जंगल में इस जीव का जन्म हुआ? ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में डेविल आर्क सेंचुरी है. यहां पर एक छोटी पहाड़ी जैसा स्थान है, जिसे बैरिंग्टन टॉप (Barrington Top) कहा जाता है. इसी जगह पर तस्मानिया के शैतान के सात शावकों का जन्म हुआ है. इस सेंचुरी के अधिकारियों और एक कंजरवेशन समूह के लोगों को जैसे ही इसकी सूचना मिली वो मौके पर दौड़े. उन्होंने देखा कि सात छोटे-छोटे गुलाबी रंग के फर वाले शावक अपने गड्ढेनुमा घर में एक साथ पड़े है. इनकी मां आसपास ही रही होगी लेकिन वो नजदीक नहीं दिखाई दे रही थी. (फोटोःगेटी)

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इन शावकों को देखकर वन्यजीव एक्सपर्ट खुश हो गए क्योंकि उन्हें उम्मीद जगी कि इस विलुप्तप्राय प्रजाति की आबादी अब बढ़ सकती है. ऑस्ट्रेलिया के खुले जंगलों से इनकी आबादी इसलिए खत्म हो गई क्योंकि इनका काफी शिकार होता आया है. इसके अलावा इन्हें जंगली कुत्तों की प्रजाति डिंगोस बेहद चाव से खाते हैं. इसके बाद इन छोटे शैतानों की आबादी तस्मानिया राज्य तक सीमित रह गई. (फोटोःगेटी)
 

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तस्मानिया के इन शैतानों के सामने दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत है चेहरे का कैंसर होना. अगर ये जीव शिकार होने से बच गए तो इनके लिए दूसरा खतरा है चेहरे पर ट्यूमर होना. ऐसा माना जाता है कि अब तस्मानिया समेत पूरे ऑस्ट्रेलिया में इनकी आबादी सिर्फ 25 हजार के आसपास होगी. ऑसी आर्क कंजरवेशन ग्रुप के प्रेसीडेंट टिम फॉकनर ने बताया कि यहां पर बहुत कुछ दांव पर लगा है. हम जितना कर सकते हैं इन्हें बचाने के लिए वो लगातार कर रहे हैं.  (फोटोःगेटी)

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टिम ने बताया कि सातों शावक सेहतमंद और सुरक्षित हैं. अगले कुछ हफ्तों तक फॉरेस्ट रेंजर्स इन पर नजर रखेंगे. ऑसी आर्क कंजरवेशन ग्रुप ने पिछले साल 26 वयस्क तस्मानियन डेविल्स को खुले जंगल में छोड़ा था. ऐसा माना जा रहा है कि इनमें से ही किसी जोड़े ने प्रजनन की प्रक्रिया पूरी की है. क्योंकि आमतौर पर ये जीव प्रजनन की प्रकिया से दूर भागते हैं.  साल 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने तस्मानियन डेविल्स को विलुप्तप्राय जीवों की लाल सूची में डाल दिया था. इनका सिर काफी बड़ा होता है और गर्दन काफी मजबूत. जिसकी वजह से इनके जबड़े की पकड़ काफी शक्तिशाली होती है. ये जमीन पर तेजी से भाग सकते हैं. पेड़ों पर चढ़ सकते हैं. इतना ही नहीं ये अच्छे तैराक भी होते हैं. (फोटोःगेटी)

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तस्मानियन डेविल्स (Tasmanian Devils) के नर जीवन में एक ही बार मादा के साथ संबंध बनाते हैं. अपनी पसंद की मादा के साथ संबंध बनाने के लिए दो नरों को आपस में शक्ति प्रदर्शन करना होता है. मादा डेविल्स अपने जीवनकाल में चार बार गर्भवती हो सकती हैं. लेकिन एक बार शावकों का जन्म हो गया तो अगली बार के लिए ये अलग नर खोजती हैं. जबकि इनके साथ रहने वाला नर फिर अकेले जीवन बिताता है. (फोटोःगेटी)

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मादा तस्मानियन डेविल एक ब्रीडिंग सीजन में आमतौर पर 20 से 30 शावकों को जन्म दे सकती है. इनके नवजातों का वजन करीब 20 ग्राम होता है. मादा डेविल के पास चार ही निप्पल होते हैं. इसलिए शावकों के बीच दूध की मारामारी होती है. कुछ समय बाद 20-30 शावकों में से कुछ ही बच पाते हैं, क्योंकि बाकी पर्याप्त पोषण न मिलने से मारे जाते हैं. 100 दिन के अंदर नए शावकों का वजन 200 ग्राम हो जाता है. करीब 9 महीने के बाद शावक वयस्क हो जाते हैं और अकेले शिकार पर निकलते हैं. (फोटोःगेटी)

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ऐसा माना जाता है कि प्राचीन मार्सुपियल्स गोंडवाना से ऑस्ट्रेलिया की तरफ गए और वहां पर विकसित हुए. इनके पूर्वजों के अवशेष कई जगहों पर मिले हैं. 1941 में तस्मानियन डेविल्स (Tasmanian Devils) को संरक्षित करने की योजना बनाई गई. 1990 तक आते-आते डेविल फेसियल ट्यूमर डिजीस (DFTD) में काफी गिरावट आई. इसके बाद तस्मानिया की सरकार ने इन जीवों के लिए ब्रीडिंग सेंटर्स तैयार करने शुरु किए. इसमें कई वन्यजीव संरक्षण समूह भी जुड़े. (फोटोःगेटी)

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अब इन जीवों की आबादी बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार इन जीवों को अलग-अलगे देशों के चिड़ियाघरों में भेज रही है. ताकि इनका संरक्षण और प्रजाति का विकास हो सके. ये जमीन पर 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से करीब 1.5 किलोमीटर तक दौड़ सकते हैं. आमतौर पर ये काले-भूरे रंग के होते हैं. किसी किसी डेविल के शरीर पर सफेद फर के हिस्से भी दिखते हैं. आमतौर पर ये सुबह की शुरुआत और शाम की शुरुआत के समय सक्रिय होते हैं. नर आमतौर पर मादा से बड़े होते हैं. इनकी लंबाई 25.7 इंच होती है. पूंछ की लंबाई 10.2 इंच होती है. वयस्क नर का वजन करीब 8 किलोग्राम तक होता है. मादा की लंबाई 22 इंच और वजन 6 किलोग्राम होता है. आमतौर पर इनकी उम्र पांच साल से ज्यादा नहीं होती. लेकिन कुछ डेविल्स इससे ज्यादा भी जी जाते हैं. सिनसिनाटी चिड़ियाघर में बंद एक वयस्क नर डेविल सात साल तक जिया था. क्योंकि उसे शिकार होने का कोई खतरा नहीं था. (फोटोःगेटी)

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तस्मानियन डेविल्स (Tasmanian Devils) अंधेरे में शिकार करते हैं. दिन में ये आमतौर पर घनी झाड़ियों या ऊंचे पेड़ों पर छिपकर आराम करते हैं. छोटे और युवा डेविल्स पेड़ों पर तेजी से चढ़ते हैं जबकि भारी भरकम शरीर वाले वयस्कों को इस काम में दिक्कत आने लगती है. ऐसे में ये जमीन में बने गड्ढे या झाड़ियों में छिपते हैं. डेविल्स आमतौर पर 23 फीट ऊंचे पेड़ों तक चढ़ सकते हैं. डेविल्स समूहों में नहीं रहते. ज्यादातर डेविल अकेले जीवन बिताते हैं. ये सिर्फ प्रजनन के समय ही किसी मादा के साथ रहते हैं. संबंध बनाने के बाद नर मादा से दूर चला जाता है. (फोटोःगेटी)

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डेविल्स छोटे कंगारुओं, वॉमबैट्स, चूहों, भेड़ों, खरगोशों, मेंढक, छिपकली आदि को भी खा लेते हैं. इन्हें शिकार करने में आनंद आता है. इनके सामने इनसे छोटा और कमजोर शिकार आया तो ये उसे छोड़ते नहीं. इतना ही नहीं जंगल में मरे जीवों के शवों से भी मांस खा लेते हैं. डेविल्स अपने वजन का 15 फीसदी मांस रोज खाते हैं. अगर मौका मिलता है तो ये 30 मिनट में अपने शरीर के वजन के 40 फीसदी हिस्से के बराबर मांस खा सकते हैं. (फोटोःरॉयटर्स)

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