भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन में 14 जुलाई 2021 यानी गुरुवार को एक कदम और आगे बढ़ गया. उसने विकास इंजन लॉन्ग ड्यूरेशन हॉट टेस्ट का तीसरा सफल परीक्षण किया. यह इंजन GSLV-MkIII रॉकेट के लिक्विड स्टेज में लगाया जाएगा. यह परीक्षण इंजन की क्षमता को जांचने के लिए किया गया था, जिसे उसने सफलतापूर्वक कर दिखाया. (फोटोः ISRO)
तमिलनाडु स्थित महेंद्रगिरी में इसरो के प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (ISRO Propulsion Complex - IPRC) में विकास इंजन को 240 सेकेंड्स चलाया गया. इस ट्रायल में इंजन ने तय मानकों पर खुद को खरा साबित किया. इसने सारे संभावित गणनाओं को पूरा किया और बेहतर तरीके से परफॉर्म करके दिखाया. आपको बता दें कि इसी इंजन को रॉकेट अलग-अलग स्टेज में लगाया जाएगा, जो गगनयान कैप्सूल को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. (फोटोः ISRO)
इस साल मार्च के महीने में गगनयान (Gaganyaan) के लिए भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों ने रूस में अपने ट्रेनिंग पूरी कर ली थी. इन्हें राजधानी मॉस्को के नजदीक जियोजनी शहर में स्थित रूसी स्पेस ट्रेनिंग सेंटर में एस्ट्रोनॉट्स बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था. इन्हें गगननॉट्स (Gaganauts) कहा जा रहा है.
गैगरीन कॉस्मोनॉट्स ट्रेनिंग सेंटर में भारतीय वायुसेना के पायलटों की ट्रेनिंग हुई है. इस बात की पुष्टि उस समय रूसी स्पेस एजेंसी के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने की थी. उन्होंने कहा था कि रूस भारत के साथ भविष्य में मिशन करना चाहता है. भारतीय एयरफोर्स अधिकारियों को गगननॉट्स (Gaganauts) बनाने के लिए ISRO और रूस के ग्लवकॉस्मॉस (Glavcosmos) के बीच जून 2019 में समझौता हुआ था. (फोटोः ISRO)
भारतीय वायुसेना के चार पायलट जिनमें एक ग्रुप कैप्टन हैं. बाकी तीन विंग कमांडर हैं, इनकी ट्रेनिंग गैगरीन कॉस्मोनॉट्स ट्रेनिंग सेंटर में पूरी हो चुकी है. इन भारतीय जाबांजों की ट्रेनिंग 10 फरवरी 2020 से शुरू हो गई थी लेकिन कोरोनावायरस की वजह से इसे कुछ दिनों के लिए रोका गया था. बाद में इसे 12 मई में शुरू किया गया. इसके पहले ISRO के वैज्ञानिकों ने बताया था कि रूस में ट्रेनिंग लेने के बाद इन चारों गगननॉट्स (Gaganauts) को बेंगलुरू में गगनयान मॉड्यूल की ट्रेनिंग दी जाएगी. (फोटोः गेटी)
#ISRO on July 14, 2021 has successfully conducted the hot test of the liquid propellant Vikas Engine for the core L110 liquid stage of the human rated GSLV MkIII vehicle, as part of engine qualification requirements for the #Gaganyaan Programme
— ISRO (@isro) July 14, 2021
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इस मॉड्यूल को इसरो ने खुद बनाया है, इसमें किसी भी अन्य देश की मदद नहीं ली गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गगनयान प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार करोड़ रुपए जारी किए हैं. गगनयान मिशन के तहत ISRO तीन अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा कराएगा. इन अतंरिक्षयात्रियों को सात दिन के लिए पृथ्वी के लो-ऑर्बिट में चक्कर लगाना होगा. इस मिशन के लिए ISRO ने भारतीय वायुसेना से अंतरिक्षयात्री चुनने के लिए कहा था. (फोटोः ISRO)
दिसंबर 2021 में इसरो तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजेगा. फिलहाल कोरोना वायरस की वजह से मिशन में देरी हुई है. अब मुख्य लॉन्चिंग से पहले दो अनमैन्ड मिशन होंगे. इन दोनों मिशन में गगनयान को बिना किसी यात्री के अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इसके बाद ही गगनॉट्स को गगनयान कैप्सूल में बिठाकर अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजा जाएगा. (फोटोःगेटी)
भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के खाने का मेन्यू भी सामने आया था. जिसमें एग रोल, वेज रोल, इडली, मूंग दाल हलवा और वेज पुलाव शामिल थे. यह खाना मैसूर स्थित डिफेंस फूड रिसर्च इंस्टीट्यूट के द्वारा तैयार किया जा रहा है. अंतरिक्ष में खाना गर्म करने के लिए ओवन की व्यवस्था भी डीआरडीओ ही कर रहा है. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी और जूस के साथ-साथ लिक्विड फूड की भी व्यवस्था रहेगी. (फोटोः गेटी)