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साइंस न्यूज़

'आंधी-तूफान दमा' से हुई थी 10 लोगों की मौत, वैज्ञानिकों ने पता लगाई इसकी वजह

Thunderstorm Asthma Mystery Solved
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आपने कभी 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) का नाम सुना है. ये होता है. इसकी वजह से पांच साल पहले 2016 में ऑ़स्ट्रेलिया में 10 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हो गए थे. पांच साल की मेहनत के बाद अब वैज्ञानिकों ने दमा के इस रूप के रहस्य का पर्दाफाश कर दिया है. आइए जानते हैं कि आखिर ये 'आंधी-तूफान दमा' है क्या बला? (फोटोःगेटी)

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साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न (Melbourne) में एक दुर्लभ बीमारी फैली. इसे नाम दिया गया था 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma). इस बीमारी में आदमी आंधी-तूफान की तरह खांसता नहीं है. बल्कि आंधी और तूफान की वजह से दमा की शिकायत होती है. अब सोचेंगे कि ये क्या फितूर की बात है. आंधी-तूफान और बिजली गिरने या कड़कने से दमा कैसे हो सकता है? (फोटोःगेटी)

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PLOS One नाम के जर्नल में हाल ही में इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. इसमें लिखा है कि अगर तेज हवा के झोंके आ रहे हों. बिजलियां कड़क रही हों या गिर रही हों. हवा में नमी कम हो और पराण के कण हवा के साथ तेजी से फैल रहे हों तो आपको आंधी-तूफान के बाद दमा की दिक्कत हो सकती है. इसकी वजह से ही साल 2016 में मेलबर्न में 10 लोगों की मौत हो गई थी. (फोटोःगेटी)

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अमेरिकन लंग एसोसिएशन के अनुसार 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) तब आता है जब कोई तूफान या आंधी आपके इलाके से गुजर रही हो और वह अपने हवा के झोंकों के साथ पराग के कण (Pollen Grains) को साथ ले चल रही हो. ये पराग के कण पहले से दमा के मरीज और सांस की दिक्कतों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ये आपके सांसों के जरिए शरीर में घुसकर फेफड़ों के सक्रियता को कम या खत्म कर सकते हैं. (फोटोःगेटी)

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'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) से सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को होती है जो पहले से ही दमा के मरीज रहे हैं. या वो लोग जो अपने अस्थमा का इलाज सही से नहीं करा रहे या फिर ऐसे लोग जिन्हें दमा तो है लेकिन उन्हें इसके बारे में पता नहीं है. आंधी-थूफान दमा की वजह से कई लोगों को एलर्जी भी होती है. इससे भी लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है. (फोटोःगेटी)

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'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) अत्यधिक दुर्लभ स्थिति है. ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब आंधी-तूफान के समय लोगों को दमा की दिक्कत होती है. पहली बार 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) के बारे में साल 1983 में पता चला था. अगर मेडिकल लिटरेचर की बात करें तो अब तक ऐसा दुनिया में सिर्फ 22 बार हुआ है. (फोटोःगेटी)

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ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (CSIRO) की सीनियर साइंटिस्ट और आंधी-तूफान के रहस्य का खुलासा करने वाली कैथरीन इमरसन ने कहा कि दुनिया में जो 22 घटनाएं हुई हैं. इसमें 10 सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में हुई हैं. ऑस्ट्रेलिया 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) का हॉट-स्पॉट है. (फोटोःगेटी)

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कैथरीन ने बताया कि 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) की अब तक की सबसे भयावह घटना 21 नवंबर 2016 को मेलबर्न में देखने को मिली है. मौसम बेहद गर्म था. अचानक नमी कम हो गई. पारा 30 डिग्री सेल्सियस था. हवा सूखी थी. उस समय 102 पराग के कण प्रति क्यूबिक मीटर था. जो कि आम दिनों की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा था. (फोटोःगेटी)

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ये तूफान ऐसे समय आया था जब मेलबर्न और उसके आसपास के इलाकों में घास के पराग कण निकले हुए थे. ये पराण कण हवा के जरिए लोगों के सांस की प्रणाली में चले गए. जिन 10 लोगों की मौत हुई और जितने अस्पताल में भर्ती हुए उन सबको सांस लेने में दिक्कत आ रही थी. उन सबकी जांच में घास के पराग कण निकले थे. वो भी बेहद छोटे कणों में. क्योंकि इन्हें तेज हवा के झोके और छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं. (फोटोःगेटी)

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तूफान द्वारा तोड़े गए पराण के छोटे-छोटे कणों की वजह से आम इंसानों को भी दमा की दिक्कत होने लगी थी. तूफान वाली शाम और उसके अगले 36 घंटों तक मेलबर्न के अस्पतालों में सांस की दिक्कत और 'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) की समस्या लेकर लोग आते रहे. इन लोगों की हालत देखकर डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी हैरान था. (फोटोःगेटी)

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मेलबर्न और जीलॉन्ग इलाके के अस्पतालों में उस 36 घंटे के दौरान इमरजेंसी में 672% ज्यादा मरीज आए. इन सभी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. मेलबर्न और उसके आसपास के इलाकों में ये दिक्कत होती है लेकिन इतनी भयावह स्थिति कभी नहीं बनी थी. 2016 में इस  'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) की वजह से पिछले तीन साल की तुलना में 3356 केस ज्यादा आए थे.  (फोटोःगेटी)

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इसके अलावा एंबुलेंस ट्रांसपोर्ट सर्विस, स्थानीय फिजिशियंस और फार्मेसी पर लोगों ने इतने कॉल किए थे कि इमरजेंसी जैसी हालत हो गई थी. अंत में पता चला कि इन 36 घंटों में  'आंधी-तूफान दमा' (Thunderstorm Asthma) की वजह से 10 लोगों की मौत हो गई है. सबसे बड़ा सवाल यही उठा था कि आखिरकार ये हुआ कैसे? इसके बाद सबसे पहले मरने और अस्पताल में आने वाले लोगों की मेडिकल हिस्ट्री निकाली गई. उनकी जांच की गई. कॉमन दिक्कत खोजी गई. (फोटोःगेटी)

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कैथरीन इमरसन और उनकी टीम ने उस समय के मौसम विभाग के डिटेल्स निकाले. तब उन्हें पता चला कि मौसम विभाग ने तूफान, तेज हवा और बिजली कड़कने की भविष्यवाणी की थी. साथ ही ये भी कहा था मौसम सूखा रहेगा. कैथरीन ने बताया कि आंधी-तूफान आने की वजह से तेज हवाएं चली. इससे जो घास के पराग कण थे वो हवा में तैरते हुए लोगों की नाक के जरिए सांस की नली तक चले गए. इसकी वजह से एकसाथ हजारों लोगों को दमा की दिक्कत होने लगी. (फोटोःगेटी)

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जर्नल ऑफ एप्लाइड मेटियोरोलॉजी एंड क्लाइमेटोलॉजी के मुताबिक इस बात का भी खुलासा हुआ था कि बादल के समय चलने वाली हवा और कड़कती हुई बिजलियां भी पराग के कणों को तोड़ने में मदद करती है. लेकिन कम स्तर पर. ज्यादा असर होता है नमी की कमी और तेज हवाओं की वजह से. कैथरीन ने बताया कि जब ये हादसा हुआ था, तब मेलबर्न में इतनी बिजली नहीं कड़की थी. न ही कहीं गिरी थी. इसलिए बिजली वाली थ्योरी पूरी तरह से लागू नहीं होती. (फोटोःगेटी)

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