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साइंस न्यूज़

Future में इंसान ब्लैक होल को बना देगा बैटरी, निकालेगा ऊर्जा... वैज्ञानिक का दावा

Batteries From Black Holes
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Black Hole के अंदर की ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी ज्यादा ताकतवर होती है कि इससे कोई भी निकल नहीं पाता. तो क्या इस ताकत का इस्तेमाल ऊर्जा के तौर पर किया जा सकता है? एक नई स्टडी में इस बात का दावा किया जा रहा है कि भविष्य का इंसान (Future Human) ब्लैक होल्स को बैटरी की तरह इस्तेमाल करेगा. (फोटोः गेटी)

Batteries From Black Holes
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इस स्टडी में ब्लैक होल से ऊर्जा हासिल करने का तरीका भी बताया गया है. कैसे उसके तेज घुमाव और ताकतवर गुरुत्वाकर्षण से ऊर्जा हासिल किया जाए? पेकिंग यूनिवर्सिटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स झान फेंग माई ने दावा किया है कि ऐसा भविष्य में किया जा सकता है. ब्लैक होल को बैटरी बनाया जा सकता है. (फोटोः गेटी)

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झान फेंग की स्टडी में कहा गया है कि वो जानते हैं कि कैसे ब्लैक होल से ऊर्जा ली जाए. उन्हें यह भी पता है कि ब्लैक होल में ऊर्जा कैसे डाली जाए. यह किसी बैटरी को ऑपरेट करने जैसा है. पहले ब्लैक होल को अंदर वैज्ञानिक ढेर सारे चार्ज्ड पार्टिकल डालकर उसे चार्ज करेंगे. यह काम बेहद बड़े पैमाने पर होगा. इन चार्ज्ड पार्टिकल्स को ब्लैक होल खींचेगा. (फोटोः गेटी)

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Batteries From Black Holes
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ये काम तब तक किया जाएगा जब तक ब्लैक होल के अंदर मौजूद इलेक्ट्रिक फील्ड इन चार्ज्ड पार्टिकल्स को बाहर भेजना न शुरू कर दे. यह स्टडी हाल ही में फिजिकल रिव्यू डी जर्नल में प्रकाशित हुई है. जब ब्लैक होल की इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रिपल्शन गुरुत्वाकर्षण शक्ति से ज्यादा होगी, तब यह मान लिया जाएगा कि ब्लैक होल पूरी तरह से चार्ज है. (फोटोः पिक्साबे)

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आइंस्टीन की जनरल थ्योरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी के मुताबिक मास को ऊर्जा के बराबर माना जाता है. अगर ब्लैक होल के पास मौजूद ऊर्जा इलेक्ट्रिकल चार्जेस के साथ कॉम्बीनेशन बना ले तो उसका मास बढ़ जाएगा. यानी ब्लैक होल उसके अंदर मौजूद चार्ज्ड कणों के मास को ऊर्जा में बदल देगा. जिसे वापस इस्तेमाल किया जा सकता है. (फोटोः NASA)

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अगर किसी ब्लैक होल को 25 फीसदी चार्ज किया जाए तो वह किसी परमाणु बम की ऊर्जा से 250 गुना ज्यादा होगा. इतनी ऊर्जा का इस्तेमाल किसी भी तरह के ट्रांसपोर्टेशन या ग्रह को बिजली सप्लाई के लिए की जा सकती है. ब्लैक होल से ऊर्जा खींचने की प्रक्रिया को सुपररेडिएंस (Superradiance) नाम दिया गया है. यह स्पेस-टाइम की थ्योरी पर तय की गई है. (फोटोः NASA)

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झान फेंग ने कहा कि अगर हम पूरी तरह से चार्ज्ड ब्लैक होल से ऊर्जा हासिल करते हैं तो उसके होराइजन पर इलेक्ट्रॉन और पोजिट्रॉन क्रिएट होंगे. यानी इलेक्ट्रॉन होंगे जो अपोजिट चार्ज होंगे. अगर ब्लैक होल पॉजिटवली चार्ज्ड है तो उसके अंदर से पोजिट्रॉन बाहर तेजी से निकलेंगे. इन्हें ही कलेक्ट करके ऊर्जा को संरक्षित कर सकते हैं. (फोटोः NASA)

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इस समय तो किसी इंसान, देश या तकनीक में यह ताकत नहीं कि वह ब्लैक होल से ऊर्जा लेकर उसे सुरक्षित रख सके. यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के फिजिसिस्ट डैनिएल फैसियो कहते हैं कि यह क्वांटम मैकेनिक्स और ग्रैविटी को मिलाने की बात है. इतना आसान नहीं होगा यह कर पाना. इस काम में कई सौ साल लग जाएंगे. (फोटोः पिक्साबे)

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