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साइंस न्यूज़

क्या होता अगर ब्रह्मांड और समय की शुरुआत ही न होती?

What If Space-Time had no Start
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क्या होता अगर ब्रह्मांड और समय की शुरुआत या जन्म ही न होता? ऐसा माना जाता है कि हमारा ब्रह्मांड जिसमें हम हैं, धरती है, सूरज है, ग्रह हैं, आकाशगंगाएं हैं और न जाने क्या-क्या, वो हमेशा से मौजूद है. क्वांटम ग्रैविटी की एक नई थ्योरी ने ब्रह्मांड और समय के शुरुआत यानी जन्म और उसकी मौजूदगी पर से पर्दा हटाया है. आइए जानते हैं कि अगर ब्रह्मांड और समय न होता तो क्या होता? इन दोनों की शुरुआत न होती तो क्या होता? (फोटोः गेटी)

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इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के फिजिसिस्ट ब्रूनो बेंटो ने बताया कि असल जिंदगी में ऐसी कई चीजें और क्रियाएं हैं, जिन्हें अक्सर लोग साइंस फिक्शन या फिर फैंटेसी से जोड़ लेते हैं. ब्रूनो ने एक नई क्वांटम थ्योरी दी है, जिसे वो कॉजल सेट थ्योरी (Causal Set Theory) कहते हैं. इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे अंतरिक्ष (Space) और समय (Time) टूटकर बिखर जाते हैं, और फिर वो अंतरिक्ष-समय (Space-Time) बन जाते हैं. (फोटोः गेटी)

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ब्रूनो कहते हैं कि कुछ स्तरों पर अंतरिक्ष-समय का फंडामेंटल यूनिट है. हमने इसी यूनिट का उपयोग करके ब्रह्मांड (Universe) के जन्म यानी शुरुआत को जानने की कोशिश की. अंत में उन्हें जो पता चला वो हैरान करने वाला था. क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी वस्तु, समय या स्थिति के जन्म या शुरुआत का पता ही नहीं लग पाया. ब्रूनो की स्टडी में जो बात सामने आई वो हैरान कर देने वाली थी. यह विज्ञान की परिभाषाओं से एकदम अलग और बहुत दूर थी. (फोटोः गेटी)

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ब्रूनो की स्टडी में यह बात सामने आई कि हमारा ब्रह्मांड (Universe) अनंत समय से मौजूद है. लेकिन यह बिग बैंग (Big-Bang) के समय फिर से विकसित हुआ. क्वांटम ग्रैविटी (Quantum Gravity) आधुनिक भौतिक विज्ञान की सबसे बड़ी और उलझन से भरी पहेली है. ब्रह्मांड को लेकर दो सक्रिय थ्योरी हैं- पहली क्वांटम थ्योरी और दूसरी जनरल रिलेटिविटी. (फोटोः गेटी)

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क्वांटम थ्योरी में प्रकृति के चार फंडामेंटल फोर्सेस यानी मौलिक बल का जिक्र है. जिसमें से तीन बलों की परिभाषा तो स्पष्ट है. ये हैं- इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म, वीक फोर्स और स्ट्रॉन्ग फोर्स. दूसरी तरफ, जनरल रिलेटिविटी में ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण की पूर्ण परिभाषा है. लेकिन जनरल रिलेटिविटी को आजतक कभी भी संपूर्ण थ्योरी नहीं माना गया. इसे आधा-अधूरा माना जाता है. ब्रह्मांड के दो हिस्सों में जनरल रिलेटिविटी की गणित टूट जाती है. पहली ब्लैक होल्स और दूसरी ब्रह्मांड के शुरुआत की बात पर. (फोटोः गेटी)

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जनरल रिलेटिविटी को विफल बनाने वाले ब्लैक होल्स और ब्रह्मांड के शुरुआत की बात को सिंगुलैरिटीज (Singularities) कहते हैं.  क्योंकि ये दोनों ही अंतरिक्ष-समय के दो मजबूत बिंदू हैं. जहां पर फिजिक्स के सारे नियम फेल हो जाते हैं. इसलिए सिंगुलैरिटीज के रहस्य को सुलझाने के लिए भौतिक विज्ञानियों को ताकतवर गुरुत्वाकर्षण को समझने के लिए माइक्रोस्कोपिक स्तर की परिभाषा चाहिए होगी. वह भी पुख्ता सबूत के साथ. (फोटोः गेटी)

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क्वांटम थ्योरी और जनरल रिलेटिविटी के अलावा दो और प्रतियोगी थ्योरी हैं. ये हैं- स्ट्रिंग थ्योरी और लूप क्वांटम थ्योरी. अब एक नई थ्योरी ब्रूनो बेंटो ने दी है, जिसका नाम है- कॉजल सेट थ्योरी (Causal Set Theory). फिजिक्स की वर्तमान थ्योरी में अंतरिक्ष और समय अनंत हैं. ये एक ऐसा चिकना धागा बनाकर जुड़े हैं, जो सच्चाई से भी बहुत ऊपर की बात है. अगर ऐसी अनंत स्पेस-टाइम में दो मजबूत बिंदुओं एकसाथ लाया जा सके तो ब्रह्मांड के शुरुआत का पता चल सकता है. (फोटोः गेटी)

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कॉजल सेट थ्योरी (Causal Set Theory) में ब्रूनो बेंटों ने स्पेस-टाइम को तोड़ दिया है. वो इसे स्पेस-टाइम एटम कहते हैं. वो स्पेस और टाइम को एकसाथ रखने के लिए सीमाएं बताते हैं. कहते हैं कि इन्हें एकसाथ लाने की भी एक सीमा होनी चाहिए. ये सीमा इनके एटम के बराबर भी हो सकती है. इस जटिल थ्योरी को आइए अगली स्लाइड में समझते हैं.(फोटोः गेटी)

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इस न्यूज को पढ़ते समय आप स्क्रीन देख रहे हैं. सबकुछ बेहद सहज और लगातार होता दिख रहा है. अगर पढ़ते समय ही आपको इसी स्क्रीन को मैग्नीफाइंग ग्लास यानी आवर्धक लेंस से देखना पड़े तो आपको स्क्रीन के अंदर के पिक्सल दिखने लगेंगे. ये इस अंतरिक्ष यानी स्पेस को तोड़ देता है. बांट देता है. तब आपको यहां स्क्रीन पर मौजूद दो तस्वीरों को एकसाथ लाना यानी देखना कठिन होगा. क्योंकि आप स्क्रीन रूपी ब्रह्मांड को तोड़कर देख रहे होंगे. उसे समग्रता में देखेंगे तो आसान होगा. (फोटोः गेटी)

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ब्रूनो बेंटों ने कहा कि इस थ्योरी के मुताबिक आप स्पेस और टाइम को एकसाथ ही देख सकते हैं. अलग-अलग करके देखना मुश्किल है. यानी जबसे ब्रह्मांड है, तभी से समय है. या फिर आप इसका उलटा भी सोच सकते हैं. यानी आपने जो समय बिता लिया वो आपके भूतकाल था, इसे इस थ्योरी से देखेंगे तो उसका कोई मतलब ही नहीं निकलेगा. न ही भविष्य में आने वाले समय का. यह थ्योरी वर्तमान को दिखाती है. वर्तमान समय में ब्रह्मांड की मौजूदगी को बताती है. न ही उसका कोई भूत है न ही भविष्य है. (फोटोः गेटी)

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कॉजल सेट थ्योरी (Causal Set Theory) समय के पड़ाव की बात कहता है, जो कि बेहद भौतिक है. इसे किसी फिक्शन, सपने या फिर भविष्यवाणी की तरह नहीं देखा जा सकता. ब्रूनो कहते हैं कि लोगों के साथ यही दिक्कत है कि वो विज्ञान की परिभाषाओं और वर्तमान में दिख रही वस्तुओं या समयकाल को फिक्शन समझ लेते हैं या फिर उन्हें फैंटेसी से जोड़ लेते हैं. ब्रह्मांड और समय दोनों ही अनंत थे. (फोटोः गेटी)

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ब्रूनो बेंटों की यह कॉजल सेट थ्योरी (Causal Set Theory) हाल ही में प्री-प्रिंट डेटाबेस arXiv में प्रकाशित हुई है. जिसका पीयर रिव्यू अभी नहीं हुआ है. ब्रूनो कहते हैं कि मेरी थ्योरी यह कहती है कि बिग-बैंग जैसी कोई चीज नहीं हुई. ब्रह्मांड और समय अनंत थे और रहेंगे. इसलिए जब भूतकाल था ही नहीं, तो शुरुआत तो कभी भी मानी जा सकती है. यानी ब्रह्मांड और समय की शुरुआत तभी है...जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं. (फोटोः गेटी)

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