जैसे किसी ने जमीन पर पोल्का डॉट्स बना दिए हो. पर किसने और क्यों. जमीन पर इतने सारे गोले आए कहां से. इन्हें बनाया किसने. इन्हें वैज्ञानिक मिस्टीरियस फेयरी सर्कल (Mysterious Fairy Circles) बुलाते हैं. ये तीन महाद्वीपों के 15 देशों में 263 जगहों पर देखे गए हैं. अब इनका एटलस बनाया जा चुका है. (सभी फोटोः गेटी)
इन छल्लों को सबसे ज्यादा ये नामीबिया, साहेल, मैडागास्कर और मध्य-पश्चिम एशिया में देखा गया है. वैज्ञानिक इस बात को लेकर अब तक हैरान हैं कि ये बनते कैसे हैं? स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एलिकांटे के वैज्ञानिक एमिलियो गुइराडो ने कहा कि हमने इन छल्लों का वैश्विक नक्शा बना लिया है.
अलग-अलग देशों में एमिलियो की टीम ने इन छल्लों की स्टडी की. वहां की इकोलॉजी और बायोजियोग्राफी पर ध्यान दिया तो पता चला कि इन छल्लों के किनारे खास तरह की घास निकलती है. लेकिन ये सभी जगहों पर अलग-अलग तरह की होती हैं. इन छल्लों के बीच का हिस्सा एकदम सूखा होता है. आमतौर पर ये रेगिस्तानी इलाके में दिखते हैं.
कई बार ये छल्ले 39 फीट व्यास के होते हैं. हर छल्ला दूसरे से अलग आकार और तय दूरी पर होता है. एक भी छल्ला दूसरे पर न तो चढ़ता है, न ही छूता है. इन छल्लों की खोज सबसे पहले 2014 में हुई थी. तब इन्हें पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा रेगिस्तान में देखा गया था. पहले लगा कि इन छल्लों को दीमकों ने बनाया होगा. पर ऐसा था नहीं.
फिर एक थ्योरी ये भी आई की किसी अन्य कीड़े की कारस्तानी है. लेकिन जांच-पड़ताल में छल्लों के आसपास ऐसे किसी कीड़े की मौजूदगी नहीं थी, जो इस तरह का घेरा बनाता हो. फिर ये थ्योरी आई कि जमीन के नीचे जब पानी की कमी होती है, तब ऐसे छल्ले बनने लगते हैं. क्योंकि दूसरे पेड़-पौधे सूखने से पहले जहरीले पदार्थ जमीन में छोड़ते हैं.
लेकिन ये सारी थ्योरी साल 2021 में खत्म गलत मान ली गईं. क्योंकि ये छल्ले जहां भी देखे गए, वहां रहने लायक माहौल नहीं है. न ही वहां लोग रहते हैं. इसके बाद ड्रोन और सैटेलाइट की मदद से तस्वीरें ली गईं. निगरानी की गई. हर जगह ये छल्ले एक जैसे ही दिखे. लेकिन इनके बनने की वजह का पता नहीं चल पाया.
सैटेलाइट से हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें ली गईं. मशीन लर्निंग की मदद से सर्वे किया गया स्टडी की गई. तब जाकर पता चला कि पूरी दुनिया में 574,799 हेक्टेयर जमीन पर इस तरह के छल्ले बने हुए हैं. पूरी दुनिया में 263 जगहों पर इस तरह के छल्ले देखने को मिले हैं. जो कि वैज्ञानिकों को हैरान कर देते हैं.
ये छल्ले नामीबिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, साहेल, पश्चिमी सहारा, हॉर्न ऑफ अफ्रीका, मैडागास्कर, दक्षिण-पश्चिम एशिया, मध्य और दक्षिण-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में देखने को मिलते हैं. इन सभी जगहों पर फेयरी सर्किल दिखते हैं. बस इन छल्लों के चारों तरफ उगने वाली घासनुमा झाड़ी अलग-अलग है. वो एकदूसरे से नहीं मिलतीं.
ये छल्ले बेहद सूखे, रूखे, रेगिस्तानी माहौल में ही दिखते हैं. अगर बारिश वाली जगह पर भी दिखते हैं, तो जमीन सूखते ही ये फिर अपने रंग में आ जाते हैं. इन जगहों पर मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है. रेत ज्यादा होती है. लेकिन फेयरी सर्किल के चारों तरफ मजबूत झाड़ियां उगती हैं. इसकी स्टडी रिपोर्ट हाल ही में प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेस में छपी है.