रसोई में काम करने का मजा तभी आता है, जब यंत्रों का सही उपयोग हो. सही और जरूरी यंत्र हों. जिसमें ब्लेड की तरह तेज धार वाला चाकू भी शामिल है. स्टील समेत अलग-अलग धातुओं से चाकू बनाया जाता है. मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने लैब में ऐसा चाकू बनाया है, जो लकड़ी से बना है. यह साधारण लकड़ी नहीं है. यह सामान्य लकड़ी से 23 गुना ज्यादा हार्ड है. (फोटोः गेटी)
लैब में बनाया गया लकड़ी का यह चाकू सामान्य किचन वाले चाकुओं से तीन गुना ज्यादा तेज धार है. ये स्टील, सिरैमिक, प्लास्टिक के चाकुओं की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद है. इसे बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में पहले हार्ड वुड बनाया. इसे बनाने के लिए बासवुड (Basswood) को केमिकल ट्रीटमेंट, पानी से धुलना, ठंडे और गर्म दबाव दिया गया. इसके बाद इसे फूड ग्रेड मिनरल ऑयल में डूबा दिया गया. ताकि इस पर पानी का असर न हो. फिर इसे चाकू के आकार में काट दिया गया. (फोटोः पिक्साबे)
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर तेंग ली ने बताया कि बासवुड एक नर्म लकड़ी होती है, जिसका उपयोग कई तरह के कार्यों में किया जाता है. इन्हें वाद्य यंत्रों की बॉडी बनाई जाती है. इन्हें प्रोसेस करने के बाद इनकी परफॉर्मेंस बढ़ जाती है. जिस तकनीक से हमने यह चाकू बनाया है. उस तकनीक का उपयोग करके किसी भी लकड़ी को हार्ड वुड में बदला जा सकता है. (फोटोः पिक्साबे)
वैज्ञानिकों ने इस लकड़ी के चाकू से मांस, खीरा, गाजर, प्याज और टमाटर तक काट कर देखा. इसने स्टील के चाकुओं की तुलना में ज्यादा बारीकी से काम किया. भविष्य में हो सकता है कि लकड़ी के चाकू धातुओं के चाकुओं को किचन से बाहर निकाल फेंके. वॉशिंगटन के बेलिंगघम में रहने वाले चाकू एक्सपर्ट बॉब क्रेमर कहते हैं कि वो खुद इस लकड़ी के चाकू का परीक्षण करना चाहते हैं. जब तक मैं उससे नींबू या खीरा काटकर नहीं देखता, ये नहीं कह सकता कि वो बेहतर हैं. मैंने 30 साल चाकू बनाया है, लेकिन जब तक चाकू हाथ में नहीं आता, आपकी खासियत नहीं बता सकते. (फोटोः पिक्साबे)
Researchers created a hardened wood knife that is three-times sharper than commercial table knives made from steel and plastic. While it's climate friendly, not all knife enthusiasts are on board. https://t.co/28VGj9xTlI
— NYT Science (@NYTScience) April 18, 2022
1975 में छपी इनसाइक्लोपीडिया ऑफ कुकवेयर 'द कुक कैटालॉग' में लिखा है कि चाकू लाखों साल पहले बनने शुरु हो गये थे. इंसानों के पूर्वजों ने इन चाकुओं से जानवरों का शिकार किया. तब लकड़ी के आगे नुकीले पत्थर बांधे जाते थे. साल 1600 के करीब किचन के चाकू की खोज हुई. इसे लोहे से बनाया गया था. इसके बाद से लगातार चाकू बदलते रहे. आकार और धार दोनों में ही बदलाव आता रहा. (फोटोः पिक्साबे)
कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ साइंसेज के मुताबिक इन्हें डिनर टेबल पर हथियार के तौर पर भी उपयोग किया जाता था. इससे होने वाली हिंसा को रोकने के लिए 1669 में किंग लुई सोलहवें ने फ्रांस में सभी नुकीले चाकुओं को प्रतिबंधित कर दिया था. चाहे वह लोहे से बने हो या फिर किसी अन्य धातु से. इनका उपयोग करने वालो को कड़ी सजा देने का आदेश दिया गया था. (फोटोः पिक्साबे)
इंग्लैंड के शेफील्ड में चाकू बनाने वाली एक पुरानी कंपनी है, जो 1838 से चल रही है. इसका नाम है टेलर्स आई विटनेस लिमिटेड. इस कंपनी के डायरेक्टर एलेस्टेयर फिशर कहते हैं कि 18वीं सदी में जब चाकू का उत्पादन यूरोप में तेजी से बढ़ा तो वह नीचे की तरफ सरकते हुए एशिया तक पहुंचा. शेफील्ड यूरोपीय देशों में चाकुओं के निर्माण और सप्लाई के प्रसिद्ध है. इस शहर के आसपास प्राकृतिक स्रोतों के अपार भंडार है. लोहा, कोयला और लाइमस्टोन...इनकी वजह से चाकुओं का निर्माण आसान हो जाता है. (फोटोः पिक्साबे)