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नॉर्वे में मिला 3,000 साल पुराना जूता, बर्फ पिघलने से आया सामने 

नॉर्वे की पहाड़ी से पछले कई दशकों में हजारों ऐसी प्राचीन कलाकृतियां और चीजें मिली हैं जिनसे इस देश का इतिहास सामने आया. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये सब जल्द ही खत्म हो जाएगा. जानिए क्या है वजह.

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3000 साल पुराना है जूता (Photo: Vegard Vike, Cultural History Museum in Oslo)
3000 साल पुराना है जूता (Photo: Vegard Vike, Cultural History Museum in Oslo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जलवायु परिवर्तन से पिघल रही है बर्फ
  • बर्फ में संरक्षित चीजों को रिकवर करना ज़रूरी

नॉर्वे (Norway) में मिला दुनिया का सबसे पुराना जूता, करीब 3000 साल पुराना है. इसे कांस्य युग (Bronze Age) का बताया जा रहा है. नार्वे की साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (Norwegian University of Science and Technology- NTNU) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जूता उन हजारों प्राचीन कलाकृतियों में से एक है, जो पिछले दो दशकों में यहां पहाड़ियों पर जमी बर्फ के पिघलने पर पाई गई थीं. 

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यह प्राचीन जूता, असल में 2007 में दक्षिणी नॉर्वे के जोतुनहेमेन (Jotunheimen) के पहाड़ी इलाके से खोजा गया था. ये चमड़े का छोटा जूता किसी महिला या युवा का हो सकता है. इस जूते के साथ कई तीर और एक लकड़ी के कुदाल भी मिला था, जिससे ये पता चलता है कि यह इलाका शिकार का एक अहम मैदान हुआ करता था. इस जूते को खोजने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह जूता करीब 1100 ईसा पूर्व का है, जो नॉर्वे का सबसे पुराना जूता हो सकता है.

वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

एसिडिक मिट्टी में या विशाल ग्लेशियरों के नीचे दबी हुई चीजों से उलट, नॉर्वे की पहाड़ियों पर बर्फ के पैच से मिली चीजों की स्थिति, हजारों सालों के बाद भी बेहतर है. यहां हथियार, कपड़े, पौधे और जानवरों के अवशेष सभी बर्फ से निकले हैं, जिससे नॉर्वे का हजारों सालों का इतिहास सामने आया है. लेकिन यह नई रिपोर्ट कहती है कि अब जलवायु परिवर्तन ये सब खत्म कर सकता है.

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 नॉर्वे की पहाड़ों की बर्फ से कई हथियार भी मिल चुके हैं (Photo: Åge Hojem, NTNU University Museum)

कुछ ही दशकों में, नॉर्वे के बर्फ के बड़े हिस्से पिघलना शुरू हो गए हैं. एनटीएनयू यूनिवर्सिटी म्यूजियम ( NTNU University Museum) के एक पुरातत्वविद् और एसोसिएट प्रोफेसर बिरगित स्कार (Birgitte Skar) का कहना है कि 2020 में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर एक सर्वे किया गया था, जिससे पता चलता है कि 10 चुने हुए बर्फ के पैच में से 40 प्रतिशत से ज्यादा पिघल गए हैं. 

जलवायु परिवर्तन से खराब हो सकती हैं प्राचीन चीजें

बर्फ के पैच पहाड़ों की ऊंचाई पर बनते हैं, गर्मियों में ये बर्फ पूरी तरह से पिघलती नहीं हैं, जबकि ग्लेशियर से उलट, बर्फ के ये पैच हिलते नहीं हैं, इसलिए बर्फ के पैच में दबी चीजें हजारों सालों तक सही रहती हैं. जब बर्फ पिघलना शुरू होती है, तो वे चीजें दिखाई देती हैं. ये इतने सालों बाद भी पहले की तरह ही संरक्षित रहती हैं. हालांकि, अब वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ पिघलने के तुरंत बाद ही अगर इन चीजों को रिकवर नहीं किया गया, तो इन कलाकृतियों को खोने का खतरा है.

 

रिपोर्ट के लेखकों को फिक्र है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से अनगिनत सांस्कृतिक कलाकृतियां, रिकवर होने से पहले ही गायब हो सकती हैं. नॉर्वेजियन वाटर रिसोर्सेज एंड एनर्जी डायरेक्टोरेट की 2022 की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि 2006 से 364 वर्ग किलोमीटर बर्फ का पैच पिघल गया है. यह हिस्सा न्यूयॉर्क शहर के आकार का लगभग आधा है. अगर इन पैच से कलाकृतियों को जल्द ही निकाला नहीं गया तो बाहर आने के बाद उनके खराब होने, या बर्बाद हो जाने का खतरा है.

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