अंटार्कटिका (Antarctica) के क्वीन मॉड लैंड (Queen Maud Land) में मौजूद वॉलनमजेलेट माउंटेन पर वैज्ञानिकों को 4.30 लाख साल पुराने एस्टेरॉयड के टुकड़े मिले हैं. यानी एस्टेरॉयड इतने ही साल पहले अंटार्कटिका से टकराया था. वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार एस्टेरॉयड करीब 100 मीटर व्यास का था. जिसकी टक्कर से भयानक विस्फोट हुआ और उसके टुकड़े पूरे बर्फीले महाद्वीप पर फैल गए.
वैज्ञानिकों को कहना है कि इस तरह के टुकड़ों की स्टडी करके हम यह पता कर सकते हैं कि सौर मंडल कब और कैसे बना. साथ ही उस समय की धरती की स्थिति क्या थी. इस एस्टेरॉयड के टुकड़ों की स्टडी करने वाली टीम के एक साइंटिस्ट मैथ्यू जेंग ने बताया कि अगर धरती के वायुमंडल में या उससे नीचे किसी छोटे एस्टेरॉयड या उल्कापिंड या धूमकेतु में विस्फोट होता है तो वह किसी परमाणु बम के विस्फोट से कम नहीं होता.
वायुमंडल में आने के बाद एस्टेरॉयड्स में विस्फोट होना जायज है. उनकी टक्कर से कितना बड़ा क्रेटर बनेगा या कितना नुकसान होगा इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता. यह उसके पत्थरों की रसायनिक जांच से पता चलता है. अंटार्कटिका में जो एस्टेरॉयड मिला है उसमें निकल की मात्रा ज्यादा है. साथ ही ऑक्सीजन के पार्टिकल्स भी मिले हैं. इसी की वजह से वैज्ञानिक यह पता कर पाए कि यह एस्टेरॉयड कब आकर अंटार्कटिका से टकराया होगा.
अंटार्कटिका में मिला सबसे बड़ा एस्टेरॉयड का टुकड़ा 7.6 किलोग्राम वजनी है. अब तक अंटार्कटिका से एस्टेरॉयड और अंतरिक्ष से आने वाले अन्य पत्थरों के 45 हजार टुकड़े मिले हैं. लेकिन यह सबसे बड़ा पत्थर था. इस पत्थर को रॉयल बेल्जियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल साइंसेस में भेज दिया गया है. ताकि उसकी और गहरी स्टडी हो सके. अंटार्कटिका के ऊपर आसमान साफ रहता है. इसलिए वहां पर उल्कापिंडों की बारिश या धूमकेतुओं को देखना आसान होता है.
Scientists Have Just Found 430,000-Year-Old Asteroid In Antarcticahttps://t.co/p6PXLkH1IR
— Amazing Astronomy (@MAstronomers) January 17, 2023
अंटार्कटिका में अंतरिक्ष से आने वाले पत्थरों का गिरना भी जारी ही रहता है. इन उल्कापिंडों पर उस सैटेलाइट से नजर रखी जाती है, जो अंटार्कटिका के बर्फ के बहाव, तापमान आदि पर नजर रखते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एस्टेरॉयड के पत्थरों को खोजना आसान हो जाता है. एआई की मदद से 80 फीसदी सटीकता के सआथ ऐसे पत्थरों को खोजा जा सकता है.