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Sea Scorpion: विशालकाय समुद्री बिच्छू की प्रजाति मिली, 25 करोड़ साल पहले धरती पर था इसका राज

एक बहुत बड़े और प्राचीन समुद्री बिच्छू की प्रजाति का पता चला है. यह करीब 25.20 करोड़ साल पहले समुद्र में राज करता था. इतना ही नहीं, यह ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में मौजूद नदियों और झीलों में भी पाया जाता था. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक विशालकाय शैतान था. शुक्र है कि अब यह विलुप्त हो चुका है.

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ये है विशालकाय समुद्री बिच्छू की तस्वीर, जो जीवाश्म के अध्ययन के बाद बनाई गई है. (फोटोः क्वींसलैंड म्यूजियम)
ये है विशालकाय समुद्री बिच्छू की तस्वीर, जो जीवाश्म के अध्ययन के बाद बनाई गई है. (फोटोः क्वींसलैंड म्यूजियम)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कई सालों से खोजा जा रहा था इसकी उत्पत्ति का राज
  • वर्तमान बिच्छुओं-मकड़ियों से सीधा संबंध, पर प्रजाति विलुप्त
  • वुडवार्डोप्टेरस फ्रीमैनोरम है इस समुद्री बिच्छू का नाम

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड म्यूजियम में एक समुद्री बिच्छू का जीवाश्म रखा था. जिसकी स्टडी कई सालों से चल रही थी. अब जाकर पता चला है कि यह एक विशालकाय प्राचीन शैतान था, जिसने 25.2 करोड़ साल पहले नदियों, झीलों और समुद्र में राज किया था. इसका नाम हैं वुडवार्डोप्टेरस फ्रीमैनोरम (Woodwardopterus freemanorum). इसकी ज्यादातर संख्या उस समय ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के आसपास थी. 

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असल में इस विशालकाय प्राचीन बिच्छू का जीवाश्म साल 2013 से क्वींसलैंड म्यूजियम में था. इस पर लगातार खोज चल रही थी. इसके बारे में जानकारियां जमा की जा रही थी. दुनियाभर में मौजूद वर्तमान बिच्छुओं की प्रजातियों से इसकी तुलना की जा रही थी. अन्य प्राचीन बिच्छुओं से भी इसकी समानताएं मिलाई जा रही थीं. लेकिन इस पर ज्यादा काम हुआ कोरोना लॉकडाउन के समय जब म्यूजियम आम लोगों के लिए बंद था. 

कुछ ऐसा दिखता है प्राचीन विशालकाय बिच्छू का जीवाश्म. (फोटोः गेटी)
कुछ ऐसा दिखता है प्राचीन विशालकाय बिच्छू का जीवाश्म. (फोटोः गेटी)

म्यूजियम में जियोसाइंसेस के क्यूरेटर डॉ. एंड्र्यू रोजेफेल्डस ने कहा कि जब इसका टूटा-फूटा जीवाश्म हमारे कलेक्शन में आया तो हम पहले उसे जोड़ने में लग गए. उसके बाद हमने उसे करीब से देखकर स्टडी करने का फैसला किया. हमने अपने पुराने जीवाश्मों के साथ उसे मिलाने का प्रयास किया. फिर दुनिया में मौजूद प्रजातियों से मिलाया. उसकी तुलना की. यह काम काफी ज्यादा कठिन था. क्योंकि किसी जीवाश्म से किसी जीव के बारे में पूरी जानकारी जुटाने में समय लगता है. 

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समुद्री बिच्छू यानी Sea Scorpions को वैज्ञानिक भाषा में यूरिपटेरिड्स (Eurypterids) कहा जाता है. यह अकशेरुकीय (Invertebrates) की विलुप्त प्रजाति है. लेकिन इनका सीधा संबंध आज के जमीनी बिच्छुओं और मकड़ियों से हैं. ऐसा माना जाता है कि ये विशालकाय जीव करोड़ों साल पहले ही खत्म हो गए. वह भी तब जब डायनासोर भी नहीं थे. ये समुद्र, नदी और झीलों में रहते थे. 

BBC की खबर के अनुसार वैज्ञानिकों का मानना है कि वुडवार्डोप्टेरस फ्रीमैनोरम (Woodwardopterus freemanorum) पूरी दुनिया में अपने जैसा इकलौता जीवाश्म है. डॉ. एंड्र्यू ने बताया कि भारी रिसर्च करने के बाद पता चला कि यह धरती पर रहने वाला आखिरी यूरिपटेरिड जीव था. इसके बाद धरती से इस जीव की प्रजाति ही खत्म हो गई. इसका खात्मा कैसे हुआ इसका खुलासा फिलहाल नहीं हो पाया है. 

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