अंटार्कटिका (Antarctica) में वैज्ञानिकों ने ऐसे बैक्टीरिया की खोज की है जिनके जीन्स से उन्हें प्राकृतिक एंटीबायोटिक और रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है. ये जीन्स उन्हें ध्रुवीय क्षेत्रों से बाहर फैलने की क्षमता भी देते हैं.
हाल ही में एक शोध किया गया जिसे साइंस ऑफ द टोटल इनवॉयरमेंट (Science of the Total Environment) जर्नल में प्रकाशित किया गया. चिली यूनिवर्सिटी (University of Chile) के शोधकर्ता एंड्रेस मार्कोलेट (Andres Marcoleta) का कहना है कि चरम परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाले ये 'सुपर पॉवर' बैक्टीरिया में मोबाइल डीएनए (mobile DNA) फ्रैग्मेंट्स होते हैं, जो दूसरे बैक्टीरिया में आसानी से ट्रांसफर हो सकते हैं.
एंड्रेस मार्कोलेट कहते हैं कि बर्फ पिघलने से अंटार्कटिक प्रायद्वीप सबसे ज्यादा प्रभावित ध्रुवीय क्षेत्रों में से एक है. यहां की मिट्टी में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं. और उनमें से कुछ में पैतृक जीन की संभावना है जो एंटीबायोटिक दवाओं की तरह प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं.
चिली यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 2017 से 2019 तक अंटार्कटिक प्रायद्वीप से कई नमूने इकट्ठा किए. शोधकर्ताओं ने पाया कि स्यूडोमोनास बैक्टीरिया (Pseudomonas bacteria), अंटार्कटिक प्रायद्वीप में प्रमुख बैक्टीरिया समूहों में से एक है जो रोगजनक नहीं हैं. लेकिन 'रसिस्टेंस जीन' का स्रोत हो सकते हैं जिन्हें तांबे, क्लोरीन या क्वाटरनरी अमोनियम जैसे सामान्य कीटाणुनाशक रोक नहीं सकते.
Bacteria in Antarctica have been discovered with genes that give them natural antibiotic and antimicrobial resistance and have the potential to spread out of the polar regions, according to scientists in Chile. https://t.co/HtEsbUDKXB
— Reuters Science News (@ReutersScience) May 25, 2022
हालांकि, उन्होंने एक दूसरे बैक्टीरिया पर भी शोध किया है, जिसका नाम है पोलारोमोनस बैक्टीरिया (Polaromonas bacteria). इस बैक्टीरिया में बीटा-लैक्टम टाइप के एंटीबायोटिक्स को निष्क्रिय करने की क्षमता है, जो विभिन्न संक्रमणों के उपचार के लिए ज़रूरी है.
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