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प्राचीन शिकारी 'बीयर डॉग' मिला, बेहद भयावह, खतरनाक और 320KG वजनी था

वैज्ञानिकों को एक ऐसे कुत्ते का अवशेष मिला है, जो 320KG वजनी था. इसे वैज्ञानिक 'Bear Dog' बुला रहे हैं. अपने समय का भयानक शिकारी था. 75 लाख साल पहले यह यूरोपीय देशों में पाया जाता था. इसके अवशेषों की खोज से वैज्ञानिकों को आधा कुत्ता और आधा भालू की प्रजाति के अध्ययन का और मौका मिला है.

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320KG Bear Dog: ये है उस प्राचीन कुत्ते का काल्पनिक चित्र जो हड्डियों के आकार के आधार पर बनाया गया है. (फोटोः डेनी नवारा)
320KG Bear Dog: ये है उस प्राचीन कुत्ते का काल्पनिक चित्र जो हड्डियों के आकार के आधार पर बनाया गया है. (फोटोः डेनी नवारा)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 75 लाख साल पहले हुआ था विलुप्त
  • जबड़े से पता चला कि ये नई प्रजाति है

75 लाख साल पहले यूरोपीय देशों में एक ऐसा मांसाहारी शिकारी कुत्ता घूमता था, जो भालू के आकार का होता था. इसका वजन करीब 320 किलोग्राम था. अब यह प्रजाति विलुप्त हो चुकी है. लेकिन इसका अवशेष मिलना पुरा-जीव विज्ञानियों के लिए खुशी की बात है. क्योंकि उन्हें इस प्रजाति के बार में ज्यादा अध्ययन करने का मौका मिलेगा. आधा कुत्ता और आधा भालू जैसे इस जीव के इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी. 

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बीयर डॉग (Bear Dog) नाम से आमतौर पर जाना जाने वाला यह जीव असल में द टारटारोसियोन (The Tartarocyon) के नाम से जाना जाता था. इसके अवशेषों की खोज वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया है. जिसके लीडर है स्विट्जरलैंड के बेसल स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के बास्टियन मेनेकार्ट. 

ये है बीयर डॉग का जबड़ा, जिसमें आपको कुछ दांत भी दिख जाएंगे. (फोटोः डेनी नवारा)
ये है बीयर डॉग का जबड़ा जिसकी जांच के बाद उसके आकार और वजन का पता चला. (फोटोः डेनी नवारा)

मजबूत जबड़ा, धारदार दांत, गजब का शिकारी

इस प्राचीन शिकारी को नई प्रजाति का बीयर डॉग बताया जा रहा है. यह यूरोप में 3.6 करोड़ साल से 75 लाख साल तक था. उसके बाद इसकी प्रजाति खत्म हो गई. पुरा-जीव विज्ञानियों यानी पैलियोटोंलॉजिस्ट ने कहा कि इसके जबड़े की जांच से पता चला कि इसकी उम्र 1.28 करोड़ से 1.20 करोड़ साल के बीच थी. इसके जबड़े की हड्डियों में समुद्री खनिजों की परत चढ़ी हुई थी. परत हटाने पर पता चला कि इसके दांत बेहद नुकीले और धारदार थे. जबड़ा काफी ज्यादा मजबूत था. ये अपने से बड़े जानवरों का भी शिकार कर लेता था. 

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माइथोलॉजिकल जीव टारटारो से लिया गया नाम

बीयर डॉग द टारटारोसियोन सामान्य एंफीसियोनिडे (Amphicyonidae) का उदाहरण नहीं है. इसके जबड़े में मौजूद चौथा लोअर प्रीमोलर दांत बाकी एंफीसियोनिडे जीवों से अलग है. इस दांत की जांच से किसी भी जीव की प्रजाति और जेनेरा समझने में आसानी होती है. इसका नाम बास्क माइथोलॉजी (Basque Mythology) में बताए गए एक आंख वाले विशालकाय जीव टारटारो (Tartaro) के नाम पर रखा गया है. 

किसी भी चीज के पीछे से घात लगाकर करता था हमला. (फोटोः डेनी नवारा)
किसी भी चीज के पीछे से घात लगाकर करता था हमला. (फोटोः डेनी नवारा)

जीनस का नाम फ्लोरियल सोल रखा गया है

टारटारो के ज्यादातर अवशेष बीयर्न (Bearn) में मिले हैं. नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के जॉन-फ्रांस्वा लेस्पोर्ट और एंटनी हीट्ज दुनिया के प्रसिद्ध पुरा-जीव विज्ञानियों ने मिलकर इस नए जीनस का नाम फ्लोरियल सोल (Floreal Sole) रखा है. बीयर डॉग उन मांसाहारी जीवों से समानता रखते हैं जो उस समय आकार में बड़े होते थे. जैसे- कुत्ते, बिल्ली, सील और बैजर्स. 

ये शिकारी बीयर डॉग 2.30 करोड़ साल से लेकर 53 लाख साल तक घूमते रहे. इसकी प्रजाति में काफी ज्यादा विभिन्नताएं थीं. इनका वजन 9 किलोग्राम से लेकर 320 किलोग्राम तक जाता था. टारटारोसियोन का वजन आमतौर पर 200 किलोग्राम होता था. मायोसीन (Miocence) के समय यूरोप का आखिरी एंफीसियोनिडे खत्म हो गया था. 

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