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होगी चांद पर जीत... चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग के लिए ये हैं 3 सबसे बड़ी चुनौतियां

ISRO स्पेस में इतिहास रचने से अब कुछ ही कदम दूर है. चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल आज शाम 5:30 से 6:30 बजे के बीच चांद के उस हिस्से को छूने वाला है, जिसे अब तक किसी ने नहीं देखा. चंद्रयान 3 के लिए सॉफ्ट लैंडिंग की तीन सबसे बड़ी चुनौतियां भी हैं. भारत सहित पूरी दुनिया को आज चंद्रयान 3 की लैंडिंग का बेसब्री से इंतजार है.

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ये है चंद्रयान-3 का लैंडर, जिसके स्लाइडिंग प्लेटफॉर्म से निकल रहा है रोवर. (प्रतीकात्मक फोटोः IADN)
ये है चंद्रयान-3 का लैंडर, जिसके स्लाइडिंग प्लेटफॉर्म से निकल रहा है रोवर. (प्रतीकात्मक फोटोः IADN)

आज की तारीख भारत के लिए ऐतिहासिक होने वाली है. चंद्रयान-3 का लैंडर आज शाम 5 बजकर 45 मिनट पर चांद की ओर बढ़ना शुरू करेगा और शाम 6 बजकर 4 मिनट पर इसरो उसकी सॉफ्ट लैंडिंग कराएगा. चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो रोवर प्रज्ञान उससे बाहर आएगा और चांद पर चहलकदमी कर पानी और वहां के वातावरण के बारे में जानकारी देगा. चांद पर पानी या बर्फ के अलावा कई दूसरे प्राकृतिक संसाधन भी मिल सकते हैं, लेकिन चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कई चुनौतियां हैं.

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इसरो का दावा है कि सुरक्षित लैंडिंग के पुख्ता इंतजाम हैं. इसरो की उम्मीदें अपनी जगह हैं, लेकिन चंद्रयान-3 से करीब एक महीने बाद निकला रूस का लूना-25 चांद पर क्रैश कर गया. करीब 47 साल बाद मिशन मून पर निकले रूस को ही नहीं, पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को झटका लगा.

लूना-25 के लॉन्च पर इसरो ने रूस को बधाई भी दी थी. वहीं भारत का चंद्रयान 3 अगला इम्तिहान देने वाला है. भले ही रेस में अब सिर्फ भारत रह गया है, लेकिन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर किसी भी देश को अब तक सॉफ्ट लैंडिंग में कामयाबी नहीं मिली है, लिहाजा भारत के लिए भी चुनौती बड़ी है.

चंद्रयान 3 के लिए ये हैं तीन अहम चुनौतियां...

  • पहली चुनौती है लैंडर की रफ्तार को नियंत्रित रखना. पिछली बार अधिक रफ्तार की वजह से लैंडर क्रैश कर गया था.
  • इसके अलावा लैंडर चंद्रयान-3 के लिए दूसरी चुनौती यह है कि लैंडर उतरते समय सीधा रहे.
  • वहीं लैंडर के लिए तीसरी चुनौती है कि उसे उसी जगह पर उतारना, जो इसरो ने चुन रखी है. पिछली बार ऊबड़-खाबड़ जगह से टकराने की वजह से चंद्रयान-2 क्रैश कर गया था.

मिशन चंद्रयान-3 से जुड़ी स्पेशल कवरेज देखने के लिए यहां क्लिक करें 

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Chandrayaan-3 Live Tracker

ISRO लगातार Chandrayaan-3 की गति और उसकी दिशा पर नजर बनाए हुए है. इसके लिए Live Tracker के जरिए आप देख सकते हैं कि Chandrayaan-3 अंतरिक्ष में इस समय कहां पर है.

रूस का लूना-25 मिशन क्यों हुआ फेल, बताई गई ये वजह

सवाल ये है कि रूस का लूना-25 क्यों क्रैश कर गया? रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमोस के मुताबिक, लूना-25 को चांद के सबसे करीबी ऑर्बिट में ले जाना था, लेकिन वो बेकाबू होकर उस ऑर्बिट से बाहर चला गया.

How to Watch Chandrayaan-3 Landing Live Streaming

चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण 23 अगस्त 2023 की शाम 5 बजकर 27 मिनट से शुरू हो जाएगा. इसे ISRO की वेबसाइट...ISRO की वेबसाइट...  isro.gov.in, YouTube पर... youtube.com/watch?v=DLA_64yz8Ss, Facebook पर... Facebook https://facebook.com/ISRO या फिर डीडी नेशनल टीवी चैनल पर देखा जा सकता है.

बताया जा रहा है कि रूसी एजेंसी रॉसकॉसमॉस के कंप्यूटर में ऐसी गड़बड़ी आ गई, जिसके चलते लूना 25 से संपर्क टूट गया और वो वैसे ही क्रैश हो गया, जैसे 2019 में भारत का चंद्रयान-2 क्रैश कर गया था.

लूना-25 क्रैश के होने के बाद रूस की अंतरिक्ष एजेंसी ने बयान जारी कर बताया कि लैंडर गलत ऑर्बिट में जा पहुंचा और फिर चांद की सतह से टकराने के बाद उसका वजूद खत्म हो गया. अगर लूना-25 क्रैश नहीं होता तो आज या कल रूस ऐसा करने वाला पहला देश बन सकता था.

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Chandrayaan 3 Landing, ISRO

दक्षिणी ध्रुव पर अमेरिका, रूस, चीन भी नहीं उतार सके अपना अंतरक्षि यान

अगर रूस की नाकामी को पीछे छोड़ते हुए इसरो ने लैंडर विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान को चांद पर उतार लिया तो भारत इतिहास रच देगा. अमेरिका, रूस, चीन के वैज्ञानिक भी चट्टानों और खाई वाले चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना अंतरिक्ष यान नहीं उतार सके हैं.

14 दिन तक मिशन को अंजाम देगा चंद्रयान 3

लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो रोवर प्रज्ञान उससे बाहर आएगा और वहां 500 मीटर तक के इलाके में चहलकदमी कर पानी और वहां के वातावरण के बारे में इसरो को बताएगा. आज लैंडिंग के साथ ही लैंडर विक्रम अपना काम शुरू कर देगा. चांद पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. इस वजह से चंद्रयान-3 मिशन 14 दिनों तक चांद की सतह पर रिसर्च करेगा.

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