चेन्नई में कभी एक दलदली जमीन थी. जो अब दलदली नहीं रही. इसके एक तरफ बड़ी सी झील है. जमीन पर शहर का कचरा फेंका जाने लगा. आसपास के इलाकों में कॉलोनियां बन गईं. लोग रहने लगे. नतीजा ये हुआ कि झील का रंग अब बदलकर गुलाबी हो चुका है. यहां से भयानक बदबू आती है. स्थानीय लोग, पर्यावरणविद और वैज्ञानिक परेशान हैं.
यह झील पल्लीकरानाई (Pallikaranai) इलाके में है. दशकों तक इस दलदली जमीन पर कचरे को बिना अलग-अलग किए फेंका जाता था. यानी बायोवेस्ट, मेडिकल वेस्ट, केमिकल वेस्ट, घर का कचरा इन्हें अलग नहीं किया जाता था. वो यहां पर जमा होते रहे. पर्यावरण के साथ रसायनिक प्रक्रियाएं करते रहे. अब इस डंपयार्ड से इतनी मीथेन निकलती है कि हाल ही में यहां लगी आग को बुझाने में स्थानीय प्रशासन की हालत खराब हो गई थी.
प्राथमिक जांच में साइनोबैक्टीरिया का अंदेशा
अब स्थिति ऐसी है कि पल्लीकरानाई में स्थित यह झील गुलाबी हो चुकी है. स्थानीय लोग तो परेशान हैं ही, साथ ही पर्यावरणविद भी चिंतित हैं. क्योंकि उनके अनुसार इस झील में भारी मात्रा में एल्गी पनप (Algal Bloom) रही है. खासतौर से साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria). यह बैक्टीरिया कम ऑक्सीजन वाले जलीय स्रोतों में पनपता है.
पानी में लगातार घुल रही है मीथेन गैस
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने इस झील का सैंपल लिया है. जांच चल रही है. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस झील में ऑक्सीजन की मात्रा इसलिए कम हुई है क्योंकि कचरा डंपयार्ड से मीथेन गैस पानी के अंदर घुल रही है. इसी वजह से साइनोबैक्टीरिया विकसित हो रहा है. झील का रंग गुलाबी हो गया है.
साल भर में दूसरी बार हुई है ये घटना
किसी जलीय स्रोत का रंग गुलाबी तभी होता है जब उसमें साइनोबैक्टीरिया की प्रजाति फाइकोइरीथ्रिन (Phycoerythrin) की मात्रा बढ़ने लगती है. इस प्रजाति के बैक्टीरिया की खासियत होती है कि वो जब विकसित होता है तो अपने आसपास के इलाके को लाल या इससे जुड़े रंगों में बदल देता है. प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक इस साल इस झील का रंग दूसरी बार गुलाबी हुआ है.