पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी SUPARCO ने चीन के लॉन्ग मार्च रॉकेट से Paksat-MM1R की लॉन्चिंग कराई. पाकिस्तान के पास रॉकेट नहीं है. न ही लॉन्चिंग फैसिलिटी. चीन की मदद से ही पाकिस्तान अपने सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भिजवाता है. अभी जो सैटेलाइट छोड़ा गया है, वो कम्यूनिकेशन, टीवी ब्रॉडकास्ट, ब्रॉडबैंड इंटरनेट के लिए है.
इस सैटेलाइट में 48 ट्रॉन्सपोंडर्स हैं. यह सैटेलाइट 15 साल तक अंतरिक्ष में काम करेगा. लेकिन हैरानी इस बात की है कि जो पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी ISRO से 8 साल पहले बनी थी, उसने अब तक सिर्फ 10 सैटेलाइट ही लॉन्च किए हैं. आइए समझते हैं कि पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक कोई बड़ा काम किया है या नहीं.
पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी का दुनिया में कहीं कोई नाम नहीं है. न ही उसके लॉन्च की कोई खबर आती है. जबकि, भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में एक है. दक्षिण एशिया में तो नंबर एक.
चीन कर रहा है पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी को जिंदा
पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी को जिंदा करने के लिए चीन ने 800 करोड़ रुपए की मदद की थी. इस मदद के साथ ही चीन के वैज्ञानिक पाकिस्तानी साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स को ट्रेनिंग भी देंगे. अब देखना ये है कि कहीं चीन पाकिस्तान को मोहरा बनाकर भारत या अमेरिका जैसे देशों के लिए कोई नई चाल चल रहा हो.
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दक्षिण एशिया में 8 देश, स्पेस साइंस में भारत अग्रणी
दक्षिण एशिया में आठ देश हैं. भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में सिर्फ चीन ही थोड़ा बहुत प्रयास कर रहा है. पाकिस्तान से भारत इतना आगे है कि उसे भारत की बराबरी करने में कई दशक लग जाएंगे.
भले ही वह चीन से मदद ले या किसी और देश से. चीन हो या पाकिस्तान... अंतरिक्ष विज्ञान में ये भारत के आगे कहीं नहीं टिकते. इस वक्त भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में अभी दुनिया का सबसे भरोसेमंद संगठन है.
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PAK स्पेस एजेंसी पहले बनी लेकिन आज तक कुछ कर नहीं पाई
अंतरिक्ष के क्षेत्र में PAK ने 16 सितंबर 1961 में स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (SUPARCO) बनाया. वह भी भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के आधिकारिक गठन से करीब आठ साल पहले. लेकिन आज वो रेस में ही नहीं है. इसरो की स्थापना 1969 में हुई थी.
उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का नाम इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च था. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाई. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत के सामने पाकिस्तान का कोई वजूद ही नहीं है.