scorecardresearch
 

Chang'e-6: जिसे कहा जा रहा है पाकिस्तान का 'चंद्रयान', भारत में ऐसे सैटेलाइट्स बच्चे बनाते हैं

China अगले साल की पहली छमाही में अपना मून मिशन भेजने वाला है. इसमें पाकिस्तान अपनी तरफ से एक क्यूबसैट भेज रहा है. यानी छोटे फुटबॉल के आकार का सैटेलाइट, जो भारत में स्कूल के बच्चे बना लेते हैं. चीन के लूनर मिशन का नाम है Chang'e-6 है. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान के इस क्यूबसैट से वो क्या करेगा?

Advertisement
X
पाकिस्तान जिस आकार का सैटेलाइट छोड़ने जा रहा है, भारत ऐसे 200 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है. (फोटोः गेटी)
पाकिस्तान जिस आकार का सैटेलाइट छोड़ने जा रहा है, भारत ऐसे 200 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है. (फोटोः गेटी)

चीन की स्पेस एजेंसी CNSA अगले साल अपना लूनर मिशन Chang'e-6 भेजने वाली है. इस लूनर लैंडर और सैंपल रिटर्न मिशन में पाकिस्तान भी शामिल है. पाकिस्तान के इस सैटेलाइट का नाम आइसक्यूब-क्यू (ICECUBE-Q) है. यह एक क्यूबसैट है. यानी एक छोटे फुटबॉल के आकार का. 

Advertisement

हैरानी इस बात की है कि चीन की मदद से अपना सैटेलाइट लॉन्च करने वाला पाकिस्तान कुछ और बड़ा प्लान कर सकता था. भारत में क्यूबसैट स्कूलों और कॉलेजों के बच्चे बनाते हैं. क्यूबसैट आमतौर पर छह इंच से लेकर एक-डेढ़ फीट की चौड़ाई, लंबाई और ऊंचाई वाला हो सकता है. भारत तो अब तक करीब 200 क्यूबसैट लॉन्च कर चुका है. 

पाकिस्तान का यह क्यूबसैट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के उस हिस्से में जाएगा जहां पर अंधेरा रहता है. वहां पर यह चांद की सतह पर बर्फ की खोज करेगा. पाकिस्तान के साथ इस मिशन में कई देशों के पेलोड्स जाएंगे. फ्रांस का DORN रेडॉन डिटेक्शन इंस्ट्रूमेंट, यूरोपियन स्पेस एजेंसी निगेटिव आयन डिटेक्टर (NILS) और इटली का लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर (INRRI). 

Pakistan Moon Mission

कहां जा रहा है पाकिस्तानी क्यूबसैट? 

चांगई-6 मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के अंधेरे वाले हिस्से में जा रहा है. ये वहीं से मिट्टी और पत्थरों के सैंपल लेकर आएगा. अभी तक जितने भी चांद के सैंपल आए हैं. वो नीयर साइड यानी जो हिस्सा हमें दिखता है, वहां से लाए गए हैं. अंधेरे वाला फार साइड का हिस्सा प्राचीन है. वहां पर ही एटकेन बेसिन (Aitken Basin) है. यहां की साइंटिफिक वैल्यु बहुत है. चांगई-6 अपने साथ कम से कम 2 किलोग्राम सैंपल लेकर आएगा. इसके लिए वह चांद की सतह पर 6.6 फीट की गहराई तक छेद करेगा.  

Advertisement

कैसा है चीन और पाकिस्तान का मिशन? 

संभावित लॉन्चः मई 2024
रॉकेटः लॉन्ग मार्च 5 
लॉन्च साइटः वेनचांग
लॉन्च के समय वजनः 8200 किलोग्राम
लैंडर का वजनः 3200 किलोग्राम
एसेंट व्हीकलः 700 किलोग्राम
चांद पर कहां उतरेगा चांगई-6... दक्षिणी ध्रुव के पास मौजूद अपोलो बेसिन में. 

चीन का दूसरा सैंपल रिटर्न मिशन है चांगई-6

Chang'e-6 लूनर मिशन चीन का दूसरा ऐसा मिशन है, जो चंद्रमा से सैंपल लेकर आ रहा है. इसके पहले चीन के चांगई-5 ने सफलतापूर्वक चांद की मिट्टी का सैंपल धरती पर भेजा था. चांगई प्रोजेक्ट चीन का साल 2007 से शुरू हुआ था. तब पहला चांगई भेजा गया था. 2010 में चांगई-2 लैंडर-रोवर भेजे गए. इसके बाद 2013 में चांगई-3, 2019 में चांगई-4. तीसरे वाले मिशन ने सैंपल जमा करना शुरू कर दिया था. फिर जब चांगई-5 गया तो उसने तीसरे मिशन से सैंपल लिया और धरती पर वापस लौट आया. 

Pakistan Moon Mission

स्पेस इंडस्ट्री में कहां है भारत और पाकिस्तान? 

ISRO ने अब तक 61 सालों में 34 देशों के 424 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया है. दुनिया की नंबर एक स्पेस एजेंसी है, जो कॉमर्शियल लॉन्चिंग की बादशाह है.  इसरो 123 स्पेसक्राफ्ट मिशन, 91 लॉन्च मिशन, 15 स्टूडेंट सैटेलाइट्स, 2 री-एंट्री मिशन, तीन भारतीय प्राइवेट सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है. जबकि, पाकिस्तान सिर्फ पांच. 

Advertisement

पाकिस्तान ने 16 सितंबर 1961 में स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (SUPARCO) बनाया. वह भी भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के आधिकारिक गठन से करीब आठ साल पहले. लेकिन आज वो रेस में ही नहीं है. इसरो की स्थापना 1969 में हुई थी. उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का नाम इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च था. 

पाकिस्तान के पांच सैटेलाइट्स

- 16 जुलाई 1990 को छोड़ा गया था बद्र-1. यह एक आर्टिफिशियल डिजिटल उपग्रह था. इसने 6 महीने बाद अंतरिक्ष में काम करना बंद कर दिया था.
- बद्र-बी उपग्रह जो एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट था. इसे 10 दिसंबर 2001 को लॉन्च किया गया था.
- पाकात-1आर या पाकसाक-1 उपग्रह 11 अगस्त 2011 को चीन की मदद से छोड़ा गया. इसे चीन ने ही बनाया था. यह एक संचार उपग्रह है. यह अभी काम कर रहा है.
- आईक्यूब-1 उपग्रह है जिसे 21 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था. यह बायोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, स्पेस डायनेमिक्स आदि जैसे प्रयोगों के लिए बनाया गया था. इसने भी दो साल काम किया.
- पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट. इसे 9 जुलाई 2018 को लॉन्च कर दिया गया था. इसे भी चीन ने अपने रॉकेट से लॉन्च किया था.

Pakistan Moon Mission

62 साल में सिर्फ पांच सैटेलाइट छोड़े पाक ने 

Advertisement

ISRO की धाक पूरी दुनिया में है. भारत के सामने पाकिस्तान का कोई वजूद ही नहीं है. सिर्फ चीन ही है जो भारत से कुछ मामलों में आगे है.  आइए समझते हैं कि पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक कोई बड़ा काम किया भी है या नहीं. पाकिस्तान ने 62 साल में सिर्फ पांच सैटेलाइट ही छोड़े हैं. जबकि भारत से चार बार युद्ध हार चुका है. युद्ध के पैसे स्पेस एजेंसी के विकास में लगाता तो आज पाकिस्तान भी एशिया का बड़ा नाम हो सकता था. 

ISRO से दशकों पीछे हैं पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी 

पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी का दुनिया में कोई नाम नहीं है. जबकि, इसरो ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में एक है. दक्षिण एशिया में तो नंबर एक. दक्षिण एशिया में आठ देश हैं. भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में सिर्फ चीन ही थोड़ा बहुत प्रयास कर रहा है. स्पेस साइंस में पाकिस्तान को भारत की बराबरी करने में दशकों लग जाएंगे. 

Live TV

Advertisement
Advertisement