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China ने पेश किया चांद पर उनके एस्ट्रोनॉट को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट, 2030 से पहले पूरा करेगा ह्यूमन मून मिशन... Video

चीन ने चंद्रमा पर अपने यात्रियों को पहुंचाने वाले स्पेसक्राफ्ट के नाम और डिजाइन का खुलासा कर दिया है. वह 2030 से पहले अपने एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा पर ले जाएगा. आइए जानते हैं कि चीन का इस मून मिशन को लेकर क्या प्लान है?

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चीन 2030 से पहले चांद पर अपने एस्ट्रोनॉट्स को उतार देगा. इसके लिए उसने रॉकेट, यान सब तैयार कर लिया है. (फोटोः गेटी)
चीन 2030 से पहले चांद पर अपने एस्ट्रोनॉट्स को उतार देगा. इसके लिए उसने रॉकेट, यान सब तैयार कर लिया है. (फोटोः गेटी)

China 2030 से पहले अपने एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा की सतह पर उतार देगा. इसके लिए उसने अपने लैंडर और क्रू मॉड्यूल का खुलासा कर दिया है. जिस अंतरिक्षयान में उसके एस्ट्रोनॉट्स बैठकर चंद्रमा तक जाएंगे, उसका नाम है मेंगझोऊ (Mengzhou) और जो लैंडर उसे लेकर जाएगा उसका नाम है लानुई (Lanyue) लूनर लैंडर. 

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यहां देखिए Video

चीनी भाषा में मेंगझोऊ का मतलब होता है सपने का जहाज और लानुई का मतलब होता है चंद्रमा की तारीफ करना. मेंगझोऊ का जिक्र चीन माओ जेडॉन्ग की कविता में आता है. जबकि लानुई का जिक्र कवि ली बाई की कविताओं में आता है. चीन इससे पहले शेनझोऊ (Shenzhou) और तियानझोऊ (Tianzhou) नाम के स्पेसक्राफ्ट लॉन्च कर चुका है. 

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इन्हीं के जरिए उसके एस्ट्रोनॉट्स चीनी स्पेस स्टेशन तियानगॉन्ग तक जाते हैं. ये स्पेस स्टेशन धरती की निचली कक्षा में चक्कर लगाता रहता है. चीनी स्पेस एजेंसी CNSA ने आम जनता के लिए एक प्रतियोगिता रखी थी. ताकि लोग इन दोनों यानों का नाम सुझा सकें. 2000 से ज्यादा लोगों की एंट्री आईं. अंतिम नाम एक्सपर्ट पैनल ने चुना. 

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China Human Moon Mission
बीच में मेंगझोऊ स्पेसक्राफ्ट और अगल-बगल लानुई लूनर लैंडर. 

मेंगझोऊ में सात एस्ट्रोनॉट बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा कर सकते हैं. यानी धरती की निचली कक्षा तक तो बेहद आराम से. लेकिन चांद तक यह यान सिर्फ तीन एस्ट्रोनॉट को ले जाएगा. इसके पहले कई टेस्ट होने बाकी है. पहली उड़ान 2027 में संभव है. चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन इस यान और लैंडर को बना रहा है. 

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ऐसी संभावना है कि इस यान को लॉन्ग मार्च 10 रॉकेट्स से छोड़ा जाएगा. यह लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट का ही अपग्रेडेड और एडवांस वर्जन होगा. लॉन्चिंग दो रॉकेट से होगी. पहले से मेंगझोऊ लॉन्च होगा, दूसरे से लानुई लूनर लैंडर. फिर ये दोनों यानी मेंगझोऊ और लानुई चंद्रमा की ऑर्बिट में एकदूसरे से जुड़ जाएंगे.

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इसके बाद एस्ट्रोनॉट्स को लैंडर में शिफ्ट किया जाएगा. ये लोग फिर चांद की तरफ अपना यान लेकर जाएंगे. लानुई लैंडिंग के लिए सेपरेट प्रोपल्शन स्टेज का इस्तेमाल करेगा. इसमें एक 200 किलोग्राम का क्रू रोवर भी होगा. यानी एस्ट्रोनॉट को लेकर चलने वाली कार जैसा रोबोट.

काम पूरा होने के बाद लानुई एस्ट्रोनॉट्स को चांद के ऑर्बिट में वापस लॉन्च कर देगा. फिर दोनों एक दूसरे से जुड़ेंगे और वापस धरती की तरफ लौटेंगे. चीन फिलहाल इन लॉन्ग मार्च 10 रॉकेट, मेंगझोऊ और लानुई के अलग-अलग स्टेजेस पर काम कर रहा है. इसके अलावा स्पेससूट पर भी काम चल रहा है. लॉन्चिंग और लैंडिंग साइट का तकनीकी प्रस्ताव भी मान लिया गया है. 

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