चीन के वैज्ञानिकों दुनिया की सबसे गहरी जगह पर वायरस खोज लिया है. यानी मरियाना ट्रेंच की तलहटी में. जहां वायरस खोजा गया है, उस जगह की गहराई 29,199 फीट है. यानी 8900 मीटर. मतलब चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार दुनिया के सबसे गहरे स्थान में वायरस खोजने का कारनामा किया है.
इस वायरस का नाम है vB_HmeY_H4907. मरियाना ट्रेंच की सबसे गहरी तलहटी 36 हजार फीट पर है. यानी वायरस जहां मिला है, वह सबसे गहरी तलहटी से 6801 फीट ऊपर है. मरियाना ट्रेंच प्रशांत महासागर में मौजूद है. असल में यह वायरस बैक्टीरियोफेज है. मतलब ऐसा जीव जो सिर्फ और सिर्फ बैक्टीरिया को खाता है.
बैक्टीरिया को खाकर उसके अंगों के सहारे वह खुद को रेप्लिकेट करता है. अपनी कई कॉपी बनाकर कॉलोनी को आगे बढ़ाता है. इसे लेकर वैज्ञानिकों की स्टडी हाल ही में माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम जर्नल में प्रकाशित हुई है. ओशन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के मरीन वायरोलॉजिस्ट मिन वांग कहते हैं कि आजतक इतने एकांत में किसी वायरस की खोज नहीं हुई है. यानी धरती पर एकदम सुदूर और शांत जगह पर.
बैक्टीरिया मारकर और बिना मारे भी बनाता है निवाला
नया वायरस बैक्टीरिया के हैलोमोना फाइलम को संक्रमित करता है. यानी अपने जेनेटिक मैटेरियल को बैक्टीरिया के जीनोम में डालता है. इसके बाद रेप्लीकेट कर जाता है. वह भी बिना बैक्टीरिया को मारे. इसे लाइसोजेनिकली रेप्लिकेशन कहते हैं. मतलब यहां पर माहौल ऐसा है कि वायरस और बैक्टीरिया दोनों वहां पर एकदूसरे को मारकर अपनी कॉलोनी को आगे बढ़ा सकते हैं. या फिर उनका इस्तेमाल करके.
हैलोमोनास दुनिया के किसी भी समुद्र में मिल सकते हैं. ये अंटार्कटिक की तलहटी में भी मिलते हैं. खास तौर से हाइड्रोथर्मल वेंट्स के आसपास. जब वैज्ञानिकों ने vB_HmeY_H4907 जेनेटिक एनालिसिस किया तो पता चला कि यह वायरस बैक्टीरिया की तरह कई रेंज और प्रजातियों वाला है. किसी को भी संक्रमित कर सकता है.
इंसानों पर क्या कर सकता है संक्रमण का हमला
vB_HmeY_H4907 वायरस जिस जगह पर अपनी आबादी बढ़ा रहा है, उसे हैडल जोन (Hadal Zone) कहते हैं. इतनी गहराई में रहने वाले बैक्टीरिया और वायरस इंसानों की पहुंच से इतनी दूर हैं कि आप इन्हें एलियन कह सकते हैं. इंसानों को इनके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है. कई बार तो ऐसी चीजों के होने का आइडिया भी नहीं होता.
अभी तक ये नहीं पता चला है कि ये वायरस इंसानी शरीर में किस तरह से रिएक्ट करेगा. लेकिन इसकी कई प्रजातियां होने की पुष्टि हुई है. यानी संक्रमण फैला सकता है. अभी यह भी नहीं पता चला है कि यह वायरस अपने होस्ट से किस तरह से संपर्क बनाता है.