हमारा सूर्य विशाल, अशांत और बेहद गर्म है. यह अंतरिक्ष में हाई-एनर्जी रेडिएशन फेंकता है, जिनमें से कुछ पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) में भी पहुंच जाती है. ISS एक दिन में 16 बार हमारे ग्रह के चक्कर लगाता है. सही जगह, सही टेलीस्कोप से आप इसे ऊपर से गुजरते हुए देख सकते हैं. और मात्र कुछ ही मिलीसेकंड के लिए, ISS कभी-कभी सूर्य के सामने भी दिखाई दे जाता है.
फ़ोटोग्राफ़र एंड्रयू मैक्कार्थी (Andrew McCarthy) ने उसी एक पल को एक हैरान करने वाली तस्वीर में कैद किया है. इस तस्वीर को कंपोज़ करने में उन्हें 12 घंटे लगे, क्योंकि तस्वीर तीन टेलीस्कोप से ली गई थी. यह अभी एक तस्वीर दिख रही है, लेकिन असल में यह हजारों तस्वीरों का एक मोज़ैक है.
तो, क्या आपको इस तस्वीर में स्पेस स्टेशन नज़र आ रहा है? स्पेस स्टेशन एक सनस्पॉट के बगल में है. यह सूर्य की सतह का वह क्षेत्र है जो गहरे रंग का नज़र आता है, क्योंकि यह आसपास के क्षेत्र की तुलना में ठंडा है.
तस्वीर को देखकर लगता है कि स्पेस स्टेशन सूर्य की सतह पर है, लेकिन ऐसा सिर्फ इसलिए लग रहा है क्योंकि यह हमसे बहुत दूर है. पृथ्वी से 402 किलोमीटर ऊपर. तस्वीर को थोड़ा ज़ूम करके देखें तो आपको ISS नज़र आएगा.
स्पेस स्टेशन सूर्य के प्लाज्मा पर सिर्फ छाया आकृति की तरह दिखता है. जैसे-जैसे सूर्य ज़्यादा एक्टिव होता है, वह और ज़्यादा मैटीरियल अंतरिक्ष में फेंकता है. कभी-कभी पृथ्वी की तरफ भी. इसे ही सोलर फ्लेयर्स (Solar flares) या कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal mass ejections) कहा जाता है.
मैक्कार्थी को यह फोटो लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसके लिए सही समय, सही फिज़िक्स और बहुत ज़्यादा संतुलन की ज़रूरत थी. अंतरिक्ष स्टेशन अक्सर पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, लेकिन एक अच्छी तस्वीर पाने के लिए मैककार्थी चाहते थे कि वह सीधे उनके सिर के ऊपर की ओर होना चाहिए. नहीं तो, स्पेस स्टेशन क्षितिज पर छोटा नज़र आता.
उन्होंने तारीखें और सटीक समय नोट किया, जब यह एरिज़ोना रेगिस्तान में उनके घर से लगभग दो घंटे की दूरी से गुजरता. वह अपनी कार में सैकड़ों किलो के उपकरण भरकर उस सटीक स्थान पर पहुंचे, जिसकी उन्होंने गणना की थी और वहां अपने टेलीस्कोप लगाए. आसमान साफ था और वह सही समय का इंतजार करने लगे. तभी स्पेस स्टेशन नज़र आया, उनके पास आधे से भी कम सेकंड का समय था, जैसे ही ISS सूर्य के पास से गुजरा, एक बादल आया और उसने काम खराब कर दिया.
मैक्कार्थी ने एक और दिन फिर कोशिश की. लेकिन बाहर निकलते ही उसका टायर फट गया और उन्हें लगा कि उन्होंने फिर एक चांस मिस कर दिया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. टायर बदल दिया, और उम्मीद लिए रेगिस्तान में वापस लौट आए.
मैककार्थी ने कहा, उस दिन तापमान बहुत ज़्यादा था. उन्होंने अपने उपकरण लगाए. उन्होंने उस दिन सूर्य की सतह की सैकड़ों तस्वीरें लीं. जिसे जोड़कर, उन्होंने एक मोज़ैक बनाया.
बैकग्राउंड में मैक्कार्थी सूर्य के क्रोमोस्फीयर की उग्रता को कैप्चर करना चाहते थे. यह सतह (फोटोस्फीयर) और इसके वायुमंडल की सबसे बाहरी परत (कोरोना) के बीच प्लाज्मा की पतली परत होती है. नासा के मुताबिक, इस परत में, सूर्य का प्लाज्मा 5,538 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान तक पहुंच जाता है. यह इतना गर्म होता है कि इसका हाइड्रोजन एक लाल रंग का प्रकाश उत्सर्जित करता है. यही वो क्रोमोस्फीयर लाइट है जिसे मैककार्थी कैप्चर करना चाहते थे.
This Incredible Close-Up of The Sun Conceals a Hidden Detail. Can You Spot It? https://t.co/odkkE1FacF
— ScienceAlert (@ScienceAlert) May 5, 2023
मैककार्थी ने कहा कि क्रोमोस्फीयर तस्वीरों में, प्लाज्मा मूवमेंट की वजह से सूर्य 'बालों वाली गेंद' जैसा दिखता है. ठीक वैसा जैसे आपने कोरोनावायरस की तस्वीरें देखी होंगी. लेकिन स्पेस स्टेशन विज़िबल लाइट में दिखाई देता है. इसलिए मैक्कार्थी को तीन दूरबीनों की ज़रूरत थी. एक ने क्रोमोस्फीयर के 'हाइड्रोजन अल्फा' एमिशन को कैप्चर किया. बाकी दो ने अंतरिक्ष स्टेशन दिखाने के लिए ऑप्टिकल लाइट को कैप्चर किया. उनकी दूरबीनों ने हर सेकंड लगभग 230 फोटो खींचे. मैक्कार्थी का कहना था कि अगर वह इतनी तेजी से फोटो नहीं ले रहे होते, तो वास्तव में वे इस शानदार पल को पूरी तरह से मिस कर देते.