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बुध ग्रह के पीछे दिखी कॉमेट जैसी पूंछ, पृथ्वी के सबसे करीब आया तो ली गई दुर्लभ तस्वीर

फ्रांस में एक एस्ट्रोफोटोग्राफर ने रात के आसमान में बुध ग्रह की एक बेहद खास तस्वीर ली. इस तस्वीर की खास बात यह है कि इसमें बुध ग्रह की पूंछ नज़र आ रही है. यह पूंछ ठीक किसी धूमकेतु की पूंछ की तरह लग रही है. जानते हैं कि कैसे और कब दिखाई देती है बुध ग्रह की पूंछ.

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पेरिहेलियन के ठीक 16 दिन बाद बुध की पूंछ सबसे साफ दिखती है. (Photo: Dr. Sebastian Voltmer)
पेरिहेलियन के ठीक 16 दिन बाद बुध की पूंछ सबसे साफ दिखती है. (Photo: Dr. Sebastian Voltmer)

पिछले दिनों जब सूर्य का पड़ोसी ग्रह बुध (Mercury), पृथ्वी के सबसे करीब पहुंच गया था, तो वह एक धूमकेतु (Comet) की तरह नज़र आ रहा था. रात के आकाश में उसकी विशाल और आकर्षक पूंछ दिख रही थी. एक एस्ट्रोफोटोग्राफर (Astrophotographer) ने इस पल को अपने कैमरे में कैद कर लिया. 

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पहले जानते हैं कि कॉमेट या धूमकेतु क्या होते हैं. धूमकेतु जमी हुई चट्टानों, गैसों और धूल की परिक्रमा करते हैं. इनके पीछे हमेशा खास तरह की दो पूंछ देखी जाती हैं. इन दोनों पूंछों में एक गैस से बनी होती है, जो उसके  अंदरूनी हिस्सों से लीक होती है और दूसरी पूंछ उनकी सतहों से धूल द्वारा बन जाती है. इन दो पूंछ धूमकेतु से उसी दिशा में निकलती हैं, जिसमें सूर्य से निकलने वाले आवेशित कण निकलते हैं, जिन्हें सोलर विंड कहा जाता है.

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 2.4 करोड़ किलोमीटर तक लंबी हो सकती है बुद्ध की पूंछ (Photo: Dr. Sebastian Voltmer)

बुध, सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है. इसके पास सोडियम आयनों से बनी एक धूमकेतु जैसी पूंछ है. शोधकर्ताओं को 2001 में बुध ग्रह की पूंछ के बारे में पता चला था और तब से अब तक यह सामने आया है कि यह सूर्य से अपनी  निकटता के आधार पर बढ़ती और घटती है.

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Spaceweather.com के मुताबिक, इस पूछ की लंबाई करीब 2.4 करोड़ किलोमीटर तक हो सकती है. यानी  पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से करीब 62 गुना ज़्यादा. यह पूंछ इतनी लंबी इसलिए है कियोंकि बुध ग्रह का वातावरण बहुत कमजोर है और यह ग्रह सूर्य के करीब है, जिसकी वजह से सोलर हवाएं ग्रह की सतह को नष्ट कर देती हैं. 

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 सूर्य के करीब होने की वजह से इसकी सतह के आसपास काफी धूल होती है (Photo: Bruno Albino/Pixabay)

Spaceweather.com के मुताबिक, पेरिहेलियन (Perihelion) के ठीक 16 दिन बाद बुध ग्रह की पूंछ सबसे साफ तौर पर दिखती है. पेरिहेलियन यानी वह समय जब ग्रह पृथ्वी के सबसे करीब होता है. एस्ट्रोफोटोग्राफ़र सेबेस्टियन वोल्टमर ने स्पाइचेरेन के पास एक जगह से ग्रह की पूंछ की एक आश्चर्यजनक तस्वीर ली. आपको बता दें कि ये तस्वीर पेरिहेलियन के 16 दिन नहीं बल्कि 11 दिन के बाद की है. यानी अगर 5 दिनों के बाद तस्वीर ली जाती तो पूंछ और भी स्पष्ट दिखाई देती. 

 

आपको बता दें कि धूमकेतु जैसी पूंछ वाला बुध, हमारे सौर मंडल का अकेला ग्रह नहीं है, चंद्रमा के भी एक पूंछ होती है, जो महीने में केवल एक बार दिखाई देती है, जब  पृथ्वी इसके पास से गुजरती है. बुध की तरह, चंद्रमा की पूंछ भी लाखों सोडियम परमाणुओं से मिलकर बनी होती है.

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