जीवविज्ञानी, प्राकृतिक इतिहासकार और जाने माने ब्रॉडकास्टर सर डेविड एटनबरो (Sir David Attenborough) को संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' (Champions of the Earth) लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया है.
यह अवॉर्ड संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है, जो उन व्यक्तियों, समूहों और संस्थानों को दिया जाता है जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई हो. डेविड एटनबरो को उनके 'प्रकृति की सुरक्षा और संरक्षण के लिए रिसर्च, डॉकुमेंटेशन और एडवोकेसी के प्रति समर्पण' के लिए पुरस्कार दिया गया है. उनके हालिया प्रयासों में बीबीसी के ग्रीन प्लैनेट, ए परफेक्ट प्लैनेट, और एपल टीवी के आने वाले प्रीहिस्टोरिक प्लैनेट काफी अहम हैं.
एक प्राकृतिक इतिहासकार और ब्रॉडकास्टर के तौर पर डेविड एटनबरो के करियर की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी. हालांकि पिछले कुछ सालों में वे पर्यावरण और जलवायु संकट पर तत्काल कार्रवाई के लिए ज़्यादा मुखर दिखाई दिए हैं.
यूएनईपी के कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि एटनबरो ने अपना जीवन, मानव और प्रकृति के बीच की प्रेम कहानी को बताने और इसे दुनिया को दिखाने में समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि अगर हम जलवायु (Climate) और जैव विविधता (Biodiversity) के बारे जितना भी जान पाए हैं, वो सर डेविड के टीवी कार्यक्रमों के जरिए ही संभव हुआ है. सर डेविड का काम हर किसी को प्रकृति की देखभाल करने और इसका संरक्षण करने वाली पीढ़ी बनने के लिए प्रेरित करता रहेगा.
David Attenborough Has Been Named "Champion Of The Earth" By UNhttps://t.co/xqlFo2qJVE pic.twitter.com/71GbcXETpU
— IFLScience (@IFLScience) April 22, 2022
पुरस्कार को स्वीकार करते हुए, डेविड एटनबरो ने चेतावनी भी दी कि अगर हम जलवायु संकट को कम करना चाहते हैं, तो दुनिया को एक साथ काम करना होगा.
उन्होंने कहा, 'दुनिया को एक साथ आना होगा. इन समस्याओं को कोई एक राष्ट्र हल नहीं कर सकता, भले ही वह कितना ही बड़ा राष्ट्र क्यों न हो. हम जानते हैं कि समस्याएं क्या हैं और हम यह भी जानते हैं कि उन्हें कैसे हल किया जाए. हमारे पास सिर्फ एक चीज़ की कमी है, वह है एक संयुक्त अभियान की.
उन्होंने यह भी कहा, 'पचास साल पहले, व्हेल विलुप्त होने के कगार पर थीं. तब लोग एक साथ आए और अब समुद्र में पहले से कहीं ज़्यादा व्हेल हैं. अगर हम एक साथ काम करते हैं, तो हम इन समस्याओं को हल कर सकते हैं.'