वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक (Arctic) का 'डूम्स डे ग्लेशियर'(Doomsday Glacier), बहुत तेज़ी से ढह सकता है. इस ग्लेशियर के पिघलने की जो उम्मीद की गई थी, ये उससे तेजी से पिघल सकता है क्योंकि माना जा रहा है कि यह केवल एक पिन की नोक पर टिका है.
नेचर जियोसाइंस (Nature Geoscience) जर्नल में प्रकाशित एक नए शोध के मुताबिक, फ्लोरिडा के आकार का थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites glacier) अगर ढहा, तो यह समुद्र के स्तर को बहुत बढ़ा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह अच्छी खबर नहीं है क्योंकि, पहले के शोध ये बता चुके हैं कि यह ग्लेशियर अगले दशक के अंदर टूट सकता है और समुद्र के स्तर को इतना बढ़ा सकता है कि यह दुनिया की विशाल तटीय आबादी को काफी हद तक प्रभावित करेगा.
यह ग्लेशियर गर्म समुद्र और पश्चिम अंटार्कटिक बर्फ की चादर के बीच एक बफर के तौर पर काम करता है. इसी वजह से इस ग्लेशियर को डूम्सडे ग्लेशियर नाम दिया गया. हालांकि, दक्षिण फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी (University of South Florida) के नए शोध में पाया गया है कि हाल ही के सालों की तुलना में, थवाइट्स ग्लेशियर पिछली शताब्दियों में बहुत तेजी से पिघला है.
इसका मतलब यह है कि भविष्य में यह तेज गति से ट्रिगर हो सकता है. यूनिवर्सिटी की एक प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि थ्वाइट्स के पिघलने से होने वाले प्रभाव बहुत डरावने हैं. ग्लेशियर खत्म हो सकता है और समुद्र का स्तर तीन से दस फीट तक बढ़ सकता है.
ग्लेशियर के नीचे समुद्र तल को मैप करने के लिए, शोधकर्ताओं ने पहली बार पानी के नीचे ड्रोन का इस्तेमाल करके ये पता लगाया है. शोध के मुताबिक, उन्होंने जिन रिज को मैप किया है, वे 'एक फुटप्रिंट' की तरह हैं, जो ये बता रहे हैं कि पहले ग्लेशियर का आधार कहां था. इससे पता चलता है कि हाल के सालों की तुलना में, पिछले 200 सालों में ये ग्लोशियर दो बार तेजी से पिघला था.
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के जिओफिजिसिस्ट और शोध के लेखक डॉ रॉबर्ट लार्टर (Dr Robert Larter) का कहना है कि यूं समझिए कि इस वक्त थ्वाइट्स ग्लेशियर ने अपने नाखूनों से पकड़ बनाई हुई है. हम कम समय में बड़े बदलाव देख सकते हैं. शोध के मुख्य लेखक एलिस्टेयर ग्राहम (Alastair Graham) का कहना है कि थ्वाइट्स पर लगी एक छोटी सी किक से भी, अंजाम बहुत बड़ा हो सकता है. बहुत बड़ा यानी बहुत बुरा भी.
This is really bad news, folks. https://t.co/yMBFuCdZ6u
— Futurism (@futurism) October 6, 2022
थ्वाइट्स ग्लेशियर के पिघलने की दर को पहले, सैटेलाइट इमेजिंग के ज़रिए मापा गया था. 2020 में, उन तस्वीरों पर की गई स्टडी में पाया गया कि थ्वाइट्स, और उसके पड़ोसी पाइन द्वीप ग्लेशियर, पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से टूट रहे थे. थ्वाइट्स को आंशिक रूप से एक आइस शेल्फ द्वारा संरक्षित किया गया है जिसे वैज्ञानिकों ने तेजी से बिगड़ते देखा है. पिछले साल दिसंबर में, वैज्ञानिकों ने कहा था कि ये शेल्फ पांच साल के अंदर पिघल जाएगा.