बात पिछले साल की है. मई में अमेरिका के LRO यानी लूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर ने चांद की तस्वीर भेजी. जिसमें दो नए गड्ढे एकसाथ दिखाई दिए. आमतौर पर चांद की सतह पर जब कोई चीज टकराती है, तो वह एक ही गड्ढा बनाती है. जिसे क्रेटर कहते हैं. लेकिन यहां पर दो गड्ढे एकदूसरे के ऊपर चढ़े हुए मिले. ये एक दुर्लभ घटना है.
पूरी दुनिया हैरान रह गई. वैज्ञानिक परेशान... क्योंकि उनसे यह रहस्य सुलझ नहीं रहा था. वजह ये थी कि गड्ढों के आसपास रॉकेट के टुकड़ों का कोई सबूत नहीं मिला. वैज्ञानिकों को समझ नहीं आ रहा कि रॉकेट के एक हिस्से की टक्कर से दो गड्ढे कैसे बन गए? न तो आसपास रॉकेट के सबूत है. न ही कोई बूस्टर या यंत्र या हिस्सा दिखाई पड़ा.
पिछले साल 4 मार्च 2022 को रॉकेट बूस्टर चांद के अंधेरे वाले हिस्से से टकराया था. LRO ने तस्वीरें 25 मई 2022 को ली हैं. जहां ये क्रेटर बने हैं, वह इलाका मैदानी है. अब कहा जा रहा है कि चीन के रॉकेट की वजह से ये दो गड्ढे बने, जिसमें कोई अनजान हथियार रखा था. या कोई अलग तरह का पेलोड था उसमें, जो रॉकेट से अलग होकर नया गड्ढा बना गया.
दो गड्ढे लगभग एक बराबर आकार के
अंतरिक्ष विज्ञानी बिल ग्रे ने ही सबसे पहले इन गड्ढों को खोजा था. इन्होंने ही जनवरी 2022 में रॉकेट बूस्टर के चांद से टकराने की भविष्यवाणी की थी. बिल ग्रे कहते हैं कि रॉकेट की दिशा और दशा की गणित ये बताती है कि ये वर्टिकली 15 डिग्री के एंगल से जाकर टकराया होगा. इसलिए इससे दो गड्ढे बनने की उम्मीद नहीं लग रही है. यहां दो गड्ढे हैं. पहला पूर्व दिशा में जिसका व्यास 18 मीटर है, यह पश्चिमी गड्ढे के ऊपर चढ़ा हुआ है. पश्चिमी गड्ढा 16 मीटर व्यास का है.
पहले लगा स्पेसएक्स का रॉकेट है
चीन के अधिकारी और वैज्ञानिक इस घटना से साफ इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि 2014 में चांद पर पहुंचे Chang'e 5-T1 मिशन का रॉकेट उसी साल वायुमंडल में आकर जल गया था. यह उनके रॉकेट की वजह से गड्ढे नहीं बने हैं. पिछले साल ये कहा गया था कि पहले कहा गया था कि SpaceX के रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है, जो चांद की तरफ जा रहा है. जो NASA का डीप स्पेस क्लाइमेट ऑब्जरवेटरी लेकर गया है. लेकिन बाद में यह बात खारिज हो गई.
47 रॉकेट टकराए हैं आजतक चांद से
बिल ग्रे तो अब भी अपनी बात पर अडिग हैं कि चांद पर अगल-बगल दो गड्ढे चीन के रॉकेट में लगे किसी हथियार की वजह से बने हैं. एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक NASA के कम से कम 47 रॉकेट और उसके हिस्से चांद की सतह से टकराए हैं. लेकिन इनमें से किसी भी घटना में अगल-बगल दो गड्ढे टक्कर की वजह से नहीं बने.
दो समान गड्ढे यानी टकराने वाली वस्तुएं एक भार की होंगी
इन गड्ढों को देखकर लगता है कि वहां पर कोई डंबल गिरा हो. इसलिए दो गड्ढे बन गए. लेकिन रॉकेट में ऐसी कोई वस्तु नहीं होती. वहां जो टक्कर हुई है उस समय टकराने वाली वस्तु की गति 9290 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की स्टडी के प्रमुख रिसर्चर टैनर कैंपबेल ने कहा कि गड्ढों को देखकर साफ लगता है कि वहां पर दो चीजें एक समान भार वाली टकराई हैं. एक चीज से दो गड्ढे वो भी एक ही आकार के बनना मुश्किल है.
टैनर कहते हैं कि हमें ये नहीं पता कि किस तरह का पेलोड चीन के रॉकेट में था, लेकिन ये भी हो सकता है कि चीन किसी तरह के हथियार का परीक्षण चांद पर कर रहा हो. शायद ये जानकारी हमें कभी न मिले. क्योंकि चीन ये जानकारी कभी दुनिया को नहीं देगा. लेकिन इतना तो पुख्ता है कि वहां पर रॉकेट के साथ गई और वस्तु भी टकराई है, जो रॉकेट के ऊपरी हिस्से के वजन के बराबर थी.