अभी जंगलों में आग लगेगी. समंदर से उठकर चक्रवाती तूफान आएंगे. सूखा भी पड़ेगा. तापमान बढ़ा रहेगा. ऐसे एक्स्ट्रीम मौसम दुनिया के अलग-अलग कोनों में देखने को मिलेगा. वजह है अल नीनो (El Nino) का बने रहना. अगले कुछ महीनों तक अल नीनो का असर देखने को मिलता रहेगा.
वैज्ञानिकों ने कहा अल नीनो के कमजोर पड़ने की संभावना अप्रैल और जून के बीच है. लेकिन सिर्फ 73 फीसदी. अमेरिका के नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने यह आशंका जताई है. अल नीनो की वजह से समंदर की ऊपरी सतह गर्म हो रही है. जिससे पूर्वी और मध्य प्रशांत क्षेत्र में काफी ज्यादा मौसमी बदलाव देखने को मिल रहे हैं.
दुनिया में कई जगहों पर मौसम तेजी से बदलेगा. सबसे बड़ी दिक्कत खाद्य एवं ऊर्जा सेक्टर की कीमतों पर पड़ेगा. ब्राजील में तो बीफ और चावल की कीमतों में अभी से बढ़ोतरी होने लगी है. इसकी वजह अल नीनो के प्रभाव में आकर खराब होने वाली फसलें. वहां काफी ज्यादा सूखा पड़ रहा है. हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स की उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ा है.
सर्दियां भी होने लगी है गर्म... बढ़ रहा है बिजली संकट
अल नीनो की वजह से सर्दियों पर भी असर पड़ा है. सर्दियां ज्यादा गर्म और नमी वाली हो गई हैं. जिसकी वजह से अमेरिका-यूरोप में भारी बर्फबारी हो रही है. बिजली का संकट हो रहा है. पिछले 10 वर्षों में अमेरिका में अल नीनो के प्रभाव के चलते सर्दियों में बिजली की खपत 20 फीसदी बढ़ जाती है. जापान ने मौसम विभाग ने कहा है कि अल नीनो इस साल अप्रैल से जून के बीच 40 फीसदी तक कमजोर हो सकता है. यह पूरे उत्तरी गोलार्ध पर असर डालेगा.
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो असल में ENSO क्लाइमेट साइकिल का हिस्सा है. यह भूमध्य रेखा (Equator Line) पर पूर्व की दिशा में चलने वाली गर्म हवाएं होती हैं. जो प्रशांत महासागर की सतह को गर्म करती हैं. यह गर्म पानी फिर अमेरिका से एशिया की तरफ बढ़ता है. जैसे-जैसे गर्म पानी तेजी से आगे बढ़ता है, गर्मी बढ़ती जाती है. उसकी जगह नीचे से ठंडा पानी आ जाता है. फिर वो गर्म होकर आगे बढ़ता है.
11 मई 2023 को NOAA ने कहा था कि इस साल अल नीनो के आने का 90 फीसदी चांस है. जो उत्तरी गोलार्द्ध की सर्दी के मौसम पर भी असर डालेगा. इसकी वजह से समुद्री तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी. 55 फीसदी चांस है अत्यधिक तीव्र अल-नीनो आएगा. इससे तापमान में डेढ़ डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा.
पिछले साल टूटा था समुद्री तापमान का रिकॉर्ड
अप्रैल में वैज्ञानिकों ने सबसे ज्यादा समुद्री तापमान का रिकॉर्ड दर्ज किया था. वैश्विक औसत तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था. यह असर जलवायु परिवर्तन की वजह से हैं. उष्णकटिबंधीय इलाकों से ला-नीना का असर खत्म हो चुका है. अब यह गर्म हो रहा है. अल-नीनो का असर दिखने लगा है. जो कि गर्मी की बड़ी वजह बनेगा.
पिछली साल अल नीनो और सुपरचार्ज समुद्री तापमान का मिलन हो रहा है. इससे अगले 12 महीनों तक कई तरह के रिकॉर्ड टूटेंगे. ज्यादातर अधिकतम तापमान को लेकर होंगे. तब पता चलेगा कि हम अल-नीनो की वजह से क्या-क्या खो रहे हैं. अल नीनो जलवायु प्रणाली का एक हिस्सा है. यह मौसम पर बहुत गहरा असर डालता है.
अल नीनो के इसके आने से दुनियाभर के मौसम पर प्रभाव दिखता है. बारिश, ठंड, गर्मी सबमें अंतर दिखाई देता है. राहत की बात ये है कि अल-नीनो और ला-नीना दोनों ही हर साल नहीं, बल्कि 3 से 7 साल में दिखते हैं.